शिलांग कैथोलिक एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग की
शिलांग । डेस्क: मेघालय के शिलांग में कैथोलिक ईसाई संगठन ने छत्तीसगढ़ में दो ननों की गिरफ्तारी की कड़ी निंदा की है, जिन पर मानव तस्करी और धर्मांतरण के आरोप लगाये गये हैं. संगठन ने इन आरोपों को "निराधार" और "झूठा" करार देते हुए छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से निष्पक्ष जांच और हस्तक्षेप की अपील की है.
शिलांग कैथोलिक एसोसिएशन जिसका नेतृत्व पूर्व कांग्रेस सांसद विन्सेंट एच. पाला कर रहे हैं, ने अपने पत्र में कहा कि नन प्रीति मेरी और वंदना फ्रांसिस, साथ ही सुकमन मंडावी, को 25 जुलाई को दुर्ग रेलवे स्टेशन पर सरकारी रेलवे पुलिस ने गिरफ्तार किया था.
यह कार्रवाई एक स्थानीय बजरंग दल कार्यकर्ता की शिकायत के आधार पर की गई, जिसमें आरोप लगाया गया कि वे नारायणपुर जिले की तीन महिलाओं को जबरन धर्मांतरण और तस्करी के लिये ले जा रही थीं.
शिलांग कैथोलिक एसोसिएशन ने दावा किया कि गिरफ्तार व्यक्ति केवल तीन युवा महिलाओं, जो सभी 18 वर्ष से अधिक उम्र की थीं, को उनके माता-पिता की पूरी सहमति से नौकरी के अवसरों के लिये साथ ले जा रहे थे.
संगठन ने कहा, "उनका काम मानवता की सेवा करना है, चाहे वह किसी भी जाति, पंथ या धर्म का हो. हम मानते हैं कि ऐसी गतिविधियाँ राष्ट्रीय विकास और प्रगति को बढ़ावा देती हैं."
शिलांग कैथोलिक एसोसिएशन ने आरोप लगाया कि गिरफ्तारी "बजरंग दल के सदस्यों द्वारा उकसाई गई थी और यह सांप्रदायिक पूर्वाग्रह से प्रेरित थी, न कि किसी विश्वसनीय सबूत के आधार पर."
इस घटना को "संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन" बताते हुये, एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री से गिरफ्तार व्यक्तियों की "तत्काल और बिना शर्त रिहाई" के लिये हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है.
"इनके खिलाफ लगाये गये आरोप निराधार और झूठे हैं," शिलांग कैथोलिक एसोसिएशन ने दोहराया, साथ ही अधिकारियों से अल्पसंख्यक अधिकारों की रक्षा करने और धर्मांतरण विरोधी कानूनों के दुरुपयोग को रोकने की अपील की.
शिलांग कैथोलिक एसोसिएशन ने यह भी उल्लेख किया कि नन अस्सीसी सिस्टर्स ऑफ मैरी इम्मैकुलेट से संबंधित हैं और इस घटना को "उत्पीड़न का कार्य" करार दिया.
शिलांग कैथोलिक एसोसिएशन ने कहा, "यह अल्पसंख्यकों के अपने धर्म का पालन करने और सामाजिक कार्यों में संलग्न होने के अधिकार पर हमला है, जिसमें उन्हें भयमुक्त रहने का हक है."