45 किलो गांजे के साथ पकड़े गए किशोर को हाईकोर्ट से नहीं मिली बेल
बिलासपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने 45 किलोग्राम गांजा तस्करी के मामले में शामिल एक 17 वर्षीय किशोर की आपराधिक पुनरीक्षण याचिका को खारिज कर दिया है. मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले की गंभीरता और जब्त किए गए मादक पदार्थ की 'व्यावसायिक मात्रा' को देखते हुए निचली अदालतों के फैसले को बरकरार रखा.
अदालत ने स्पष्ट किया कि इतनी बड़ी मात्रा में नशीले पदार्थों की बरामदगी और सह-आरोपियों के साथ वाहन में मौजूदगी प्रथम दृष्टया संलिप्तता का संकेत देती है, ऐसे में किशोर को जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता.
यह मामला 7 अगस्त 2025 का है, जब महासमुंद जिले के सिंघोड़ा थाना पुलिस ने राष्ट्रीय राजमार्ग 53 पर एक कार को रोककर तलाशी ली थी. इस दौरान वाहन से लगभग 6.75 लाख रुपये मूल्य का 45 किलो गांजा बरामद हुआ था.
वाहन में सवार किशोर के साथ गगन सिंह भाटिया और दुर्गेश कुमार साहू को गिरफ्तार किया गया था, जो कथित तौर पर इस खेप को ओडिशा से रायपुर ला रहे थे. पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट की धारा 20(बी) के तहत मामला दर्ज कर किशोर को महासमुंद के अवलोकन गृह भेज दिया था.
सुनवाई के दौरान किशोर के वकील शालविन शर्मा ने तर्क दिया कि वह केवल एक घरेलू नौकर के रूप में आरोपियों के साथ था और उसे नशीले पदार्थों की कोई जानकारी नहीं थी.
उन्होंने किशोर न्याय अधिनियम की धारा 12 का हवाला देते हुए कहा कि नाबालिग को सामान्यतः जमानत मिलनी चाहिए, साथ ही जब्ती की प्रक्रिया में देरी का भी मुद्दा उठाया.
हालांकि, राज्य के वकील शुभम बाजपेयी ने भारी मात्रा में नशीले पदार्थों की तस्करी का हवाला देते हुए इसका कड़ा विरोध किया.
हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद कहा कि चूंकि सह-आरोपी दुर्गेश की जमानत भी पहले खारिज हो चुकी है और अपराध की प्रकृति गंभीर है, इसलिए निचली अदालत के आदेश में कोई अवैधता नहीं है.