छत्तीसगढ़ में 'जीरो एनरोलमेंट' वाले एक भी स्कूल नहीं
नई दिल्ली । डेस्क: शिक्षा मंत्रालय के आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, छत्तीसगढ़ ने शैक्षणिक सत्र 2024-25 के दौरान एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है, जहाँ राज्य में 'जीरो एनरोलमेंट' (शून्य नामांकन) वाला एक भी स्कूल नहीं है. यह हरियाणा, महाराष्ट्र, गोवा, असम, हिमाचल प्रदेश, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा के साथ उन राज्यों में शामिल है, जिन्होंने अपने स्कूलों में शत-प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित किया है. केंद्र शासित प्रदेशों (जैसे पुडुचेरी, लक्षद्वीप, दिल्ली) ने भी ऐसी कोई चुनौती दर्ज नहीं की है.
हालांकि छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार ने 2023 में सत्ता में आने के बाद से युक्तियुक्तकरण के नाम पर राज्य में 10 हज़ार से अधिक सरकारी स्कूलों को बंद कर दिया है.
राष्ट्रीय परिदृश्य: शून्य नामांकन वाले स्कूल
हालांकि छत्तीसगढ़ और कई अन्य राज्यों ने यह सकारात्मक प्रदर्शन किया है, राष्ट्रीय स्तर पर 'जीरो एनरोलमेंट' वाले स्कूलों की संख्या अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है. देश भर में लगभग 7,993 स्कूलों में 2024-25 सत्र में शून्य नामांकन रहा, हालांकि यह संख्या पिछले वर्ष (12,954) की तुलना में 5,000 से अधिक की कमी को दर्शाती है.
इस प्रकार के स्कूलों में कुल 20,817 शिक्षक कार्यरत हैं.
प्रमुख राज्यों का विवरण
पश्चिम बंगाल में सबसे अधिक 3,812 ऐसे स्कूल पाए गए, जो राष्ट्रीय संख्या का लगभग आधा है. इन स्कूलों में सबसे अधिक 17,965 शिक्षक कार्यरत थे.
तेलंगाना 2,245 स्कूलों के साथ दूसरे स्थान पर रहा, जिनमें 1,016 शिक्षक कार्यरत थे.
मध्य प्रदेश में 463 शून्य नामांकन वाले स्कूल और 223 कार्यरत शिक्षक थे.
उत्तर प्रदेश में 81 ऐसे स्कूल थे. राज्य का शिक्षा विभाग लगातार तीन शैक्षणिक वर्षों से शून्य नामांकन वाले अपने संबद्ध स्कूलों की मान्यता रद्द करने की तैयारी कर रहा है.
स्कूल शिक्षा राज्य का विषय होने के कारण, केंद्र सरकार ने राज्यों को 'जीरो एनरोलमेंट' के मुद्दे को हल करने की सलाह दी है. कुछ राज्यों ने बुनियादी ढांचे और कर्मचारियों जैसे संसाधनों के इष्टतम उपयोग के लिए स्कूलों का विलय भी किया है.
एकल-शिक्षक स्कूलों की स्थिति
आँकड़ों में एकल-शिक्षक (Single-teacher) स्कूलों की चुनौती का भी उल्लेख किया गया है. देश भर में 1 लाख से अधिक ऐसे स्कूलों में 33 लाख से अधिक छात्र नामांकित हैं. हालांकि 2023-24 में इनकी संख्या में लगभग छह प्रतिशत की कमी (1,18,190 से 1,10,971) आई है.
आंध्र प्रदेश में सबसे अधिक एकल-शिक्षक स्कूल हैं, इसके बाद उत्तर प्रदेश, झारखंड, महाराष्ट्र और कर्नाटक का स्थान है.
एकल-शिक्षक स्कूलों में छात्र नामांकन के मामले में उत्तर प्रदेश शीर्ष पर है, इसके बाद झारखंड, पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश का स्थान है.