निजी कर्मचारियों के लिए 'यूनिवर्सल सोशल सिक्यूरिटी अकाउंट'
नई दिल्ली । डेस्क: केंद्र सरकार निजी क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए सभी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को एक विशिष्ट (यूनिक) नंबर के तहत लाने की योजना बना रही है. इस पहल को शुरू में 'यूनिवर्सल सोशल सिक्यूरिटी अकाउंट' नाम दिया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य प्रत्येक निजी कर्मचारी को एक ऐसी विशिष्ट पहचान संख्या प्रदान करना है, जिससे उनकी सभी सामाजिक सुरक्षा योजनाएं जुड़ी रहेंगी.
नरेंद्र मोदी सरकार ने 2027 से 2030 के बीच लगभग 50 करोड़ लोगों के लिए यह अकाउंट तैयार करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है. श्रम मंत्रालय द्वारा प्रकाशित श्रम शक्ति नीति के मसौदे में इस निर्णय की जानकारी दी गई है.
शुरुआत में, जो सामाजिक सुरक्षा योजनाएं इस अकाउंट के दायरे में आएंगी, उनमें पीएफ, ईएसआईसी, प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना, नेशनल करियर सर्विस, ई-श्रम, और प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना शामिल हैं. भविष्य में इसमें और भी योजनाएँ जोड़ी जा सकती हैं.
केंद्र सरकार देश की श्रम नीति में सुधार की प्रक्रिया को तीन चरणों में पूरा करना चाहती है, जिसके लिए श्रम शक्ति नीति तैयार की गई है. पहला चरण 2027 तक, दूसरा चरण 2030 तक और तीसरा चरण उसके बाद पूरा होगा.
इस सुधार प्रक्रिया को 2047 में आजादी के 100 साल पूरे होने के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए गति देने की बात कही गई है.
पहले चरण में, श्रम से संबंधित सभी जानकारी को एक जगह लाकर उसका डिजिटल संग्रहण किया जाएगा और कई काउंसिल बनाई जाएंगी, जो रोज़गार बाज़ार में सुविधा केंद्र के रूप में काम करेंगी.
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग करके मांग के अनुसार योग्य कर्मचारियों को उपलब्ध कराने की पहल भी की जाएगी.
इसी के साथ सामान्य कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को एक मंच पर लाने का काम चलेगा. श्रम नीति के दूसरे चरण में, इन जानकारियों के आधार पर प्रत्येक कर्मचारी के लिए एक विशिष्ट नंबर सहित एक नया पहचान पत्र जारी किया जाएगा.
यह 'यूनिवर्सल सोशल सिक्यूरिटी अकाउंट' मौजूदा यूनिवर्सल अकाउंट नंबर की तरह ही काम करेगा. जिस प्रकार कर्मचारी के नौकरी बदलने पर भी पीएफ का यूएएन अपरिवर्तित रहता है, उसी प्रकार इस अकाउंट के तहत सभी सामाजिक सुरक्षा लाभ एक ही नंबर से जुड़े रहेंगे.
इससे कर्मचारी किसी भी राज्य या किसी भी संगठन में काम करे, उन्हें सरकारी सुविधाओं का लाभ बिना किसी रुकावट के मिलता रहेगा. केंद्र का दावा है कि इस नई पहल से संगठित और असंगठित दोनों क्षेत्रों के कर्मचारियों को लाभ होगा और सभी सुविधाएँ सुचारू रूप से और तेजी से मिलेंगी.
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन की केंद्रीय न्यासी परिषद के सदस्य शिओप्रसाद तिवारी ने बताया कि "सभी सुरक्षा योजनाओं को एक ही अकाउंट में लाने से रिटायरमेंट और आपातकालीन सेवाएँ जल्दी मिल सकती हैं. विश्व स्तरीय श्रम नीति लागू करने के लिए प्रत्येक कर्मचारी के लिए एक एकीकृत अकाउंट आवश्यक है."