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आधार कार्ड नागरिकता का एकमात्र प्रमाण नहीं हो सकता: SC

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02 सित. 2025, 11:35 PM 3 मिनट में पढ़ें 1

सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली । डेस्क: सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि आधार कार्ड को नागरिकता का एकमात्र प्रमाण नहीं माना जा सकता. बिहार में विशेष गहन सर्वेक्षण (एसआईआर) से संबंधित एक मामले की सुनवाई के दौरान, विपक्षी दलों के वकीलों ने बार-बार मांग की कि मतदाता सूची में नाम दर्ज करने के लिए केवल आधार कार्ड को ही प्रमाण के रूप में स्वीकार किया जाए. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस मांग को खारिज कर दिया और कहा कि आधार को कानून में दी गई मान्यता से अधिक महत्व देना संभव नहीं है.


न्यायमूर्ति सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा, "आधार कई दस्तावेजों में से एक दस्तावेज हो सकता है, जिसका उपयोग सत्यापन के लिए किया जा सकता है."


कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि आधार अधिनियम की धारा 9 में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि आधार नंबर या उसका प्रमाणीकरण किसी व्यक्ति की नागरिकता या निवास का प्रमाण नहीं होगा. इसके अलावा, 2018 में सुप्रीम कोर्ट की पांच न्यायाधीशों की पीठ ने पुट्टस्वामी मामले में कहा था कि आधार नंबर किसी की नागरिकता के अधिकार को स्थापित नहीं कर सकता.


बिहार में मतदाता सूची विवाद


बिहार में मसौदा मतदाता सूची से 65 लाख लोगों के नाम हटाए जाने के मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है. कोर्ट ने पहले आदेश दिया था कि मतदाता 1 सितंबर तक अपनी शिकायतें दर्ज कर सकते हैं. विपक्षी दलों ने इस समय सीमा को बढ़ाने की मांग की थी, जिस पर सोमवार को सुनवाई हुई. राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) की ओर से वकील प्रशांत भूषण ने कोर्ट में दलील दी कि आधार को एकमात्र प्रमाण के रूप में स्वीकार नहीं किया जा रहा है, जिसके कारण कई लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं.


सुप्रीम कोर्ट ने जवाब में कहा, "आधार पर इतना जोर क्यों दिया जा रहा है? हम कभी यह आदेश नहीं देंगे कि आधार ही नागरिकता का अंतिम प्रमाण है." कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि पुट्टस्वामी मामले में पांच न्यायाधीशों की पीठ के निर्देशों का उल्लंघन नहीं किया जा सकता.


निर्वाचन आयोग और केंद्र सरकार की दलील


निर्वाचन आयोग की ओर से वकील राकेश द्विवेदी ने कोर्ट को बताया कि बिहार के कुछ जिलों में आधार का उपयोग 140 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जिसके कारण इसे मतदाता सूची के लिए प्रमाण के रूप में उपयोग करने पर जोर दिया जा रहा है. वहीं, केंद्र सरकार ने कई बार दावा किया है कि कुछ राज्यों में बांग्लादेशी और रोहिंग्या जैसे अवैध प्रवासियों ने आधार कार्ड बनवाए हैं.


सुप्रीम कोर्ट का निर्देश


सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में मसौदा मतदाता सूची से गलत तरीके से हटाए गए नामों को ठीक करने के लिए राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं को सक्रिय होने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने यह भी कहा कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए आधार के साथ-साथ अन्य दस्तावेजों को भी स्वीकार किया जा सकता है.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP