अमेरिका: 2 इंजेक्शन के बाद भी बच गई महिला कैदी, मृत्युदंड पर फिर छिड़ी बहस
वाशिंगटन । डेस्क: अमेरिका की टेनिसी की रिवरबेंड मैक्सिमम सिक्योरिटी जेल में बुधवार रात एक ऐसी घटना घटी, जिसने पूरे अमेरिका में मृत्युदंड और इसकी प्रक्रियाओं पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं. 50 वर्षीया क्रिस्टा गेल पाइक को जानलेवा इंजेक्शन की दो खुराकें दी गईं, लेकिन इसके बावजूद उनकी दिल की धड़कनें बंद नहीं हुईं. करीब एक घंटे तक चले इस भयानक दौर के बाद अधिकारियों को निष्पादन रोकना पड़ा और पाइक को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी हालत गंभीर बनी हुई है.
अगर यह प्रक्रिया पूरी हो जाती, तो पाइक पिछले 200 से अधिक वर्षों में टेनेसी राज्य में मौत की सजा पाने वाली पहली महिला बनतीं. वर्तमान में वह राज्य की डेथ रो में एकमात्र महिला कैदी हैं. पाइक को घातक दवा पेंटोबार्बिटल दी गई थी. हालांकि, एक संघीय अपील अदालत ने निष्पादन पर आखिरी समय में रोक लगा दी थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने निष्पादन से ठीक एक घंटा पहले इस स्टे को खारिज कर दिया, जिससे जेल प्रशासन के लिए रास्ता साफ हो गया था.
क्रिस्टा गेल पाइक ने गोली से भूनकर मृत्युदंड चाहा था
टेनेसी राज्य की 'डेथ रो' (मृत्युदंड की कतार) में खड़ी इकलौती महिला कैदी क्रिस्टा गेल पाइक ने अदालत और जेल प्रशासन से गुहार लगाई थी कि उन्हें राज्य के पारंपरिक तरीके 'लीथल इंजेक्शन' (जहरीले इंजेक्शन) से न मारा जाए, बल्कि इसके बजाय उन्हें 'ऑल-फीमेल फायरिंग स्क्वाड' यानी केवल महिला गोलंदाजों की टीम के सामने खड़ा करके गोलियों से भून दिया जाए. पाइक की इस अप्रत्याशित मांग ने न सिर्फ अदालत के गलियारों में सनसनी फैला दी है, बल्कि मौत की सजा देने के अमानवीय तरीकों पर एक नई बहस को जन्म दे दिया था.
चिकित्सकों और आघात (ट्रॉमा) विशेषज्ञों का कहना है कि यह प्रक्रिया उनके भीतर बचपन के उन खौफनाक लम्हों को दोबारा जीवित कर देगी. इसके अलावा, पाइक की शारीरिक स्थिति भी बेहद जटिल है. उनकी नसें बेहद पतली हैं और वे रक्त से जुड़ी एक विशेष बीमारी से जूझ रही हैं. पाइक को डर है कि जहरीले इंजेक्शन की सुई लगाने के लिए जब बार-बार नसें खोजी जाएंगी, तो वह प्रक्रिया बेहद दर्दनाक, तड़पाने वाली और अमानवीय होगी. इसी भयानक दर्द और पुराने मानसिक आघात से बचने के लिए उन्होंने गोलियों से भूने जाने का विकल्प चुना था.
हत्या का पुराना इतिहास और सजा की पृष्ठभूमि
क्रिस्टा पाइक का मामला तीन दशक पुराना है. जनवरी 1995 में, जब पाइक की उम्र महज 18 वर्ष थी, उन्होंने अपने प्रेमी तडारिल शिप और एक अन्य साथी के साथ मिलकर 19 वर्षीय कॉलीन स्लैमर्स की बेरहमी से हत्या कर दी थी. यह चारों एक ही वोकेशनल सेंटर के छात्र थे. पाइक ने प्रेम-प्रसंग में विवाद के कारण इस वारदात को अंजाम दिया था. वारदात के दौरान पीड़िता को प्रताड़ित किया गया था, जिसके बाद पाइक ने सिर पर वार करके उसकी हत्या कर दी.
इस चर्चित मामले में 1996 में पाइक को पहली डिग्री के कत्ल का दोषी मानते हुए मौत की सजा सुनाई गई, जबकि उनके नाबालिग साथी शिप को पैरोल की संभावना के साथ आजीवन कारावास मिला. पाइक के वकीलों का तर्क रहा है कि वह बचपन में गंभीर शारीरिक और मानसिक शोषण की शिकार रही थीं और अब 50 वर्ष की उम्र में एक पूरी तरह से बदली हुई पश्चाताप करने वाली महिला हैं.
इंजेक्शन देने के बाद भी बजती रहीं खर्राटों की आवाजें
सुप्रीम कोर्ट से हरी झंडी मिलने के बाद जेल में पाइक को दवा का पहला डोज दिया गया. चश्मदीद पत्रकारों के अनुसार, दवा दिए जाने के बाद भी पाइक पूरी तरह होश में दिख रही थीं. कुछ समय के लिए जब पर्दे हटाए गए, तो पाइक का मुंह खुला हुआ था और वह जोर-जोर से खर्राटे ले रही थीं.
समय बीतता गया, लेकिन उनकी सांसें चलती रहीं. उनके वकीलों ने तुरंत अदालत में एक नई याचिका दायर की, जिसमें कहा गया कि निष्पादकों ने दोनों सीरिंज की रासायनिक दवाएं शरीर में डाल दी हैं, फिर भी पाइक जीवित हैं और उनकी दिल की धड़कन चल रही है. रात करीब 8:53 बजे गवाहों को वहां से जाने के लिए कह दिया गया और निष्पादन प्रक्रिया अधूरी छोड़ दी गई.
क्यों विफल रही यह प्रक्रिया
मानवाधिकार विशेषज्ञों और कानूनी जानकारों का मानना है कि इस तरह की विफलता के पीछे दो मुख्य कारण हो सकते हैं. पहला यह कि इस्तेमाल की गई दवाएं एक्सपायर हो चुकी हों या उनकी गुणवत्ता सही न हो. फार्मास्युटिकल कंपनियां अक्सर मृत्युदंड के लिए अपनी दवाओं के इस्तेमाल का विरोध करती हैं, जिससे राज्यों को अनधिकृत या अप्रमाणित स्रोतों से दवाएं प्राप्त करनी पड़ती हैं.
दूसरा कारण नसों का न मिलना हो सकता है. लंबे समय तक तनाव और अतीत में नशीली दवाओं के सेवन के कारण मरीजों की नसें कमजोर हो जाती हैं. अमेरिका में नियम के मुताबिक डॉक्टर निष्पादन में सीधे शामिल नहीं हो सकते, जिसके कारण प्रशिक्षित चिकित्सा कर्मचारियों की कमी के चलते इंजेक्शन सही तरीके से नहीं लग पाता. पाइक के वकीलों ने पहले ही उनकी कमजोर नसों का हवाला देकर फायरिंग स्क्वाड द्वारा सजा की मांग की थी, जिसे खारिज कर दिया गया था.
अमेरिका में फिर शुरू हुआ विरोध का दौर
इस नाकाम निष्पादन के बाद टेनेसी के गवर्नर बिल ली ने राज्य में 2026 के लिए निर्धारित अन्य सभी निष्पादनों पर फिलहाल रोक लगा दी है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के आदेश दिए हैं. मानवाधिकार विशेषज्ञों ने इसे सीधे तौर पर अमानवीय और प्रताड़ना करार दिया है. संयुक्त राष्ट्र के विशेष प्रतिनिधियों ने भी चेतावनी दी है कि इस तरह की प्रक्रियाएं अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानूनों का उल्लंघन हैं.
यह घटना दर्शाती है कि जानलेवा इंजेक्शन जैसी प्रक्रियाओं में भी विफलता की दर काफी अधिक है. आंकड़े बताते हैं कि अमेरिका में 1890 से 2010 के बीच हुए निष्पादनों में से 3 प्रतिशत से अधिक में गड़बड़ी हुई थी, जिनमें सबसे खराब रिकॉर्ड घातक इंजेक्शनों का रहा है. फिलहाल पाइक अस्पताल में हैं, लेकिन इस घटना ने अमेरिका में मौत की सजा के भविष्य पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है.
घातक दवा पेंटोबार्बिटल क्या है?
पेंटोबार्बिटल (Pentobarbital) एक अल्पकालिक कार्य करने वाली बारबिटुरेट (Barbiturate) श्रेणी की दवा है, जो मुख्य रूप से केंद्रीय तंत्रिका तंत्र की गतिविधियों को धीमा करने का काम करती है. इसका उपयोग चिकित्सा क्षेत्र में मस्तिष्क में अवांछित उत्तेजना और गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है. चिकित्सीय रूप से इसे मुख्य रूप से सेडेटिव (शामक) और हिप्नोटिक (नींद लाने वाली) दवा के रूप में जाना जाता है.
कम खुराक में यह चिंता, घबराहट और अनिद्रा के इलाज में दी जाती है, जबकि उच्च खुराक में यह एक शक्तिशाली एनेस्थेटिक की तरह काम करती है. सर्जरी से पहले मरीजों को शांत करने, दौरे (Seizures) या मिर्गी के दौरों को रोकने और मस्तिष्क की गंभीर चोटों के मामलों में मस्तिष्क के दबाव (Intracranial Pressure) को कम करने के लिए भी डॉक्टरों द्वारा इसका इस्तेमाल किया जाता है.
शरीर में यह दवा जीएबीए (GABA) नामक एक न्यूरोट्रांसमीटर के प्रभाव को बढ़ाकर काम करती है, जिससे तंत्रिका कोशिकाओं के बीच सिग्नल धीमे हो जाते हैं और शरीर को आराम या नींद का अनुभव होता है. हालांकि, इसकी तेज और अत्यधिक क्षमता के कारण इसके उपयोग को लेकर बहुत सख्त कानूनी और चिकित्सा नियंत्रण हैं. यह दवा अत्यधिक आदत बनाने वाली और नशे की लत उत्पन्न करने वाली मानी जाती है, इसलिए इसे केवल डॉक्टर की देखरेख और लिखित सलाह पर ही अस्पताल या क्लिनिक में दिया जाता है.
दवा की अधिक खुराक (Overdose) या गलत उपयोग सांस लेने की प्रक्रिया को धीमा या पूरी तरह बंद कर सकता है, जिससे कोमा या मृत्यु तक हो सकती है. इसके अलावा, अमेरिका जैसे देशों में जहां मृत्युदंड का प्रावधान है, वहां घातक इंजेक्शन (Lethal Injection) की प्रक्रियाओं में भी इसका उपयोग किया जाता रहा है.