आदिवासी बालिकाओं के साथ लैंगिक उत्पीड़नः नाग
छत्तीसगढ़ के सर्वआदिवासी समाज ने आदिवासी बालिकाओं पर बयान दिया
जगदलपुर | संवाददाताः छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में सर्व आदिवासी समाज के जिला अध्यक्ष गंगाराम नाग ने कहा है कि बस्तर संभाग में आदिवासी बालिकाओं के साथ लैंगिक उत्पीड़न हो रहा है.
समय-समय पर सर्व आदिवासी समाज के सदस्यों को बालिकाओं के माता-पिता से यह जानकारी मिल रही है. समाज के पदाधिकारियों का कहना है कि जल्द ही पूरे तथ्यों के साथ बस्तर संभाग में इस तरह के कितने मामले हैं, इसे मीडिया के सामने सर्व आदिवासी समाज पेश करेगा.
अध्यक्ष गंगाराम का कहना है कि बस्तर संभाग के बीजापुर, सुकमा ,नारायणपुर जिले के अंदरूनी इलाकों में इस तरह की शिकायतें बालिकाओं के माता-पिता से मिल रही हैं. आश्रम ,पोटाकेबिन और छात्रावासों में पढ़ने वाली बच्चियां भी लैंगिक उत्पीड़न का शिकार हो रही हैं.
उन्होंने कहा कि माता पिता में जागरूकता की कमी की वजह से ग्रामीण इसके खिलाफ आवाज नहीं उठा पा रहे हैं और इस तरह के मामले बाहर नहीं निकल पा रहे हैं. आने वाले समय में सर्व आदिवासी समाज प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर इस तरह के मामले पूरे तथ्यों के साथ मीडिया के सामने पेश करेगा.
लैंगिक उत्पीड़न और बलात्कार का शिकार हो रहीं बालिकाओं के परिवार वालों से लगातार समाज के पदाधिकारी और सदस्य बातचीत कर रहे हैं, ताकि इस कृत्य को अंजाम देने वाले दोषियों पर कार्रवाई हो सके.
जल-जंगल-जमीन उद्योगपतियों को
गंगाराम नाग का कहना है कि बस्तर में जल ,जंगल ,जमीन का सरकार के द्वारा दोहन किया जा रहा है. बस्तर में पांचवी अनुसूची लागू है, बावजूद इसके बिना ग्राम सभा के अवैध रूप से जल ,जंगल ,जमीन को बड़े-बड़े उद्योगपतियों को बेचा जा रहा है.
उन्होंने कहा कि लगातार अंदरूनी इलाकों में जंगल कट रहे हैं, पहाड़ों को ब्लास्ट कर उड़ाया जा रहा है. आदिवासी समाज इसके विरोध में लगातार आवाज उठा रहा है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है.
गंगाराम नाग ने कहा कि बस्तर की खनिज संपदा का दोहन किया जा रहा है, इसके खिलाफ पिछले कई सालों से आवाज उठाने वाले नेता मनीष कुंजाम के घर पर तेंदूपत्ता बोनस घोटाला में संलिप्त होने का आरोप लगाकर ईओडब्लू और एसीबी का छापा सरकार के द्वारा मारा जा रहा है.
कवासी लखमा के साथ अन्याय
आदिवासी नेता गंगाराम नाग ने कहा कि कोंटा के विधायक लखमा के साथ भी अन्याय हो रहा है. पिछले 6 महीनों से उन्हें ईडी, एसीबी और ईओडब्लू एजेंसी के अधिकारियों द्वारा प्रताड़ित किया जा रहा है, उन्हें कोर्ट में पेश नहीं किया जा रहा.
बस्तर के आदिवासियों के हितों की आवाज उठाने वाले जनप्रतिनिधियों पर सरकार के द्वारा दबाव बनाया जा रहा है और उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है.
सर्व आदिवासी समाज के अध्यक्ष ने कहा कि आने वाले समय में सरकार के इस तानाशाही रवैये के विरोध में सर्व आदिवासी समाज आंदोलन करेगा जिसकी रूपरेखा भी तैयार की जा रही है.