ईरान को ट्रंप की चेतावनी: '48 घंटे में डील करो या तबाही के लिए तैयार रहो'
नई दिल्ली । डेस्क: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ अपने आक्रामक रुख को और कड़ा करते हुए एक नया अल्टीमेटम जारी किया है. ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर सीधे शब्दों में चेतावनी दी कि ईरान के पास समझौता करने या हॉर्मुज जलडमरूमध्य को अंतरराष्ट्रीय यातायात के लिए खोलने के लिए केवल दो दिन का समय बचा है.
ट्रंप ने अपनी पोस्ट में लिखा, "समय समाप्त हो रहा है-48 घंटे बाद उन पर कयामत टूट पड़ेगी. ईश्वर की जय हो!" यह धमकी उस 10 दिवसीय समयसीमा का हिस्सा है जिसे ट्रंप ने 26 मार्च को घोषित किया था, जो सोमवार को समाप्त हो रही है.
यदि ईरान शर्तों को नहीं मानता है, तो ट्रंप ने ईरान के ऊर्जा संयंत्रों, तेल केंद्रों और जल अलवणीकरण संयंत्रों को पूरी तरह नष्ट करने का संकल्प लिया है.
यह तनावपूर्ण स्थिति ऐसे समय में बनी है जब ईरान ने एक अमेरिकी एफ-15 फाइटर जेट को मार गिराने का दावा किया है, जिसके पायलट की तलाश अभी भी जारी है. हालांकि ट्रंप ने इस घटना को बातचीत में बाधा मानने से इनकार कर दिया है, लेकिन रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पायलट ईरान के कब्जे में आता है, तो यह अमेरिका के लिए एक बड़ा संकट बन सकता है.
इसके अलावा, शुक्रवार को ईरान द्वारा एक ए-10 वारथॉग (A-10 Warthog) को मार गिराने के दावे ने पेंटागन के उन दावों पर भी सवालिया निशान लगा दिए हैं, जिनमें ईरानी हवाई क्षेत्र पर पूर्ण अमेरिकी प्रभुत्व की बात कही गई थी.
किंग कॉलेज लंदन की शोधकर्ता मरीना मिरोन के अनुसार, इन विमानों का गिरना यह दर्शाता है कि ईरान के पास अभी भी अमेरिकी सैन्य शक्ति का मुकाबला करने की प्रभावी क्षमता मौजूद है.
युद्ध की इस विभीषिका के बीच कूटनीतिक रास्ते लगभग बंद नजर आ रहे हैं. ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने स्पष्ट किया है कि तेहरान कूटनीति के लिए तैयार है, लेकिन वे अमेरिका की उन 15 शर्तों को स्वीकार नहीं करेंगे जिन्हें उन्होंने 'अनुचित' बताया है.
ईरान का मुख्य जोर युद्ध की समाप्ति और हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी संप्रभुता बनाए रखने पर है, जबकि अमेरिका इसे एक गैर-परक्राम्य मुद्दा मानता है.
इस बीच, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ट्रंप की रणनीति की आलोचना भी शुरू हो गई है.
100 से अधिक कानून विशेषज्ञों ने एक खुला पत्र जारी कर चेतावनी दी है कि नागरिक बुनियादी ढांचे जैसे बिजली और पानी के संयंत्रों को निशाना बनाना जिनेवा कन्वेंशन का उल्लंघन है और इसे युद्ध अपराध माना जा सकता है.
फिलहाल, पूरी दुनिया की नजरें सोमवार की समयसीमा पर टिकी हैं, क्योंकि ट्रंप के कड़े तेवर एक बड़े क्षेत्रीय संघर्ष की आहट दे रहे हैं.