सोनम वांगचुक का आमरण अनशन जारी, रखी ये मांगें
नई दिल्ली । डेस्क: शिक्षा प्रणाली में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक मामलों को लेकर दिल्ली में विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है. सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने सोमवार को सफदरजंग अस्पताल से एक हस्तलिखित बयान जारी कर अपना अनिश्चितकालीन अनशन जारी रखने का एलान किया है. उन्होंने यह फैसला कॉकरोच जनता पार्टी के 'संसद चलो' मार्च के दौरान युवा प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिसिया कार्रवाई के विरोध में लिया है.
वांगचुक ने स्पष्ट किया है कि वे तब तक अपना उपवास जारी रखेंगे जब तक कि युवा नेताओं को सांसदों से मिलने की अनुमति नहीं मिल जाती या फिर उन्हें खुद अस्पताल में सांसदों से मिलने की इजाजत नहीं दी जाती. उन्होंने उम्मीद जताई कि इससे पहले सरकार शिक्षा मंत्री की जवाबदेही तय करेगी.
वांगचुक ने उकसावे के बावजूद प्रदर्शनकारियों द्वारा शांति बनाए रखने की सराहना की. उन्होंने सरकार और पुलिस बल से अपील की है कि वे छात्रों को संसद के समक्ष अपनी शिकायतें रखने की अनुमति देकर इस मुद्दे का तुरंत समाधान करें.
संसद के मानसून सत्र के पहले दिन नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर हजारों युवा समर्थक रात भर जुटे रहे. प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ नारेबाजी की. इस दौरान भारी बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवानों ने जंतर-मंतर के आसपास बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों को संसद की तरफ बढ़ने से रोका और कई लोगों को हिरासत में ले लिया.
आंदोलन के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी दी कि स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने कॉकरोच जनता पार्टी की मांगों पर सरकार के भीतर चर्चा करने के लिए समय मांगा है. नड्डा के अनुसार, सीजेपी के नेताओं के साथ करीब चार घंटे तक सकारात्मक माहौल में बातचीत हुई है, जिसके बाद नेताओं ने सरकार को एक ज्ञापन सौंपा है.
कॉकरोच जनता पार्टी की मुख्य मांगों में सोनम वांगचुक की रिहाई, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा और पेपर लीक के बाद कथित तौर पर आत्महत्या करने वाले प्रत्येक छात्र के परिवार को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा देना शामिल है. मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, परीक्षा में गड़बड़ियों के चलते अब तक करीब 12 छात्र अपनी जान दे चुके हैं.
गौरतलब है कि सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस द्वारा 21 दिनों के उपवास के बाद जबरन सफदरजंग अस्पताल में स्थानांतरित किया गया था, जहां वे 18 जुलाई से भर्ती हैं. उनके समर्थकों ने आरोप लगाया है कि उन्हें अस्पताल में अवैध हिरासत में रखा गया है, हालांकि अधिकारियों ने इस आरोप को खारिज किया है. सीजेपी प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के लिए पूरी जवाबदेही और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर अड़ी हुई है.