'वन बिग ब्यूटीफुल बिल' से भारत को नुकसान
नई दिल्ली । डेस्क: अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का 'वन बिग ब्यूटीफुल बिल' भारत के अर्थव्यवस्था के लिये नुकसानदायक हो सकता है. अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रस्तावित 'वन बिग ब्यूटीफुल बिल' में विदेशी कर्मचारियों द्वारा अपने देश भेजे जाने वाले धन पर 3.5% टैक्स लगाने का प्रावधान भारत की अर्थव्यवस्था के लिये बड़ा झटका साबित हो सकता है.
भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार, 2023 में प्रवासी भारतीयों ने 119 अरब डॉलर भारत भेजे, जो देश के व्यापार घाटे का आधा हिस्सा पूरा करने और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश से अधिक है. इस राशि का सबसे बड़ा हिस्सा अमरीका से आता है, जहां लाखों भारतीय प्रवासी उच्च आय वाले क्षेत्रों जैसे आईटी, मैनेजमेंट और साइंस में कार्यरत हैं.
यह टैक्स ग्रीन कार्ड धारकों और एच-1बी वीजा जैसे अस्थायी वीजा पर काम करने वाले कर्मचारियों पर लागू होगा. दिल्ली के ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव के फेलो अजय श्रीवास्तव का अनुमान है कि यदि रेमिटेंस में 10-15% की कमी आती है, तो भारत को सालाना 12-18 अरब डॉलर का नुकसान हो सकता है. इससे रुपये पर दबाव बढ़ेगा और केंद्रीय बैंक को मुद्रा स्थिर करने के लिये हस्तक्षेप करना पड़ सकता है.
केरल, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और तमिलनाडु जैसे राज्यों पर इस टैक्स का सबसे अधिक असर होगा, जहां परिवार शिक्षा, स्वास्थ्य और आवास जैसी जरूरतों के लिए रेमिटेंस पर निर्भर हैं. डब्ल्यूटीओ स्टडी सेंटर की रिपोर्ट के अनुसार, रेमिटेंस में कमी से घरेलू खपत, बचत और निवेश प्रभावित होंगे. परिवार खाद्य, स्वास्थ्य और शिक्षा को प्राथमिकता देंगे, जिससे संपत्ति और छोटे व्यवसायों में निवेश कम हो सकता है.
विश्व बैंक के अनुसार, भारत 2008 से रेमिटेंस प्राप्त करने वाला शीर्ष देश है, जिसकी वैश्विक हिस्सेदारी 2001 के 11% से बढ़कर 15% हो गई है. 2029 तक इसके 160 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है. भारत की प्रवासी आबादी 1990 में 66 लाख से बढ़कर 2024 में 1.85 करोड़ हो गई है, जिसमें से लगभग आधे खाड़ी देशों में और बाकी अमेरिका जैसे विकसित देशों में हैं.
विश्व बैंक के अर्थशास्त्री दिलीप रथ का कहना है कि यह टैक्स अनौपचारिक तरीकों जैसे हवाला, क्रिप्टोकरेंसी या नकदी हस्तांतरण को बढ़ावा दे सकता है. हालांकि, उनका मानना है कि 3.5% टैक्स प्रवासियों को धन भेजने से नहीं रोकेगा, क्योंकि अमरीका में न्यूनतम वेतन भी विकासशील देशों की तुलना में कई गुना अधिक है. फिर भी, इस टैक्स से भारत के स्थिर विदेशी मुद्रा स्रोत को नुकसान पहुंच सकता है, जिसका असर दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता पर पड़ सकता है.