शनि, 17 अक्टू. 2026

CGKhabar

पशु तस्करी में शामिल BSF जवान की बर्खास्तगी पर SC की मुहर

C

CG Khabar

18 फ़र. 2026, 08:00 AM 2 मिनट में पढ़ें 1

सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली । डेस्क: उच्चतम न्यायालय ने भारत-बांग्लादेश सीमा पर अवैध पशु तस्करी को बढ़ावा देने के आरोपी सीमा सुरक्षा बल के एक सब-इंस्पेक्टर की दोषसिद्धि और सेवा से बर्खास्तगी के फैसले को बरकरार रखा है. न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति प्रसन्न बी. वराले की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि जब राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा अत्यंत महत्वपूर्ण हो, तो सीमा की रक्षा करने वाले अधिकारी की किसी भी चूक या गलती को हल्के में नहीं लिया जा सकता. 


अदालत ने बीएसएफ अधिनियम, 1968 की धारा 48(1)(सी) के तहत दोषी को दी गई सजा को उचित ठहराया.


यह मामला बीएसएफ जवान भगीरथ चौधरी से जुड़ा है, जिन्होंने बल में 36 वर्षों तक सेवा दी थी. भारत-बांग्लादेश सीमा के गेट नंबर 16 पर पोस्ट कमांडर के रूप में तैनाती के दौरान उन पर पशु तस्करी में मदद करने का आरोप लगा था. 


हालांकि इस मामले में कोई प्रत्यक्षदर्शी या बरामदगी नहीं हुई थी, लेकिन घटना स्थल से मिले साक्ष्यों और एक अन्य व्यक्ति के इकबालिया बयान के आधार पर 'जनरल सिक्योरिटी फोर्स कोर्ट' ने उन्हें दोषी मानते हुए छह महीने की कैद और नौकरी से बर्खास्तगी की सजा सुनाई थी.


भगीरथ चौधरी ने इस फैसले को पहले दिल्ली हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी. उनकी दलील थी कि उनके खिलाफ सबूत विश्वसनीय नहीं हैं और इतने लंबे सेवाकाल के बाद ऐसी कड़ी सजा देना अनुचित है. उन्होंने अपनी पेंशन बहाली की भी गुहार लगाई थी. 


हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि भगीरथ चौधरी का पिछला रिकॉर्ड भी बेदाग नहीं रहा है. रिकॉर्ड के अनुसार, 1980 से 1995 के बीच वे चार बार दोषी पाए गए थे और सजा काट चुके थे. 

अदालत ने पेंशन के मुद्दे पर उन्हें संबंधित अधिकारियों के समक्ष अपना पक्ष रखने (रिप्रेजेंटेशन) की अनुमति तो दी है, लेकिन इस पर कोई भी अंतिम निर्णय लेने का अधिकार विभाग पर ही छोड़ दिया है.

यह खबर शेयर करें: WhatsApp Facebook
CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP