स्मार्टफोन में 'आधार ऐप' लोड करने के प्रस्ताव पर मचा घमासान
स्मार्टफोन में 'आधार ऐप' पर लोड करने के प्रस्ताव पर मचा घमासान
नई दिल्ली । डेस्क: भारत सरकार और वैश्विक स्मार्टफोन दिग्गज कंपनियों के बीच अब 'आधार' ऐप को लेकर टकराव की स्थिति पैदा हो गई है. केंद्र सरकार ने देश में बिकने वाले सभी नए मोबाइल डिवाइसेस में आधार ऐप को पहले से इंस्टॉल (प्रीलोड) रखने का प्रस्ताव दिया है, जिसका एप्पल, सैमसंग और गूगल जैसी कंपनियों ने पुरजोर विरोध किया है.
यूआईडीएआई (UIDAI) द्वारा पेश किए गए इस प्रस्ताव के पीछे सरकार का तर्क है कि इससे 1.34 बिलियन भारतीय नागरिकों को अपने बायोमेट्रिक डेटा को लॉक करने, प्रोफाइल मैनेज करने और अन्य आधार सेवाओं का लाभ उठाने में आसानी होगी.
सरकार चाहती है कि जिस तरह फोन में कैलकुलेटर या क्लॉक जैसे ऐप पहले से मौजूद होते हैं, ठीक उसी तरह आधार ऐप भी उपलब्ध हो ताकि यूजर्स को इसे अलग से डाउनलोड न करना पड़े.
हालांकि, स्मार्टफोन निर्माताओं के संगठन 'मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन फॉर इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी' (MAIT) ने इस पर गंभीर चिंता व्यक्त की है. कंपनियों का कहना है कि आधार जैसे संवेदनशील बायोमेट्रिक ऐप को प्रीलोड करने से डिवाइस की सुरक्षा और यूजर की गोपनीयता (Privacy) को खतरा हो सकता है.
इसके अलावा, निर्माताओं ने लॉजिस्टिक चुनौतियों का हवाला देते हुए कहा है कि केवल भारत के लिए अलग से ऐप इंस्टॉल करने हेतु उन्हें अपनी प्रोडक्शन लाइनों में बदलाव करना होगा, जो उनके वैश्विक विनिर्माण ढांचे को प्रभावित करेगा.
गौरतलब है कि कुछ हफ्ते पहले 'संचार साथी' ऐप को लेकर भी ऐसा ही विवाद हुआ था, जिसके बाद सरकार को कदम पीछे खींचने पड़े थे.
फिलहाल, आधार के साथ-साथ 'सचेत' जैसे कुल छह सरकारी ऐप्स को अनिवार्य रूप से फोन में शामिल करने के प्रस्ताव पर कंपनियों और आईटी मंत्रालय के बीच खींचतान जारी है, जो भारत के डिजिटल इकोसिस्टम की भविष्य की दिशा तय करेगान