मुंबई की ओर आदिवासियों का 'लॉन्ग मार्च' भूमि अधिकार की मांग
महाराष्ट्र । डेस्क: अपनी जमीन के हक और वन अधिकार कानून (FRA) के प्रभावी क्रियान्वयन की मांग को लेकर हजारों आदिवासियों का 'लॉन्ग मार्च' मुंबई की ओर तेजी से बढ़ रहा है. 25 जनवरी से शुरू हुआ यह पैदल मार्च अब तक 80 किलोमीटर का सफर तय कर चुका है. प्रदर्शनकारियों ने साफ कर दिया है कि जब तक मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस खुद उनसे मुलाकात कर ठोस आश्वासन नहीं देते, वे अपना आंदोलन समाप्त नहीं करेंगे.
सोमवार, 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के अवसर पर नासिक-मुंबई राजमार्ग पर तिरंगा फहराकर इन प्रदर्शनकारियों ने अपना विरोध जारी रखा.
इस आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अखिल भारतीय किसान सभा (AIKS) और माकपा (CPI-M) के नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल आज, मंगलवार (27 जनवरी, 2026) को मुंबई में मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात करेगा.
प्रदर्शनकारियों की मुख्य शिकायत वन अधिकार अधिनियम के तहत जमीन के दावों का बड़े पैमाने पर खारिज होना है. इसके अलावा, 2018 के पिछले मार्च के दौरान नदियों के पानी के डायवर्जन को लेकर किए गए वादे पूरे न होना, शिक्षा और भर्ती जैसे मुद्दे भी इस विरोध प्रदर्शन के केंद्र में हैं.
हालांकि, महाराष्ट्र के मंत्री गिरीश महाजन ने प्रदर्शनकारियों से मार्च रोकने की अपील की है और दावा किया है कि मंगलवार को कैबिनेट बैठक के बाद मंत्रालय में एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई गई है, जिसमें इन सभी मुद्दों का समाधान निकाला जाएगा.
इसके बावजूद, किसान सभा के अध्यक्ष अशोक धवले ने स्पष्ट किया है कि केवल बैठकों के आश्वासन से काम नहीं चलेगा. उन्होंने कहा कि जब तक मांगों पर जमीनी कार्रवाई नहीं होती, हजारों पुरुष और महिलाएं अनुशासित तरीके से मुंबई की ओर बढ़ते रहेंगे.
यह मोर्चा 3 फरवरी तक मुंबई पहुंचने की संभावना है.