TMC चुनाव चिह्न फ्रीज मामला: ममता की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट जल्द करेगा सुनवाई
नई दिल्ली । डेस्क: पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने त्वरित संज्ञान लेते हुए इस पर जल्द सुनवाई करने की मंजूरी दे दी है. ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के उस फैसले को शीर्ष अदालत में चुनौती दी है, जिसमें तृणमूल कांग्रेस के आधिकारिक नाम और उसके पारंपरिक चुनाव चिह्न 'जोड़ा घास फूल' के इस्तेमाल पर अंतरिम रोक लगा दी गई थी.
वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने देश के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ के समक्ष इस मामले का विशेष उल्लेख किया. सिब्बल ने अदालत से गुहार लगाते हुए कहा कि चुनाव की अधिसूचना जारी होने के बीच में ही चुनाव चिह्न को फ्रीज कर दिया गया है, इसलिए इस याचिका पर तत्काल सुनवाई होना आवश्यक है.
अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे सूचीबद्ध करने पर सहमति व्यक्त की है.
यह विवाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर दो विरोधी गुटों के बीच पार्टी पर वर्चस्व को लेकर शुरू हुआ है. 6 अक्टूबर को नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर होने वाले उप-चुनावों के मद्देनजर चुनाव आयोग ने एक अंतरिम आदेश जारी कर दोनों ही गुटों को मूल नाम और प्रतीक के इस्तेमाल से रोक दिया था.
चुनाव आयोग ने कहा था कि उप-चुनाव से पहले 'चुनाव चिह्न (आरक्षण और आवंटन) आदेश, 1968' के तहत विवाद का अंतिम निपटारा करने के लिए समय पर्याप्त नहीं है.
आयोग ने अस्थायी व्यवस्था के तहत ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को 'ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' नाम के साथ 'फुटबॉल खिलाड़ी' चुनाव चिह्न आवंटित किया है. वहीं, विरोधी गुट (अरूप रॉय समर्थित/ऋतब्रत बनर्जी) को 'डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस' नाम और 'लिफाफा' (एनवेलप) चुनाव चिह्न दिया गया है.
ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के इस फैसले को बेहद पक्षपातपूर्ण बताते हुए इसे लोकतंत्र के लिए "काला दिन" करार दिया था. उन्होंने कहा था कि वे अपनी पार्टी की मूल पहचान और 'फूल और घास' चिह्न को वापस हासिल करने के लिए कानूनी, राजनीतिक और लोकतांत्रिक लड़ाई जारी रखेंगी. अब इस कानूनी लड़ाई का फैसला सुप्रीम कोर्ट में होगा.