सिंगरौली कोल ब्लॉक आवंटन: एमपी में 'अंगूठा चोरी' की CBI जांच की मांग
नई दिल्ली । डेस्क: मध्यप्रदेश के सिंगरौली में स्थित धिराउली कोल ब्लॉक में माइनिंग के लिए मंजूरी लेने के नाम पर एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है. मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने राज्य की भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि अडानी से जुड़ी एक कंपनी को खनन की हरी झंडी दिलाने के लिए ग्राम सभाओं में मरे हुए लोगों के अंगूठे के निशान का इस्तेमाल किया गया है. कांग्रेस ने इस पूरे मामले की केंद्रीय जांच ब्यूरो से जांच कराने और जांच पूरी होने तक खनन पर तुरंत रोक लगाने की मांग की है.
कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने आरटीआई से मिले दस्तावेजों और मृत्यु प्रमाणपत्रों को सार्वजनिक करते हुए इस कथित घोटाले का खुलासा किया. कांग्रेस नेताओं ने इसे 'सिंगरौली फाइल्स' का नाम देते हुए कहा कि कॉर्पोरेट मित्रों को फायदा पहुंचाने के लिए आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों को बेरहमी से कुचला जा रहा है.
दस्तावेजों का हवाला देते हुए आदिवासियों के अधिकारों के लिए आवाज उठाने वाले कांग्रेस नेताओं ने कुछ चौंकाने वाले उदाहरण पेश किए. उन्होंने बताया कि बृज भान सिंह नाम के एक व्यक्ति का निधन साल 2014 में ही हो गया था, लेकिन ग्राम सभा के प्रस्ताव में खनन के लिए उनकी सहमति साल 2021 में दिखाई गई है. इसी तरह, 2018 में दुनिया छोड़ चुकीं फुलेश्वरी सिंह और 2015 में दिवंगत हुए जग बंधन सिंह गोंड के अंगूठे के निशान भी साल 2021 के सरकारी दस्तावेजों में दर्ज पाए गए हैं.
कांग्रेस का आरोप है कि सिर्फ मृतकों के नाम पर ही फर्जीवाड़ा नहीं हुआ, बल्कि जो आदिवासी पढ़े-लिखे हैं और हस्ताक्षर करते हैं, उनके नाम के आगे भी फर्जी अंगूठे के निशान लगा दिए गए.
पार्टी ने उदाहरण देते हुए कहा कि सुमारू सिंह और सोनमती सिंह नाम के दो आदिवासी इस माइनिंग ब्लॉक के विरोध में दिल्ली आकर विपक्ष के नेता राहुल गांधी से मिले थे. ये दोनों साक्षर हैं, लेकिन ग्राम सभा के आधिकारिक प्रस्ताव में इनके भी अंगूठे के निशान लगा दिए गए हैं.
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस मुद्दे को उठाते हुए तीखा हमला बोला. उन्होंने हिंदी में किए अपने पोस्ट में लिखा कि देश में वोट चोरी, सीट चोरी और चंदा चोरी के बाद अब 'अंगूठा चोरी' का नया दौर शुरू हो गया है. उन्होंने आरोप लगाया कि फर्जी ग्राम सभाएं तैयार करके आदिवासियों की पहचान और उनके हक छीने जा रहे हैं, जो पूरी तरह से असंवैधानिक है.
पार्टी के अन्य राष्ट्रीय समन्वयकों ने कहा कि पिछले 12 वर्षों के भाजपा शासन में विकास के नाम पर आदिवासी समुदायों के खिलाफ एक तरह का मोर्चा खोल दिया गया है. जब भी आदिवासी शांतिपूर्ण तरीके से अपने जल, जंगल और जमीन के लिए आवाज उठाते हैं, तो पुलिस और प्रशासन के दम पर उन्हें चुप करा दिया जाता है.
उन्होंने याद दिलाया कि यूपीए सरकार के समय बने भूमि अधिग्रहण कानून 2013 और पेसा (PESA) कानून के तहत अनुसूचित क्षेत्रों में बिना ग्राम सभा और आदिवासी समुदाय की वास्तविक सहमति के जमीन का अधिग्रहण नहीं किया जा सकता, लेकिन सिंगरौली में इन सभी नियमों की धज्जियां उड़ा दी गईं.
इस बेहद गंभीर मामले और 'अंगूठा चोरी' के सीधे आरोपों पर फिलहाल संबंधित माइनिंग कंपनी या मध्यप्रदेश के स्थानीय प्रशासन की तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है.