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ईरान के स्वास्थ्य सेवाओं पर अमेरिकी-इज़रायली हमलें

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04 अप्रै. 2026, 04:28 AM 4 मिनट में पढ़ें 1

Pasture Institute Iran
Pasture Institute Iran

नई दिल्ली । डेस्क: ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच छिड़ा वर्तमान संघर्ष अब युद्ध के उन तमाम नैतिक और कानूनी दायरों को लांघ चुका है, जिन्हें आधुनिक सभ्यता ने दशकों की मेहनत के बाद 'जिनेवा कन्वेंशन' और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों के रूप में स्थापित किया था. 28 फरवरी से शुरू हुई इस सैन्य कार्रवाई में अब तक 2,076 से अधिक निर्दोष लोगों की जान जा चुकी है, लेकिन सबसे भयावह पहलू यह है कि इस युद्ध में जीवन बचाने वाले अस्पतालों और चिकित्सा अनुसंधान केंद्रों को ही रणक्षेत्र बना दिया गया है. 


तेहरान के प्रतिष्ठित 'पाश्चर इंस्टीट्यूट' से लेकर दवा कंपनियों और मनोरोग अस्पतालों तक पर हुए हमले यह दर्शाते हैं कि यह संघर्ष अब केवल सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह सीधे तौर पर एक राष्ट्र की जीवन रेखा को काटने का 'बिना नियमों का खेल' बन गया है. 

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अंतरराष्ट्रीय कानून, विशेष रूप से जिनेवा कन्वेंशन का अनुच्छेद 18, स्पष्ट रूप से कहता है कि नागरिक अस्पतालों को किसी भी परिस्थिति में हमले का निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए. इसके बावजूद, ईरान के स्वास्थ्य ढांचे पर हो रहे ये हमले वैश्विक व्यवस्था की विफलता और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के प्रति घोर अनादर का प्रतीक बन चुके हैं.



ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन, जो स्वयं एक विशेषज्ञ हृदय रोग चिकित्सक हैं, ने इस संकट की गंभीरता को रेखांकित करते हुए इसे 'मानवता के खिलाफ अपराध' की संज्ञा दी है. उनका यह बयान महज राजनीतिक आरोप नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय नियमों के उस उल्लंघन की ओर इशारा है जो युद्ध के समय में भी चिकित्सा तटस्थता (Medical Neutrality) के सिद्धांत को खत्म कर रहा है. 


जब इजरायली और अमेरिकी स्ट्राइक ने तेहरान के 100 साल पुराने पाश्चर इंस्टीट्यूट को निशाना बनाया, तो उन्होंने केवल एक इमारत को नहीं, बल्कि उस वैज्ञानिक धरोहर को चोट पहुँचाई जो दशकों से पूरे मध्य पूर्व में वैक्सीन निर्माण और संक्रामक रोगों के खिलाफ लड़ाई का नेतृत्व कर रही थी. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का प्रस्ताव 2286, जिसे 2016 में सर्वसम्मति से अपनाया गया था, संघर्ष वाले क्षेत्रों में चिकित्सा सुविधाओं और कर्मियों की सुरक्षा की मांग करता है. 


ईरान के 'तोफिग दारू' जैसी दवा कंपनियों पर हमले, जो कैंसर और हृदय रोगों की दवाएं बनाती हैं, सीधे तौर पर उन हजारों मरीजों के साथ अन्याय है जिनका इस युद्ध से कोई सीधा संबंध नहीं है. यह उन अंतरराष्ट्रीय मानदंडों का खुला उल्लंघन है जो युद्ध के दौरान भी आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतरता सुनिश्चित करने की बात करते हैं.


इस 'नियम विहीन' युद्ध की भयावहता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने 1 मार्च से अब तक ईरान में स्वास्थ्य सेवाओं पर 20 से अधिक हमलों की पुष्टि की है. बुशहर प्रांत में रेड क्रिसेंट के राहत गोदामों पर ड्रोन हमले और एम्बुलेंसों को निशाना बनाना यह सिद्ध करता है कि हमलावर पक्ष अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून (IHL) के उन बुनियादी सिद्धांतों-भेदभाव (Distinction) और आनुपातिकता (Proportionality)-को पूरी तरह नजरअंदाज कर रहा है. 


'देलेराम सिना मनोरोग अस्पताल' और 'अली अस्पताल' जैसे स्थानों पर बमबारी ने न केवल बुनियादी ढांचे को नष्ट किया है, बल्कि स्वास्थ्य कर्मियों के मन में ऐसा भय पैदा कर दिया है कि सेवाओं का संचालन असंभव होता जा रहा है. जिनेवा कन्वेंशन के तहत चिकित्सा कर्मियों को 'संरक्षित व्यक्ति' माना जाता है, लेकिन ईरान से लेकर लेबनान और गाजा तक, चिकित्सा कर्मियों की हत्या और गिरफ्तारी की खबरें यह बताती हैं कि युद्ध के नियम अब केवल कागजों तक सीमित रह गए हैं.


इजरायल द्वारा गाजा में अल-शिफा और अल-अहली अस्पतालों पर की गई पिछली कार्रवाइयों और लेबनान में 50 से अधिक चिकित्सा कर्मियों की हालिया हत्याओं के जो साक्ष्य सामने आए हैं, वे ईरान में अपनाई जा रही इसी विनाशकारी रणनीति का विस्तार प्रतीत होते हैं. जब एक देश दूसरे देश के स्वास्थ्य संस्थानों को ध्वस्त करता है, तो वह केवल वर्तमान को नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य को भी खतरे में डालता है. 


विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक द्वारा जताई गई चिंता यह स्पष्ट करती है कि यह संघर्ष अब केवल एक क्षेत्रीय विवाद नहीं है, बल्कि यह उस वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा ढांचे पर हमला है जिसे WHO जैसी संस्थाओं ने दशकों में खड़ा किया है. अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चुप्पी और वैश्विक शक्तियों द्वारा नियमों की इस अनदेखी ने एक ऐसा खतरनाक उदाहरण पेश किया है, जहां भविष्य के युद्धों में किसी भी मानवीय संस्थान की सुरक्षा की गारंटी नहीं दी जा सकेगी. 


यह समय केवल निंदा का नहीं, बल्कि उन शक्तियों को जवाबदेह ठहराने का है जो आधुनिक युद्ध के नाम पर सभ्य समाज के बुनियादी नियमों को पैरों तले रौंद रही हैं.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP