शेख हसीना को मौत की सजा मिलने की आशंका
वाशिंगटन । डेस्क: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के बेटे सजीब वाजेद ने चेतावनी दी है कि एक विशेष ट्रिब्यूनल उनकी मां को मौत की सजा सुना सकता है, लेकिन भारत में निर्वासन में रहते हुए वे पूरी सुरक्षा में हैं. उन्होंने कहा कि अगर उनकी पार्टी अवामी लीग पर लगे प्रतिबंध को हटाया नहीं गया, तो समर्थक अगले साल के चुनाव को रोक देंगे.
रॉयटर्स को दिए साक्षात्कार में वाजेद ने कहा, "हमें पता है कि फैसला क्या होगा. वे इसे प्रसारित कर रहे हैं. वे उन्हें दोषी ठहराएंगे और शायद मौत की सजा देंगे." उन्होंने जोड़ा, "मेरी मां के साथ वे क्या कर सकते हैं? मां भारत में सुरक्षित हैं. भारत उन्हें पूर्ण सुरक्षा दे रहा है."
78 वर्षीय हसीना अगस्त 2024 में छात्र-नेतृत्व वाले विरोध प्रदर्शनों के बाद बांग्लादेश से भागकर नई दिल्ली में निर्वासन में हैं, जहां उन्होंने 15 वर्षों तक सत्ता संभाली थी. संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार, 2024 के प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा बलों की गोलीबारी से 1,400 से अधिक लोग मारे गए थे.
हसीना पर बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय अपराध ट्रिब्यूनल में 2024 के घातक दमन के लिए मानवता के खिलाफ अपराधों का आरोप है. वे इन कार्यवाहियों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताती हैं और निर्दोष होने का दावा करती हैं. वाजेद ने कहा कि अवामी लीग के समर्थक, जो स्वतंत्रता के बाद से बांग्लादेशी राजनीति पर हावी रही है, चुनाव को तब तक नहीं होने देंगे जब तक पार्टी का पंजीकरण बहाल न हो. "हम अवामी लीग के बिना चुनाव की अनुमति नहीं देंगे. हमारे विरोध मजबूत होते जाएंगे और हम जो भी जरूरी होगा, करेंगे."
उन्होंने चेतावनी दी कि अगर अंतरराष्ट्रीय समुदाय कुछ नहीं करता, तो चुनाव से पहले बांग्लादेश में हिंसा भड़क सकती है. नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने मई में राष्ट्रीय सुरक्षा खतरे और वरिष्ठ नेताओं पर युद्ध अपराध जांच के हवाले से पार्टी का पंजीकरण निलंबित कर दिया था.
सरकारी प्रवक्ता ने वाजेद की चेतावनियों को खारिज करते हुए कहा, "अंतरिम सरकार निर्वासित राजनीतिक हस्तियों द्वारा हिंसा भड़काने को अत्यंत गैरजिम्मेदार और निंदनीय मानती है." वाजेद ने एसोसिएटेड प्रेस को पहले दिए साक्षात्कार में कहा था कि "प्रतिबंध हटना चाहिए, चुनाव समावेशी, स्वतंत्र और निष्पक्ष होने चाहिए. अभी जो हो रहा है, वह मेरी मां और हमारे राजनीतिक नेताओं को चुनाव लड़ने से रोकने का प्रयास है."
हाल के दिनों में ढाका में हिंसा तेज हो गई है. रविवार को शहर में कच्चे बम फटे, जबकि 12 नवंबर को ही 32 धमाके दर्ज किए गए. दर्जनों बसें आग के हवाले कर दी गईं और अधिकारियों ने कथित तोड़फोड़ के आरोप में अवामी लीग कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया. राजधानी ढाका और अन्य प्रमुख शहरों के स्कूल पिछले सप्ताह ऑनलाइन हो गए.
बांग्लादेश ने सुरक्षा मजबूत करने के लिए 400 से अधिक सीमा रक्षकों तैनात किए हैं, चेकपॉइंट सख्त किए हैं और सार्वजनिक सभाओं पर पाबंदी लगा दी है. दक्षिण एशिया विश्लेषक माइकल कुगेलमैन ने अल जजीरा को बताया, "हसीना बांग्लादेशी राजनीति में एक बिजली की छड़ी बनी हुई हैं. वे भारत से ऑनलाइन भाषण दे सकती हैं और हिंसक प्रतिक्रिया भड़का सकती हैं, जैसा इस साल पहले हुआ था."
उनके बेटे की चुनाव रोकने की धमकी से पार्टी की हिंसा इस्तेमाल करने की मंशा साफ हो जाती है. यह हिंसा यूनुस सरकार के रिकॉर्ड पर व्यापक चिंताओं के बीच हो रही है. बांग्लादेशी मानवाधिकार समूह ओधिकार की रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त 2024 से सितंबर 2025 के बीच कम से कम 40 अतिरिक्त न्यायिक हत्याएं हुईं, भले ही राज्य हिंसा समाप्त करने का वादा किया गया हो.
हसीना के तहत दुरुपयोग के आरोपित सुरक्षा बल, जिसमें अर्धसैनिक रैपिड एक्शन बटालियन शामिल है, अभी भी सक्रिय हैं. यूनुस ने फरवरी 2026 में चुनाव कराने का वादा किया है, उसी दिन संवैधानिक सुधारों पर जनमत संग्रह भी होगा.