ट्रंप के टैरिफ से कौन-कौन सा क्षेत्र प्रभावित होगा, कौन बचेगा?
नई दिल्ली । डेस्क: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा घोषित नई टैरिफ नीति बुधवार सुबह 9:31 बजे (भारतीय समय) से लागू हो गई है, जिसने भारत के निर्यात क्षेत्र को बड़ा झटका दिया है. इस नीति के तहत भारत से अमेरिका को निर्यात होने वाले लगभग दो-तिहाई सामान (लगभग 60 बिलियन डॉलर मूल्य के) पर अब 50% टैरिफ लगाया गया है, जो पहले 25% था. इस कदम से भारत के कई प्रमुख उद्योगों पर गहरा असर पड़ने की आशंका है, जिससे रोजगार और आर्थिक विकास की गति प्रभावित हो सकती है.
भारत को कितना नुकसान?
ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के अनुसार, भारत का अमेरिका को वार्षिक निर्यात लगभग 86.5 बिलियन डॉलर का है, जिसमें से 60.2 बिलियन डॉलर मूल्य के सामान पर अब दोगुना टैरिफ देना होगा. हालांकि, सरकारी आंकड़ों के अनुसार, नुकसान का आंकड़ा कुछ कम, यानी 48.2 बिलियन डॉलर का अनुमान है. अर्थशास्त्रियों को डर है कि इतने भारी टैरिफ के कारण भारत का निर्यात उद्योग ठप हो सकता है. अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि इस टैरिफ से अमेरिका में सामान का परिवहन व्यावसायिक रूप से अक्षम हो सकता है, जिससे नौकरियों में कमी और आर्थिक विकास दर में गिरावट आ सकती है.
सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले उद्योग
1. टेक्सटाइल और परिधान
2025 वित्तीय वर्ष में भारत का अमेरिका को टेक्सटाइल और परिधान निर्यात 10.8 बिलियन डॉलर का था, जिसमें से केवल परिधान 5.4 बिलियन डॉलर के थे. अमेरिका में 35% हिस्सेदारी भारतीय परिधानों की थी. टैरिफ 13.9% से बढ़कर 63.9% हो गया है, जिससे भारतीय उत्पादों की कीमतें बढ़ेंगी. इससे तिरुपुर, नोएडा-गुड़गांव, बेंगलुरु, लुधियाना और जयपुर जैसे क्लस्टर प्रभावित होंगे. बांग्लादेश, वियतनाम, मैक्सिको और CAFTA-DR देश भारतीय आपूर्तिकर्ताओं की जगह ले सकते हैं.
2. रत्न और आभूषण
इस क्षेत्र में भारत का वैश्विक निर्यात का 40% हिस्सा अमेरिका को जाता है, जो लगभग 10 बिलियन डॉलर का है. टैरिफ 2.1% से बढ़कर 52.1% हो गया है. इससे सूरत, मुंबई और जयपुर में नौकरियों पर संकट मंडरा रहा है. ये क्षेत्र कटिंग, पॉलिशिंग और उत्पादन में लाखों लोगों को रोजगार देते हैं.
3. झींगा (प्रॉन)
2025 वित्तीय वर्ष में भारत ने अमेरिका को 2.4 बिलियन डॉलर मूल्य के झींगे निर्यात किए, जो कुल झींगा निर्यात का 32.4% है. अमेरिका भारत का शीर्ष बाजार है, खासकर छिलके उतारे, तैयार और पके हुए झींगों के लिए.
4. कालीन और हस्तशिल्प
2025 वित्तीय वर्ष में अमेरिका को भारत का कालीन निर्यात 1.2 बिलियन डॉलर का था, जिसमें 58.6% हिस्सेदारी थी. टैरिफ 2.9% से बढ़कर 52.9% हो गया है, जिससे भदोही, मिर्जापुर और श्रीनगर के कारीगरों की आजीविका खतरे में है. तुर्की, पाकिस्तान, नेपाल और चीन को इसका फायदा मिल सकता है. वहीं, हस्तशिल्प निर्यात 1.6 बिलियन डॉलर का था, जिसमें वाशिंगटन की 40% हिस्सेदारी थी. इससे जोधपुर, जयपुर, मुरादाबाद और सहारनपुर में कारखाने बंद होने का खतरा है. वियतनाम, चीन, तुर्की और मैक्सिको इस कमी को पूरा कर सकते हैं.
5. चमड़ा और जूते
भारत का चमड़ा और जूता निर्यात 1.2 बिलियन डॉलर का था, जो अब पूरी तरह 50% टैरिफ के दायरे में है. इससे वियतनाम, चीन, इंडोनेशिया और मैक्सिको को बाजार में बढ़त मिल सकती है. आगरा, कानपुर और तमिलनाडु के अंबुर-रानीपेट औद्योगिक क्षेत्रों का टिकना मुश्किल होगा.
6. कृषि उत्पाद और प्रसंस्कृत खाद्य
बासमती चावल, चाय, मसाले आदि का निर्यात लगभग 6 बिलियन डॉलर का था. 50% टैरिफ के कारण भारत दबाव में आएगा, और पाकिस्तान, थाईलैंड, वियतनाम इस कमी को पूरा कर सकते हैं.
कौन बचा?
भारत के लगभग 30% निर्यात, यानी 27.6 बिलियन डॉलर मूल्य के सामान, फिलहाल टैरिफ-मुक्त रहेंगे. इनमें मुख्य रूप से दवाइयां और API उत्पाद शामिल हैं, जो अमेरिकी बाजार में भारत की मजबूत स्थिति बनाए रखेंगे. इलेक्ट्रॉनिक्स और प्रौद्योगिकी सामग्री, जैसे स्मार्टफोन, चिप्स, राउटिंग पार्ट्स आदि भी इस टैरिफ सूची से बाहर हैं.
विशेषज्ञों की राय
विशेषज्ञों का मानना है कि टैरिफ के कारण भारत का निर्यात 43% तक कम हो सकता है, जिससे लाखों लोगों की आजीविका खतरे में पड़ सकती है. यह नीति न केवल रोजगार बल्कि आर्थिक विकास की गति पर भी भयानक प्रभाव डालेगी. बड़ा सवाल यह है कि क्या भारत का निर्यात उद्योग नए बाजारों की तलाश करके इस संकट से उबर पाएगा, या फिर एक बड़े आर्थिक तूफान का सामना करना पड़ेगा?