ट्रंप भारत पर फिर से टैरिफ लगाने की तैयारी में
ट्रंप भारत पर फिर से टैरिफ लगाने की तैयारी में, अब व्यापार-कानून का सहारा
वॉशिंगटन । डेस्क: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत समेत दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के खिलाफ एक बार फिर व्यापारिक युद्ध का बिगुल फूंक दिया है. अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा ट्रंप के 'रेसिप्रोकल टैरिफ' को असंवैधानिक घोषित कर रद्द किए जाने के ठीक एक महीने बाद, ट्रंप प्रशासन अब देश के पुराने 'व्यापार-कानून' की आड़ में भारत पर नए टैरिफ थोपने की जमीन तैयार कर रहा है.
सोमवार को एक कड़े बयान में ट्रंप ने साफ कर दिया कि वह पीछे हटने वाले नहीं हैं और "दूसरे रूप में" इन शुल्कों को लागू करके रहेंगे.
सुप्रीम कोर्ट के फरवरी के फैसले को दरकिनार करते हुए ट्रंप ने कहा कि उनके पास अन्य कानूनी प्रावधानों के तहत शुल्क वसूलने का "पूर्ण अधिकार" है. दरअसल, कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि राष्ट्रपति आपातकालीन शक्तियों (IEEPA) का उपयोग करके मनमाने ढंग से टैरिफ नहीं लगा सकते.
इस कानूनी हार से बौखलाए ट्रंप ने अब अमेरिका के 'ट्रेड एक्ट 1974' की 'धारा 301' (Section 301) का हथियार निकाला है. इसी कानून की आड़ लेकर अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) जैमीसन ग्रीर ने भारत, चीन और यूरोपीय संघ सहित 16 देशों के खिलाफ 'अनुचित व्यापार प्रथाओं' की जांच शुरू कर दी है.
ट्रंप प्रशासन का आरोप है कि भारत और चीन जैसे देश अपनी औद्योगिक क्षमता का जरूरत से ज्यादा विस्तार कर रहे हैं, जिससे अमेरिकी उद्योगों को नुकसान हो रहा है.
इस नई जांच के दायरे में सरकारी सब्सिडी और लेबर स्टैंडर्ड जैसे मुद्दे शामिल हैं. जानकारों का मानना है कि यह जांच केवल एक औपचारिकता है, जिसका असली मकसद इस साल गर्मियों तक भारत से आने वाले सामानों पर भारी टैक्स थोंपना है.
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर तर्क दिया कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने उन देशों को खुश कर दिया है जो दशकों से अमेरिका को लूट रहे हैं. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका ने अब कड़ा रुख नहीं अपनाया, तो उसे ट्रिलियन डॉलर का नुकसान होगा.
ट्रंप की इस नई रणनीति से भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक तनाव फिर से चरम पर पहुंचने की आशंका है, क्योंकि यह नई जांच उन्हीं टैरिफ को वापस लाने का एक रास्ता है जिन्हें अदालत ने अवैध करार दिया था.