अमेरिका में हो रहा है ट्रंप के ईरान नीति का विरोध
नई दिल्ली । डेस्क: ईरान के साथ बढ़ते सैन्य तनाव और युद्ध की धमकियों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि अपने ही देश के भीतर कड़े विरोध का सामना करना पड़ रहा है. अमेरिकी कांग्रेस के सदस्यों ने ट्रंप की युद्ध नीति पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे देश के लिए नुकसानदेह बताया है.
विरोध की यह लहर केवल विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी तक सीमित नहीं है, बल्कि ट्रंप की अपनी रिपब्लिकन पार्टी के कई प्रभावशाली नेता भी अब उनके खिलाफ मुखर हो गए हैं.
लोकतंत्र के इस गढ़ में ट्रंप की रणनीति को 'विफल' बताया जा रहा है. पूर्व सैन्य अधिकारी और डेमोक्रेटिक सांसद जेक ऑकिनक्लोस ने स्पष्ट किया कि ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य की घेराबंदी करना अमेरिका की रणनीतिक हार है.
वहीं, सांसद रो खन्ना ने तुरंत युद्धविराम की वकालत करते हुए ट्रंप के उन दावों को खोखला बताया जिसमें वे ईरानी सेना के कमजोर होने की बात कह रहे थे. उनका तर्क है कि यदि ईरान कमजोर है, तो वहां अमेरिकी सैनिक लगातार हमलों की जद में क्यों हैं?
तनाव तब चरम पर पहुंच गया जब ट्रंप ने सोशल मीडिया पर बेहद आपत्तिजनक और अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करते हुए ईरान को 'नर्क' भेजने की धमकी दी.
उन्होंने मंगलवार रात 8 बजे की समयसीमा तय कर दी, जिस पर उनकी ही पार्टी की नेता मार्जोरी टेलर ग्रीन ने तीखी प्रतिक्रिया दी.
उन्होंने प्रशासन को चेतावनी दी कि वे राष्ट्रपति के इस 'पागलपन' को रोकने के लिए ठोस कदम उठाएं. सीनेटर चक शूमर ने तो ट्रंप के सोशल मीडिया व्यवहार को 'विक्षिप्त' तक करार दे दिया.
स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि सीनेटर क्रिस मर्फी ने राष्ट्रपति को पद से हटाने के लिए 25वें संशोधन के इस्तेमाल की मांग उठा दी है, जो राष्ट्रपति की अक्षमता की स्थिति में कैबिनेट को उन्हें हटाने का अधिकार देता है.
उधर ईरान ने भी ट्रंप को 'असंतुलित और डरा हुआ' बताकर पलटवार किया है. कुल मिलाकर, ईरान नीति को लेकर अमेरिका के भीतर मचा यह घमासान ट्रंप की घरेलू और विदेशी साख के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है.