अमेरिका-ईरान शांति वार्ता: इस्लामाबाद बन सकता है अगला मंच
इस्लामाबाद । डेस्क: पश्चिम एशिया में शांति बहाली के प्रयासों के तहत अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली अगले दौर की तकनीकी स्तर की कूटनीतिक वार्ताओं के लिए पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद सबसे पसंदीदा और प्रमुख मंच के रूप में उभर रही है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे विवादों को सुलझाने और राजनयिक प्रक्रिया को पटरी पर बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है.
राजनयिक सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि इस महत्वपूर्ण तकनीकी वार्ता के लिए दो संभावित स्थानों पर विचार किया जा रहा है, जिनमें पाकिस्तान का इस्लामाबाद और स्विट्जरलैंड का बुर्गेनस्टॉक रिज़ॉर्ट शामिल हैं.
हालांकि, सूत्रों का कहना है कि इस्लामाबाद को इस बैठक के लिए अधिक संभावित और उपयुक्त विकल्प माना जा रहा है. यह तकनीकी वार्ता आगामी 11 जुलाई को होने की उम्मीद है, हालांकि इसके अंतिम स्थान की आधिकारिक घोषणा होना अभी बाकी है.
अयातुल्ला खामेनेई के निधन के कारण टली थी वार्ता:
यह कूटनीतिक वार्ता पहले ही आयोजित होनी थी, लेकिन ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन के बाद वहां कई दिनों तक चले राजकीय शोक और अंतिम संस्कार कार्यक्रमों के कारण इसे अस्थायी रूप से टाल दिया गया था.
अयातुल्ला खामेनेई, जिन्होंने पिछले तीन दशकों से ईरान पर शासन किया, अमेरिकी और इजरायली संयुक्त हवाई हमलों के दौरान मारे गए थे. ईरान के अधिकारियों ने संकेत दिया है कि अंतिम संस्कार की प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद वार्ता के लिए तेहरान के प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों के नामों की घोषणा की जाएगी.
परमाणु कार्यक्रम और प्रतिबंधों पर रहेगा मुख्य फोकस:
राजनयिक सूत्रों के मुताबिक, 11 जुलाई को होने वाली इस बैठक का मुख्य उद्देश्य दो सप्ताह पहले हस्ताक्षरित 'इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन' (MoU) के ढांचे को आगे बढ़ाना है. इस समझौते के तहत दोनों पक्षों को ईरान के परमाणु कार्यक्रम और उससे जुड़े मुद्दों पर एक व्यापक समझौते पर पहुंचने के लिए 60 दिनों का समय दिया गया है.
इस आगामी वार्ता में मुख्य रूप से ईरान के परमाणु कार्यक्रम, उस पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों में ढील और विदेशों में जमी (फ्रीज) पड़ी ईरानी संपत्तियों को बहाल करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा.
क्षेत्रीय सुरक्षा और सीजफायर पर भी होगी चर्चा:
परमाणु मुद्दों के अलावा, इस बातचीत में क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील मामलों को भी शामिल किया जाएगा. इसमें विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की निर्बाध आवाजाही और समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ हाल ही में लेबनान में हुए युद्धविराम को बनाए रखने के प्रयासों पर चर्चा होगी.
पाकिस्तान और कतर इस पूरी प्रक्रिया में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं और दोनों देशों के राजनयिक इस बातचीत को सफल बनाने के लिए लगातार सक्रिय हैं.
इस तकनीकी वार्ता के सफल समापन के बाद, जुलाई के तीसरे सप्ताह में कतर की राजधानी दोहा में दोनों पक्षों के बीच अगले दौर की उच्च स्तरीय सीधी बातचीत होने की संभावना है.