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सुप्रीम कोर्ट ने अमित जोगी की सजा पर लगाई रोक

सुप्रीम कोर्ट ने अमित जोगी की दोषसिद्धि और उम्रकैद की सजा पर लगाई रोक

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23 अप्रै. 2026, 06:54 AM 3 मिनट में पढ़ें 1

अमित जोगी
अमित जोगी

नई दिल्ली । डेस्क: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार 23 अप्रैल, 2026 को एक फैसला सुनाते हुए छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी को बड़ी राहत दी है. शीर्ष अदालत ने 2003 के रामावतार जग्गी हत्याकांड में अमित जोगी की दोषसिद्धि और छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय द्वारा सुनाई गई उम्रकैद की सजा पर रोक लगा दी है. 


जस्टिस विक्रम नाथ, संदीप मेहता और विजय बिश्नोई की पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ताओं विवेक तन्खा और कपिल सिब्बल की दलीलों को स्वीकार करते हुए यह आदेश पारित किया. इसके साथ ही अदालत ने अमित जोगी की याचिका पर केंद्रीय जांच ब्यूरो को नोटिस भी जारी किया है.


गौरतलब है कि हाल ही में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने ट्रायल कोर्ट के पूर्व के फैसले को पलटते हुए अमित जोगी को दोषी ठहराया था और उन्हें जेल अधिकारियों के सामने सरेंडर करने का निर्देश दिया था. 


इस मामले की शुरुआत 4 जून, 2003 को हुई थी, जब रायपुर में रामावतार जग्गी की हत्या कर दी गई थी. 


हालांकि 2007 में ट्रायल कोर्ट ने अन्य 28 आरोपियों को दोषी ठहराया था, लेकिन अमित जोगी को बरी कर दिया गया था. अब सुप्रीम कोर्ट के इस ताजा आदेश के बाद जोगी की सजा के क्रियान्वयन पर फिलहाल रोक लग गई है.


रामावतार जग्गी हत्याकांड


रामावतार जग्गी हत्याकांड छत्तीसगढ़ के इतिहास का पहला सबसे चर्चित राजनीतिक हत्याकांड माना जाता है. यह घटना 4 जून, 2003 की है, जब राज्य में अजीत जोगी के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार थी. राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के तत्कालीन कोषाध्यक्ष और विद्याचरण शुक्ल के करीबी सहयोगी रामावतार जग्गी की रायपुर के मौदहापारा क्षेत्र में सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. शुरुआती जांच में स्थानीय पुलिस ने इसे लूट के इरादे से की गई हत्या बताया था और कुछ आरोपियों को गिरफ्तार भी किया था, लेकिन जग्गी के परिवार और विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि असली दोषियों को बचाने के लिए जांच को भटकाया जा रहा है.


मामले की गंभीरता को देखते हुए 2004 में इसकी जांच सीबीआई (CBI) को सौंप दी गई. सीबीआई ने अपनी जांच में खुलासा किया कि यह कोई साधारण लूट नहीं, बल्कि एक गहरी राजनीतिक साजिश थी. जांच के अनुसार, रामावतार जग्गी की बढ़ती लोकप्रियता और आगामी राजनीतिक रैलियों को रोकने के उद्देश्य से उन्हें रास्ते से हटाने की योजना बनाई गई थी. सीबीआई ने इस मामले में तत्कालीन मुख्यमंत्री के बेटे अमित जोगी सहित 31 लोगों को आरोपी बनाया, जिसमें कई पुलिस अधिकारी भी शामिल थे.


इस मामले में कानूनी प्रक्रिया काफी लंबी चली. 31 मई, 2007 को रायपुर की एक विशेष अदालत ने 28 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई, लेकिन मुख्य आरोपी माने जा रहे अमित जोगी को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया था. इसके बाद सीबीआई और रामावतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने इस फैसले को छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में चुनौती दी. लगभग 23 वर्षों के कानूनी संघर्ष के बाद, अप्रैल 2026 में हाईकोर्ट ने अमित जोगी को हत्या की साजिश का हिस्सा मानते हुए दोषी करार दिया और उम्रकैद की सजा सुनाई, जिस पर अब सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP