शिक्षकों को सुप्रीम आदेश, TET पास करो वरना नौकरी छोड़ो
शिक्षकों को सुप्रीम कोर्ट का आदेश, TET पास करो वरना नौकरी छोड़ो
रायपुर | ममता मानकरः सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के शिक्षकों को लेकर बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. अब कोई भी शिक्षक टीईटी यानी टीचर्स एलिजिबिलिटी टेस्ट पास किए बिना न तो अपनी नौकरी में बना रह सकेगा और न ही प्रमोशन पा सकेगा. सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से छत्तीसगढ़ के लगभग पौने तीन लाख से अधिक शिक्षक प्रभावित होंगे.
अब कोई भी शिक्षक टीईटी पास किए बिना न तो नौकरी में बना रह सकेगा और न ही प्रमोशन पाएगा. सुप्रीम कोर्ट का यह ताज़ा फैसला, शिक्षा व्यवस्था के लिए मील का पत्थर साबित हो सकता है.
यह आदेश विशेष रूप से छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में अहम हो जाता है, जहाँ शिक्षा की हालत चिंताजनक है और बच्चों के सीखने के स्तर पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं.
छत्तीसगढ़ में साक्षरता दर 76.6 प्रतिशत
छत्तीसगढ़ में करीब 2.85 लाख शिक्षक कार्यरत हैं. यह वही राज्य है जहाँ साक्षरता दर 76.6 प्रतिशत है, जो राष्ट्रीय औसत से भी कम है. ASER रिपोर्ट 2024 बताती है कि ग्रामीण इलाकों के 75 प्रतिशत बच्चे अपनी कक्षा से नीचे की किताब नहीं पढ़ पाते और गणित में तो स्थिति और भी खराब है.
ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि जब शिक्षक ही प्रशिक्षित और योग्य न हों, तो बच्चों से गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा की उम्मीद कैसे की जा सकती है?
इस्तीफा या अनिवार्य सेवानिवृत्ति
टीईटी यानी Teachers Eligibility Test का मक़सद यही था कि स्कूलों में नियुक्त होने वाले शिक्षक न्यूनतम योग्यता पर खरे उतरें. लेकिन सच यह है कि इसकी अनिवार्यता को बार-बार टाल दिया गया.
राज्यों ने भी कई बार बिना टीईटी पास किए शिक्षकों को प्रमोशन देकर मामले को और उलझा दिया. नतीजा यह हुआ कि लाखों शिक्षक आज भी इस परीक्षा को पास नहीं कर सके हैं.
अब सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि या तो शिक्षक टीईटी पास करें, या फिर सेवा छोड़ें.
1 सितंबर 2025 को जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने अपने आदेश में साफ़ कहा कि जिन शिक्षकों की सेवा में पाँच साल से ज्यादा समय बचा है, उन्हें अनिवार्य रूप से टीईटी पास करना होगा.
अगर वे परीक्षा में असफल रहते हैं तो उन्हें या तो इस्तीफा देना होगा या फिर अनिवार्य सेवानिवृत्ति लेनी होगी. हालांकि जिनकी सेवा में पाँच साल से कम समय बचा है, उन्हें इस नियम से फिलहाल राहत दी गई है.
बड़ा सवाल यह भी है कि यह नियम अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों पर लागू होगा या नहीं. इस पर निर्णय सुप्रीम कोर्ट की बड़ी पीठ निर्णय लेगी.
क्या है टीईटी
टीईटी यानी Teachers Eligibility Test को 2010 से राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद ने अनिवार्य किया था. इसका मक़सद यही था कि प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर यानी कक्षा पहली से आठवीं तक के विद्यार्थियों को पढ़ाने वाले शिक्षक न्यूनतम योग्यता पर खरे उतरें.
शिक्षकों की योग्यता को जांचने वाली टीईटी परीक्षा में दो प्रश्नपत्र होते हैं. पहला प्राथमिक यानी कक्षा 1से 5 के लिए, दूसरा उच्च प्राथमिक यानी कक्षा 6 से 8 के लिए.
शुरू में शिक्षकों को इसे पास करने के लिए पाँच साल दिए गए, जिसे बाद में बढ़ाकर नौ साल कर दिया गया. लेकिन बड़ी संख्या में शिक्षक आज भी यह परीक्षा पास नहीं कर पाए हैं.
यही वजह है कि जब तमिलनाडु और महाराष्ट्र जैसे कई राज्यों में बिना टीईटी पास किए ही शिक्षकों को प्रमोशन दिया गया, तो मामला अदालत तक पहुँचा. मद्रास हाईकोर्ट ने जून 2025 में कहा था कि 29 जुलाई 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों को सेवा में बने रहने के लिए टीईटी पास करना ज़रूरी नहीं है, सिर्फ प्रमोशन के लिए होगा.
अब सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश पलट दिया है और साफ़ कर दिया है कि नौकरी हो या प्रमोशन, दोनों के लिए टीईटी अनिवार्य होगा.
राज्य में इसका असर
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का छत्तीसगढ़ पर सीधा असर होगा. यूडीआईएसई+ के आंकड़ों के मुताबिक, छत्तीसगढ़ में करीब 2.85 लाख शिक्षक हैं, जो इस फैसले से प्रभावित हो सकते हैं.
यह वही राज्य है जहाँ शिक्षा की स्थिति पहले से ही चिंताजनक है. राज्य की साक्षरता दर 76.6% है, जो राष्ट्रीय ग्रामीण औसत से भी कम है.
साक्षरता के मामले में देश के 36 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में छत्तीसगढ़ 27वें स्थान पर है. ग्रामीण इलाकों में अब भी 24.4% लोग निरक्षर हैं.
शिक्षा पर सरकार का खर्च
राज्य सरकार शिक्षा पर खर्च तो बहुत कर रही है, 2024-25 के बजट में 21,489 करोड़ रुपए शिक्षा पर खर्च किए गए. वहीं 2023-24 में भी यह आंकड़ा 19,489 करोड़ रुपए था. लेकिन नतीजा निराश करने वाला है.
ASER रिपोर्ट 2024 बताती है कि कक्षा 3 के 75% बच्चे कक्षा 2 की हिंदी की किताब नहीं पढ़ पाते. कक्षा 5 के आधे बच्चे साधारण गणित नहीं कर पाते. कक्षा 8 के 24% छात्र दूसरी कक्षा का पाठ भी नहीं पढ़ पाते.
पढ़ाई का स्तर चिंताजनक
गणित की स्थिति और गंभीर है. कक्षा 3 में सिर्फ 23.3% बच्चे जोड़-घटाव कर पाते हैं. कक्षा 5 में 25.7% और कक्षा 8 में सिर्फ 36.4% बच्चे गुणा-भाग जानते हैं. राजधानी रायपुर में भी स्थिति खराब है, जहां उच्च प्राथमिक स्तर पर ड्रॉपआउट रेट 2.1% है, जो माध्यमिक स्तर पर बढ़कर 14.5% हो जाता है. और लड़कियों की ड्रॉपआउट दर इससे भी ज्यादा है.
जाहिर है, ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला छत्तीसगढ़ के लिए दोहरा असर डालने वाला साबित हो सकता है.
एक तरफ जहां इससे शिक्षकों की योग्यता की कसौटी कड़ी होगी, वहीं दूसरी ओर इससे राज्य की शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा असर पड़ेगा.
1 फरवरी 2026 को टीईटी परीक्षा कराने का ऐलान
छत्तीसगढ़ व्यापमं पहले ही 1 फरवरी 2026 को टीईटी परीक्षा कराने का ऐलान कर चुका है. यह उन शिक्षकों के लिए आख़िरी मौका होगा जिनकी सेवा पाँच साल से ज्यादा बची है. उन्हें यह परीक्षा पास करना ही होगा.
अब शिक्षा से समझौते का दौर ख़त्म खत्म हो गया है. सुप्रीम कोर्ट ने साफ़ कर दिया है कि या तो शिक्षक टीईटी पास करें, या फिर कुर्सी छोड़ें. छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में जहाँ शिक्षा की हालत पहले से ही बदहाल है, यह फैसला किसी भूचाल से कम नहीं.
लेकिन सच यही है कि बिना योग्य शिक्षक के अच्छे भविष्य की कल्पना बेमानी है. बच्चों का भविष्य अयोग्य हाथों में नहीं छोड़ा जा सकता. सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश सिर्फ़ नौकरी की सुरक्षा नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ी की गारंटी है.
अब परीक्षा सिर्फ़ बच्चों की नहीं, बल्कि शिक्षकों की भी होगी.