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ईरान पर ट्रंप प्रशासन की 'इकोनॉमिक डी-डे' का ऐलान

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25 अग. 2026, 03:15 AM 4 मिनट में पढ़ें 1

स्कॉट बेसेंट
स्कॉट बेसेंट

वाशिंगटन । डेस्क: ईरान और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष के छह महीने पूरे होने के मुहाने पर ट्रंप प्रशासन ने तेहरान के खिलाफ अब तक की सबसे सख्त आर्थिक कार्रवाई की घोषणा की है. अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने सोमवार को नए प्रतिबंधों का ऐलान करते हुए इसे ईरान के खिलाफ "इकोनॉमिक डी-डे" करार दिया है. इस नए प्रतिबंध पैकेज के साथ ही अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक घेराबंदी भी शुरू कर दी है. वाशिंगटन का यह कदम ईरान के राजस्व स्रोतों को पूरी तरह सुखा देने और वैश्विक अर्थव्यवस्था से उसे अलग-थलग करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है.


प्रतिबंधों का दायरा और मुख्य निशाने


अमेरिकी वित्त विभाग की ओर से जारी बयान के अनुसार, नए प्रतिबंधों के दायरे में ईरान का नागरिक उड्डयन, डिजिटल एसेट्स, सोना, तकनीक और शिपिंग क्षेत्र शामिल हैं. इसके अतिरिक्त लगभग 60 विशिष्ट व्यक्तियों और जहाजों को भी सीधे तौर पर ब्लैकलिस्ट किया गया है. अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि तेहरान अब तक आर्थिक प्रतिबंधों से बचने के लिए क्रिप्टोकरेंसी और सोने का सहारा लेता रहा है, जिसके जरिए रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) और शासन से जुड़े लोगों के लेन-देन संचालित हो रहे थे. 


साथ ही, ईरान के व्यापारिक जहाजों का इस्तेमाल तेल परिवहन के अलावा संवेदनशील हथियारों के पुर्जों की आवाजाही के लिए किया जा रहा था, जिस पर अब लगाम लगाने की कोशिश की गई है.


वैश्विक सहयोगियों और सेकंडरी प्रतिबंधों की चेतावनी


वाशिंगटन ने स्पष्ट किया है कि ईरान के साथ कारोबार जारी रखने वाले अन्य देशों के संस्थानों को भी सेकंडरी पेनाल्टी का सामना करना पड़ेगा. इस बार के निशाने में सिंगापुर, चीन और हांगकांग से जुड़े कई पोत शामिल हैं. 


हालांकि, रक्षा और आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम अन्य देशों को चेतावनी देने की एक कोशिश है ताकि वे ईरान के साथ किसी भी प्रकार के ग्रे-जोन व्यापार से पीछे हट जाएं. 


इसके अलावा, अमेरिका ने ईरान पर लागू कई पुरानी छूटों को भी अनिश्चित काल के लिए निलंबित कर दिया है, जिसमें शैक्षणिक आदान-प्रदान, व्यक्तिगत धन हस्तांतरण और खेल गतिविधियां शामिल हैं. संबंधित संगठनों को अपना काम समेटने के लिए सितंबर के शुरुआती हफ्ते तक का समय दिया गया है.


अमेरिकी उपभोक्ताओं और पेट्रोल की कीमतों पर असर


ईरान पर लगातार बढ़ते दबाव और मध्य-पूर्व संकट के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई है. चीन, जो ईरानी कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार है, इस फैसले से सीधे प्रभावित हो सकता है. स्ट्रैट ऑफ होर्मुज में व्यवधान और प्रतिबंधों के दोहरे असर से वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की आपूर्ति तंग हुई है, जिसका सीधा असर अमेरिकी पेट्रोल पंपों पर दिखने लगा है. 


अमेरिकी ऑटोमोबाइल एसोसिएशन के आंकड़ों के मुताबिक, इस सैन्य और आर्थिक संघर्ष की शुरुआत के बाद से अमेरिका में पेट्रोल के औसत दाम में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है. 


आर्थिक विशेषज्ञों का चेतावनी भरा कहना है कि यदि ईरान की ओर से खाड़ी में मालवाहक जहाजों पर पलटवार होता है, तो इसका असर अमेरिकियों को पेट्रोल, डीजल, हवाई किराए और महंगाई के रूप में तुरंत झेलना पड़ेगा.


शेयर, सोना और कच्चे तेल के बाजारों में उथल-पुथल


अमेरिका की इस घोषणा के बाद से वॉल स्ट्रीट और वैश्विक कमोडिटी बाजारों में मिला-जुला और अनिश्चित माहौल है. आर्थिक अनिश्चितता के दौर में सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने के दामों में तेज उछाल देखा गया है और यह पिछले कुछ महीनों के अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है. 


वहीं, दूसरी ओर दो हफ्ते की लगातार बढ़त के बाद अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड की कीमतों में थोड़ी नरमी देखी गई. अमेरिकी शेयर बाजार में नैस्डैक और एसएंडपी 500 लाल निशान में कारोबार करते दिखे, जबकि डाउ जोंस में मामूली बढ़त रही. 


तेल कंपनियों जैसे शेवरॉन, एक्सॉनमोबिल, बीपी और शैल के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई है.


राजनीतिक समीकरण और घरेलू चुनौतियां


ईरान के साथ जारी यह संघर्ष और इसके आर्थिक परिणाम अब अमेरिका की अंदरूनी राजनीति का भी मुख्य केंद्र बन चुके हैं. आने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में अर्थव्यवस्था और विदेश नीति प्रमुख मुद्दे बनकर उभर रहे हैं. 


हालिया जनमत सर्वेक्षणों से संकेत मिलते हैं कि अमेरिका में युद्ध और राष्ट्रपति के ईरान संकट से निपटने के तरीके को लेकर जनता की राय काफी बंटी हुई है. महंगाई और अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर बढ़ती चिंताओं ने सत्तारूढ़ दल के लिए चुनावी राह को चुनौतीपूर्ण बना दिया है, खासकर उन राज्यों में जहां कड़ी टक्कर की उम्मीद है.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP