ट्रंप का नया दांव: क्यूबा को तेल देने वाले देशों पर लगेगा भारी टैरिफ
वाशिंगटन । डेस्क: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 29 जनवरी, 2026 को एक बड़ा कार्यकारी आदेश जारी किया है, जिससे क्यूबा की पहले से चरमराई अर्थव्यवस्था और ऊर्जा संकट के और गहराने के आसार हैं. इस नए आदेश के तहत, अमेरिका उन सभी देशों पर भारी आयात शुल्क (टैरिफ) लगाएगा जो क्यूबा को तेल की आपूर्ति या बिक्री करते हैं.
ट्रंप का यह कदम सीधे तौर पर क्यूबा की "लाइफलाइन" माने जाने वाले देशों, विशेषकर मेक्सिको पर दबाव बनाने की रणनीति है. गुरुवार को पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने क्यूबा को एक 'विफल राष्ट्र' करार देते हुए कहा कि हालांकि वे किसी का गला नहीं घोंटना चाहते, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में क्यूबा का अस्तित्व बचा रहना मुश्किल लग रहा है.
ट्रंप के इस सख्त रुख ने लैटिन अमेरिकी देशों के बीच खलबली मचा दी है, खासकर तब जब अमेरिका हाल ही में वेनेजुएला में सैन्य अभियान के जरिए सत्ता परिवर्तन कर चुका है और वहां से क्यूबा को होने वाली तेल सप्लाई पहले ही रोक दी गई है.
मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शीनबाम के लिए यह स्थिति एक बड़ी कूटनीतिक चुनौती बन गई है. एक तरफ वे ट्रंप प्रशासन के साथ मजबूत आर्थिक रिश्ते चाहती हैं, तो दूसरी तरफ क्यूबा के साथ मेक्सिको की पुरानी एकजुटता और मानवीय सहायता की प्रतिबद्धता है.
हालांकि शीनबाम और ट्रंप के बीच फोन पर बातचीत हुई, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि क्यूबा के मुद्दे पर सीधी चर्चा नहीं हुई. मेक्सिको की सरकारी तेल कंपनी 'पेमेक्स' के आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल की तुलना में क्यूबा को होने वाली तेल आपूर्ति में पहले ही भारी गिरावट आई है. सितंबर 2025 में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के मेक्सिको दौरे के बाद 20,000 बैरल प्रतिदिन की सप्लाई घटकर महज 7,000 बैरल रह गई थी.
इधर क्यूबा ने इस आदेश की तीखी निंदा की है. क्यूबा के विदेश मंत्री ब्रूनो रोड्रिगेज ने इसे 'अमानवीय हमला' और अंतरराष्ट्रीय ब्लैकमेलिंग करार दिया है. क्यूबा का तर्क है कि अमेरिका अपनी दशकों पुरानी आर्थिक घेराबंदी को अब अन्य संप्रभु देशों पर टैरिफ का डर दिखाकर थोप रहा है.
इस समय क्यूबा में बिजली और ईंधन का भीषण संकट है, पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लगी हैं और जनता में भविष्य को लेकर भारी अनिश्चितता है. ट्रंप की इस नई नीति ने स्पष्ट कर दिया है कि वे क्यूबा सरकार को आर्थिक रूप से पूरी तरह अलग-थलग करने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं.