छत्तीसगढ़ में पीएम किसान सम्मान निधि से लाखों किसान वंचित
छत्तीसगढ़ में पीएम किसान सम्मान निधि में चल रहा गोलमाल
रायपुर | ममता मानकरः दुनिया की सबसे बड़ी डीबीटी यानी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) योजना कही जाने वाली पीएम किसान सम्मान निधि योजना से छतीसगढ़ के पांच लाख किसान कम हो गये हैं.
ये हम नहीं बल्कि 19 वीं क़िस्त के साथ जारी हुए सरकारी आंकड़े कह रहे हैं. कभी इस योजना का लाभ 19 लाख किसानों को मिलता है तो कभी 30 लाख से अधिक किसानों को.
समझना मुश्किल नहीं है कि इस योजना में भारी गोलमाल है.
पीएम किसान सम्मान निधि की 19 वीं क़िस्त जारी होने के साथ ही देश भर में 2.41 करोड़ महिला किसानों सहित कुल 9.8 करोड़ से अधिक किसानों के इससे लाभान्वित होने के आंकड़े भी जारी किए गए.
पीएम नरेन्द्र मोदी ने फरवरी में बिहार के भागलपुर से पीएम-किसान योजना की 19वीं किस्त जारी की. आगामी जून में 20वीं क़िस्त जारी होने की संभावना व्यक्त की जा रही है.
लेकिन छतीसगढ़ में पीएम किसान योजना से लाभान्वित होने वाले किसानों की संख्या पर गौर करने पर पता चलता है कि इस योजना में सब कुछ ठीक नहीं है.
केंद्र सरकार का दावा है कि पीएम किसान सम्मान निधि योजना को देश के आर्थिक रूप से कमजोर किसानों के लिए चलाया जा रहा है.
इस योजना को केन्द्र सरकार ने इसलिए शुरू किया था ताकि वह गरीब किसानों को आर्थिक मदद पहुंचा सके.
आज भी ऐसे बहुत से किसान हैं जो पैसे की तंगी के कारण अपनी कृषि से संबंधित गतिविधियों को भी पूरा नहीं कर पा रहे हैं.
इसलिए केंद्र सरकार ने किसानों को सालाना 6000 रूपए की वित्तीय मदद का ऐलान किया. यह रकम 3 किस्तों में बैंक में जारी की जाती है.
हर किस्त में 2000 रूपए होते हैं और बिना किसी समस्या के सीधे किसानों के बैंक खाते में यह रकम जमा हो जाती है.
छत्तीसगढ़ में भी लाखों किसान इस योजना के लाभार्थियों में शामिल हैं लेकिन हर किस्त के साथ लाभार्थियों की संख्या और रकम में लाखों का अंतर आ रहा है.
हालत ये है कि हाल ही में जारी की गई 19 वीं क़िस्त की राशि से छतीसगढ़ के 5 लाख किसानों को वंचित कर दिया गया.
हालांकि सरकार का दावा कुछ और है, लेकिन इस दावे की हकीकत ये है कि फरवरी में जारी 19वीं किस्त से छत्तीसगढ़ के लाखों किसान वंचित हो चुके
केन्द्र सरकार का दावा
सरकार ने लोकसभा में कहा कि इस योजना के तहत लगातार नये किसान जोड़े जा रहे हैं.
लोकसभा में जारी किये गये आंकड़ों के अनुसार 2023 में 1 करोड़ से अधिक किसानों को पीएम किसान सम्मान निधि के तहत शामिल किया गया था.
2024 में विशेष अभियान चलाकर 30 लाख से अधिक लंबित स्व पंजीकरण मामलों को मंजूरी दी गयी.
सरकार कह रही है कि कुल 9.88 करोड़ से अधिक किसानों को देश भर में पीएम किसान योजना की 19 वीं किस्त का लाभ मिला.
सरकार योजना से किसानों के कम होने का नाम नहीं ले रही तो फिर छत्तीसगढ़ से 5 लाख किसान कैसे कम हो गये?
आखिर किसके खाते में जा रहा पैसा
छत्तीसगढ़ की बात करें तो 9 वीं क़िस्त जारी होने के समय ( अगस्त 2021- नवंबर 2021) लाभार्थी किसानों की संख्या- 30,24,437 थी.
वहीं वितरित राशि- 665.16 (करोड़) थी. जबकि 11 वीं क़िस्त के दौरान (अप्रैल 2022- जुलाई 2022 ) किसानों की संख्या घटकर- 27,39,785 हो जाती है और वितरित राशि बढ़कर- 696.10 करोड़ यानी लाभार्थी किसानों की संख्या कम होने के बावजूद उनको दी जाने वाली रक़म बढ़ गई.
सवाल है कि जब किसानों की संख्या कम हुई तो राशि कैसै ज्यादा वितरित की गई. यह पैसा किसके खाते में गया?
ऐसा नहीं है कि यह केवल एक किस्त से जुड़ा हुआ मामला हो. हर किस्त के साथ किसान घट-बढ़ रहे व राशि भी.
5वीं से 6वीं क़िस्त तक लाभार्थी किसानों की संख्या - 24,79,764 से बढ़कर 26,40,364 हो जाती है. यानी 1,60,600 किसान बढ़ जाते हैं.
लेकिन वितरित की जाने वाली राशि 554.23 करोड़ से घटकर 554.15 करोड़ हो जाती है. यानी 8 लाख रुपये घट जाते हैं.
यहां लाभार्थियों की संख्या में वृद्धि हुई है, लेकिन राशि में कमी हो गई. यहां किसानों की संख्या बढ़ने के साथ ही राशि बढ़नी थी लेकिन इसके उलट राशि कम हो गई.
अब इसे थोड़ा और समझते हैं. 7वीं से 8वीं क़िस्त तक आते-आते किसानों की संख्या 29,17,728 से घटकर 28,49,560 हो जाती है.
मतलब 68,168 किसान कम हो जाते हैं. जबकि वितरित राशि: 624.43 करोड़ से बढ़कर 625.13 करोड़ हो जाती है. यानी 70 लाख रुपये बढ़ जाते हैं.
इसी तरह 8वीं से 9वीं क़िस्त जारी होने के समय किसानों की संख्या : 28,49,560 से बढ़कर 30,24,437 हो जाती है.
यानी 1,74,877 किसान फिर जोड़ दिये जाते हैं. वितरित राशि: 625.13 करोड़ से बढ़कर 665.16 करोड़ हो जाती है. किसानों की संख्या और राशि दोनों में वृद्धि होती है.
9वीं से 10वीं क़िस्त: तक आते-आते फिर से योजना का लाभ ले रहे किसानों की संख्या घट जाती है.
किसानों की संख्या 30,24,437 से घटकर 27,72,179 हो जाती है. मतलब पीएम किसान योजना में शामिल 2 लाख 52 हजार 258 छत्तीसगढ़ के किसानों को एक झटके में इस योजना से वंचित कर दिया जाता है.
10वीं से 11वीं क़िस्त: तक आते आते फिर से 27,72,179 किसानों से घटते हुए यह संख्या 27,39,785 तक पहुंच जाती है.
मतलब 32,394 किसान फिर सरकार की योजना से वंचित हो जाते हैं. जबकि वितरित राशि: 630.50 करोड़ से बढ़कर 696.10 करोड़ बढ़ जाती है.
एक तरह से योजना से जुड़े किसानों की संख्या में कमी आती है और राशि में 65.60 करोड़ की अच्छी खासी बढ़ोतरी देखने को मिलती है.
वहीं 11वीं से 12वीं क़िस्त तक के आंकड़ों पर गौर करें तो किसानों की संख्या फिर से 27,39,785 से घटकर 20,37,413 हो जाती है. इस बार 7,02,372 किसानों को पीएम किसान सम्मान निधि नहीं मिलती.
वितरित राशि: 696.10 से घटकर 474.31 करोड़ रह जाती है.
यहां एक बड़ा बदलाव देखने को मिलता है. लाभार्थियों की संख्या में भारी कमी आती है, और राशि में भी बहुत बड़ी गिरावट देखने को मिलती है.
12वीं से 13वीं क़िस्त जारी होने तक छत्तीसगढ़ में पीएम किसान योजना से जुड़े हुए 20,37,413 किसानों की संख्या घटकर 19,94,017 हो जाती है. (घटाव = -43,396)
जबकि 13वीं से 14वीं क़िस्त तक पहुंचते ही फिर से 30, 649 किसानों की संख्या में वृद्धि होती है. इस तरह से योजना से जुड़े किसानों की संख्या 19,94,017 से बढ़कर 20,24,666 हो जाती है.
वितरित राशि की बात की जाये तो यह रकम 453.31 करोड़ से घटकर 450.56 करोड़ हो जाती है.
लाभार्थियों की संख्या में वृद्धि होती है, लेकिन राशि में थोड़ी कमी दर्ज की जाती14वीं से 16वीं क़िस्त तक जारी होने तकलाभार्थी किसानों की संख्या 20,24,666 से बढ़कर 21,54,232 हो जाती है. मतलब 1,29,566 किसान फिर से बढ़ते हैं.
वितरित राशि भी 450.56 करोड़ से बढ़कर 576.03 करोड़ हो जाती है.
यहाँ दोनों ही मामलों में (लाभार्थी और राशि) में महत्वपूर्ण वृद्धि हुई है.
15वीं से 16वीं क़िस्त में भी किसानो और राशि दोनो में वृद्धि दर्ज की जाती है.
योजना से लाभान्वित किसानों की संख्या 21,54,232 से बढ़कर 23,20,638 हो जाती है यानि 1,66,406 किसान नये जुड़ गये. इसी तरह वितरित राशि: 576.03 करोड़ से बढ़कर 580.31 करोड़ हो जाती है.
16वीं से 19वीं किस्त जारी होने तक
16वीं से 17वीं क़िस्त तक पहुंचते-पहुंचते योजना से जुड़े किसानों की संख्या 23,20,638 से बढ़कर 24,31,803 हो जाती है. इस तरह 1,11,165 नये किसान फिर जुड़ते हैं.
पर वितरित राशि: 580.31 से घटकर 577.36 हो जाती है.
लाभार्थियों की संख्या में वृद्धि हुई, लेकिन राशि में कमी आई.
17वीं से 18वीं क़िस्त के दौरान भी आंकड़ों में फरबदल का सिलसिला जारी रहता है. लाभार्थी किसानों की संख्या 24,31,803 से बढ़कर 25,07,751 हो जाती है यानि 75,948 नये किसान जुड़ जाते हैं.
जबकि आश्चर्यजनक रूप से वितरित राशि: 577.36 करोड़ से घटकर 570.00 करोड़ हो जाती है.
यहाँ भी लाभार्थियों की संख्या में वृद्धि हुई, लेकिन वृद्धि के उलट राशि में कमी आ जाती है.
इसी तरह 18वीं से 19वीं क़िस्त के दौरान लाभार्थी किसानों की संख्या 25,07,751 से बढ़कर 25,94,151 हो जाती है.
कुल 86,400 नये किसान जोड़े जाते हैं. और वितरित राशि: 570.00 करोड़ से बढ़कर 598.96 करोड़ हो जाती है.
यहाँ लाभार्थियों की संख्या में वृद्धि हुई और राशि में भी वृद्धि हुई.
बड़ी संख्या में किसानों के नाम कैसे कट रहे
इन आंकड़ों से गुजरते हुए लगता है जैसे कोई खेल चल रहा हो. कभी नाम काटा जाता है और फिर जोड़ा जाता है.
कई बार आवंटित राशि भी किसानों की संख्या से मेल नहीं खाती. सरकारी अधिकारियों से बात करें तो उनके पास अलग तर्क हैं.
उनका दावा है कि सत्यापन में अगर कोई गड़बड़ी होती है, तो ऐसे किसानों का नाम काट दिया जाता है. इसी तरह नए किसानों का नाम भी जुड़ता है.
लेकिन सवाल ये है कि क्या 6 साल बाद भी हर बार योजना में इतनी बड़ी संख्या में किसानों का नाम कटता जुड़ता है कि किसानों की संख्या में 10-10 लाख तक का अंतर आ जाए?
एक तिहाई किसानों का बढ़ जाना या घट जाना, पूरी योजना का हाल बताने के लिए काफी है.
छत्तीसगढ़ में कम जोत वाले किसानों की संख्या ज्यादा
यह देखना भी दिलचस्प है कि 2015-16 की कृषि जनगणना के अनुसार, छत्तीसगढ़ में कुल 40,10,772 किसानों के पास 49,91,728.56 हेक्टेयर कृषि भूमि है, जिसका मतलब है कि औसतन एक किसान के पास 1.244 हेक्टेयर भूमि है.
यह आंकड़ा स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि एक किसान परिवार के जीवन-यापन के लिए इतनी भूमि पर्याप्त नहीं है.
राज्य में सबसे बड़ी संख्या उन किसानों की है, जिनके पास 1 हेक्टेयर से भी कम भूमि है. 24,34,321 किसान 1 हेक्टेयर से कम भूमि के मालिक हैं, जबकि 8,79,477 किसानों के पास 1 से 2 हेक्टेयर तक भूमि है.
4,93,056 किसान 2 से 4 हेक्टेयर के बीच भूमि के मालिक हैं. वहीं, 4 से 10 हेक्टेयर के बीच भूमि वाले किसान मात्र 1,80,423 हैं, और 10 हेक्टेयर से ज्यादा भूमि वाले किसानों की संख्या तो सिर्फ 23,095 है.
यह ध्यान देने योग्य है कि 2015-16 के आंकड़े अब आठ साल पुराने हो चुके हैं और नए आंकड़े अब तक सामने नहीं आए हैं.
हालांकि, देश भर में यह स्पष्ट हो चुका है कि कृषि भूमि का नुकसान हो रहा है और छत्तीसगढ़ भी इससे अछूता नहीं है.
घटती कृषि भूमि गंभीर संकट
एक ओर, पहले से ही मुश्किलों का सामना कर रहे किसानों की समस्याएं हल नहीं हो पा रही हैं, वहीं दूसरी ओर घटती कृषि भूमि, खेती और किसान दोनों के लिए गंभीर संकट बन चुकी है.
कृषि पर निर्भर मजदूरों के लिए बेरोजगारी भी एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है और सरकारी योजनाओं में इसका कोई ठोस समाधान नजर नहीं आता. जो योजनाएं हैं, वो भी आधी-अधूरी और बेमन वाली हैं.
जनगणना न होना किसानों के साथ धोखा
योजनाओं का क्रियान्वयन करने के लिए हमारे पास ठीक-ठाक आंकड़े तक नहीं हैं. कोरोना काल जैसे ही ख़त्म हुआ,अधिकांश देशों ने अपनी जनगणना करवा ली.
भारत में 2011 के बाद न तो जनगणना हुई और ना ही अभी इसकी कोई सुगबुगाहट है.
जाहिर है,आंकड़े नहीं होंगे तो किसानों की दूसरी योजनाओं का हाल, पीएम सम्मान निधि से अलग होना मुश्किल है.
हैं.