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भारतीय IT पेशेवरों को शॉक: US ने 8 बड़ी टेक कंपनियों की ग्रीन कार्ड प्रक्रिया रोकी

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08 अक्टू. 2026, 07:21 PM 4 मिनट में पढ़ें 2

जेडी वैंस उपराष्ट्रपति
जेडी वैंस उपराष्ट्रपति

वाशिंगटन । डेस्क: अमेरिका में नौकरी करने का सपना देखने वाले और वहां स्थाई निवासी (ग्रीन कार्ड) बनने का इंतजार कर रहे हजारों भारतीय आईटी पेशेवरों के लिए एक बुरी खबर सामने आई है. अमेरिका के ट्रंप प्रशासन ने कथित वीजा धोखाधड़ी और अमेरिकी कर्मचारियों के विस्थापन पर कड़ा रुख अपनाते हुए भारत की इंफोसिस, टाटा, विप्रो और एचसीएल सहित आठ प्रमुख टेक और आउटसोर्सिंग कंपनियों के लिए ग्रीन कार्ड (पर्मनेंट लेबर सर्टिफिकेशन) की प्रक्रिया पर रोक लगा दी है. इस निलंबन सूची में दिग्गज अमेरिकी और वैश्विक कंपनियां जैसे कॉग्निजेंट, कैपजेमिनी, माइक्रोसॉफ्ट और एडोब भी शामिल हैं.


वीजा धोखाधड़ी के आरोपों के बाद श्रम विभाग की बड़ी कार्रवाई


अमेरिकी श्रम सचिव कीथ सोंडरलिंग ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस सख्त फैसले की घोषणा की. उन्होंने बताया कि यह कदम श्रम विभाग के महानिरीक्षक एंथनी डी'एस्पोसिटो के नेतृत्व में चल रही आपराधिक और संघीय जांच के बाद उठाया गया है. सोंडरलिंग ने कहा कि सरकार इस धोखाधड़ी के नेटवर्क पर लगाम लगाकर अमेरिकी श्रमिकों के हितों की रक्षा कर रही है. अब इन कंपनियों से जुड़ी किसी भी नई परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन (PERM) अर्जी को स्वीकार नहीं किया जाएगा और जो आवेदन पहले से लंबित हैं, उनका प्रसंस्करण भी तुरंत प्रभाव से रोक दिया गया है.


उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी पर घेरा


अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इस फैसले की जानकारी देते हुए आरोप लगाया कि कंपनियां अमेरिकी कामगारों को हटाकर कम वेतन पर विदेशी कर्मचारियों को रखने के लिए H-1B कार्यक्रम का दुरुपयोग कर रही हैं. उन्होंने माइक्रोसॉफ्ट का उदाहरण देते हुए कहा कि कंपनी ने 6,000 अमेरिकी कर्मचारियों को नौकरी से निकाला, जबकि उसी अवधि में 6,300 H-1B वीजा और लगभग 3,000 ग्रीन कार्ड का लाभ उठाया. वेंस ने स्पष्ट किया कि H-1B कार्यक्रम का मूल उद्देश्य केवल उन अत्यंत योग्य विशेषज्ञों को अमेरिका लाना था, जिनके विकल्प स्थानीय स्तर पर उपलब्ध न हों.


कब तक जारी रहेगा यह निलंबन?


जब प्रेस वार्ता में पूछा गया कि यह फैसला अस्थाई है या स्थाई, तो उपराष्ट्रपति वेंस ने साफ किया कि 'पर्म' (PERM) प्रक्रिया पर यह निलंबन तब तक जारी रहेगा जब तक इसकी आवश्यकता होगी. उन्होंने कहा कि अमेरिकी प्रशासन चाहता है कि ये कंपनियां अमेरिका का बाजार छोड़ने के बजाय अपनी भर्ती प्राथमिकताओं में बदलाव करें और स्थानीय नागरिकों को प्राथमिकता दें.


भारतीय आईटी सेक्टर और पेशेवरों पर गंभीर असर


अमेरिका की इस कार्रवाई का सबसे ज्यादा प्रभाव भारतीय आईटी कंपनियों और वहां कार्यरत भारतीय इंजीनियरों पर पड़ेगा. इंफोसिस, विप्रो, टाटा और एचसीएल जैसी आउटसोर्सिंग कंपनियां हर साल बड़ी संख्या में भारतीय विशेषज्ञों को H-1B वीजा पर अमेरिका भेजती हैं और बाद में उन्हें ग्रीन कार्ड के लिए स्पॉन्सर करती हैं. इस निलंबन से न केवल इन कंपनियों के कामकाजी मॉडल पर असर पड़ेगा, बल्कि अमेरिका में लंबे समय से स्थाई निवासी बनने की उम्मीद लगाए बैठे पेशेवरों का भविष्य भी अनिश्चितता में लटक गया है.


विस्तार से समझे भारतीय पेशेवरों पर क्या प्रभाव पड़ेगा


अमेरिका में 'पर्म' (PERM) यानी ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया पर अचानक लगी इस रोक का सबसे बड़ा और सीधा झटका उन हजारों भारतीय आईटी पेशेवरों को लगेगा, जो सालों से अमेरिका में स्थायी निवास का सपना संजोए बैठे हैं. अनुमानों के मुताबिक, इस फैसले से प्रभावित होने वाले कुल आईटी कर्मचारियों की संख्या 50,000 से लेकर 1 लाख से भी अधिक हो सकती है, जिनमें से एक बड़ा हिस्सा अकेले भारतीय पेशेवरों का है. 


भारतीय आईटी कंपनियां जैसे इंफोसिस, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), विप्रो और एचसीएल हर साल हजारों कुशल पेशेवरों को H-1B वीजा पर अमेरिका भेजती हैं और कुछ समय बाद उनके ग्रीन कार्ड (PERM) के लिए आवेदन करती हैं. इस निलंबन के कारण न केवल नए PERM आवेदनों को स्वीकार करना बंद कर दिया गया है, बल्कि जो आवेदन पहले से लंबित थे, उनकी प्रोसेसिंग भी पूरी तरह ठप हो गई है. 


इसका सबसे खतरनाक असर यह होगा कि H-1B वीजा धारकों के वीजा विस्तार (Visa Extension) की समय-सीमा पर संकट खड़ा हो जाएगा. आमतौर पर H-1B वीजा अधिकतम 6 साल के लिए वैध होता है, और 6 साल के बाद अमेरिका में रुकने के लिए PERM का अप्रूव होना या आई-140 (I-140) का दाखिल होना अनिवार्य होता है. 


अगर PERM प्रक्रिया लंबे समय तक रुकी रहती है, तो 6 साल की अवधि पूरी कर चुके पेशेवरों को अपना वीजा विस्तार नहीं मिल पाएगा और उन्हें मजबूरन अपने परिवार के साथ अमेरिका छोड़कर भारत लौटना पड़ सकता है. 


इसके अलावा, अमेरिका में पहले से ही ग्रीन कार्ड बैकलाग (Green Card Backlog) दशकों लंबा है, ऐसे में इस निलंबन से भारतीय इंजीनियरों का इंतजार कई साल और बढ़ जाएगा, उनकी नौकरी बदलने (Job Switch) या पदोन्नति (Promotion) लेने की आजादी छिन जाएगी, और H-4 वीजा पर रह रहे उनके जीवनसाथी के काम करने के अधिकार पर भी अनिश्चितता के बादल मंडराने लगेंगे. कुल मिलाकर, इस फैसले ने हजारों भारतीय परिवारों के भविष्य को गहरे अधर में लटका दिया है.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP