ईरान की जेलों में यातना: अज्ञात इंजेक्शन, यौन उत्पीड़न
तेहरान । डेस्क: ईरान में सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई के शासन के खिलाफ आवाज़ उठाने वालों पर दमन-पड़ताल लगातार अधिक निर्मम होती जा रही है. विरोध प्रदर्शन, महिला अधिकार, राजनीतिक सुधार या अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता किसी भी मुद्दे पर असहमति जताने वाले ईरानियों को कठोर सज़ा, अपमान और अमानवीय व्यवहार का सामना करना पड़ रहा है.
मानवाधिकार संगठनों और पूर्व कैदियों की गवाही के अनुसार, ईरान की जेलों में बंदियों के साथ अमानवीय व्यवहार आम हो गया है. कई मामलों में कैदियों को जबरन निर्वस्त्र कर ठंडे कमरों में घंटों खड़ा रखा गया, शारीरिक यातना दी गई और यौन उत्पीड़न तक के आरोप सामने आए हैं.
रिपोर्टों में कहा गया है कि यह केवल शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक रूप से तोड़ने की रणनीति है ताकि डर, शर्म और अपमान के जरिए कैदियों को चुप करा दिया जाए.
पूर्व बंदियों ने बताया कि आंखों पर पट्टी बांधकर उनसे बार-बार पूछताछ की जाती थी और कई बार उन्हें यह तक नहीं बताया जाता था कि वे किस अपराध में गिरफ्तार हैं. वकील से संपर्क, परिवार से मुलाकात या चिकित्सा सुविधा तक से उन्हें वंचित रखा गया.
स्थिति को और भयावह बनाते हुए, कुछ पूर्व कैदियों ने अज्ञात इंजेक्शन और दवाएं दिए जाने का आरोप लगाया है. उनका कहना है कि उन्हें बिना जानकारी के ऐसे पदार्थ दिए गए, जिनके बाद लंबे समय तक चक्कर आना, नींद में गड़बड़ी, स्मृति भ्रम, तंत्रिका संबंधी समस्याएं और शारीरिक कमजोरी बनी रही.
कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि इन दवाओं का उद्देश्य कैदियों के व्यवहार को नियंत्रित करना, पूछताछ में उन्हें कमजोर बनाना या स्थायी मानसिक क्षति पहुंचाना था.
महसा अमीनी की मौत के बाद अनिवार्य हिजाब और महिला अधिकारों के खिलाफ फैले विरोध प्रदर्शनों के बाद, छात्र और युवा महिलाएं दमन का मुख्य निशाना बन गई हैं. विश्वविद्यालय परिसरों में गिरफ्तारियां, पूछताछ, निष्कासन और निगरानी तेज कर दी गई है. कई छात्रों को रात में उनके घरों से उठाया गया और परिजनों को भी धमकाया गया.
अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने ईरान सरकार की इन कार्रवाइयों की कड़ी निंदा की है. हालांकि तेहरान का कहना है कि ये कदम “विदेशी साजिशों” को रोकने के लिए कानूनी कार्रवाई हैं. इसके बावजूद ईरान के भीतर विरोध की आवाज़ें थमी नहीं हैं.