SC: छत्तीसगढ़ के अस्पताल में बच्चा बदलने के आरोपों की जांच के लिए नोटिस जारी
नई दिल्ली । डेस्क: सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ के एक निजी अस्पताल में बच्चा बदलने के गंभीर आरोपों की जांच के लिए दायर विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) पर नोटिस जारी किया है. याचिकाकर्ताओं का दावा है कि डीएनए टेस्ट से पता चला कि उनकी एक बेटी का डीएनए उनसे मेल खाता है, जबकि दूसरी बेटी का डीएनए मेल नहीं खाता, जिससे बच्चा बदलने का संदेह पुख्ता होता है.
याचिकाकर्ताओं ने बताया कि मां ने एक लड़के और एक लड़की को जन्म दिया था, लेकिन अस्पताल ने उन्हें सूचित किया कि उन्होंने दो लड़कियों को जन्म दिया. इस मामले में याचिकाकर्ताओं ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर कर डॉक्टर और अस्पताल के खिलाफ प्रारंभिक जांच और एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी. साथ ही, उन्होंने अपने कथित अपहृत बच्चे को ढूंढकर उसकी कस्टडी उन्हें सौंपने की मांग भी की थी.
हाईकोर्ट ने अपनी जांच में पाया कि अस्पताल के सभी दस्तावेज सही थे और बच्चा चोरी के कोई सबूत नहीं मिले. इसके आधार पर हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की रिट याचिका को खारिज कर दिया. हाईकोर्ट के इस आदेश से असंतुष्ट होकर याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर की.
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने याचिकाकर्ताओं के इस तर्क पर विचार किया कि हाईकोर्ट ने यह जांच करने में विफल रहा कि क्या याचिकाकर्ता ने अस्पताल में एक लड़के और एक लड़की को जन्म दिया था, और क्या दोनों लड़कियों के डीएनए रिपोर्ट से यह पुष्टि होती है कि वे एक ही माता-पिता से हैं. डीएनए रिपोर्ट और याचिकाकर्ताओं के दावों को ध्यान में रखते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में नोटिस जारी किया.
याचिका को अधिवक्ता चंद कुरैशी और अशोक कुमार पाणिग्रही ने दायर किया था. यह मामला अस्पतालों में बच्चों की सुरक्षा और पारदर्शिता से जुड़े गंभीर सवाल उठाता है.