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कांगो में इबोला का भीषण प्रकोप: मौतों का आंकड़ा 1,700 के पार

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04 अग. 2026, 06:38 PM 2 मिनट में पढ़ें 1

इबोला वायरस
इबोला वायरस

किंशासा । डेस्क: लोकतांत्रिक गणराज्य कांगो (DRC) में इबोला वायरस का प्रकोप तेजी से भयावह रूप लेता जा रहा है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 15 मई को इस महामारी की घोषणा के बाद से अब तक 3,802 दर्ज मामलों में से 1,707 लोगों की मौत हो चुकी है. यह इतिहास का दूसरा सबसे बड़ा और सबसे तेजी से फैलने वाला इबोला प्रकोप बन गया है.


विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़ों के मुताबिक, वर्तमान में 17,000 से अधिक संदिग्ध संपर्कों की निगरानी की जा रही है, जिनमें से प्रतिदिन लगभग 80 प्रतिशत लोगों की ट्रैकिंग हो पा रही है.


यह प्रकोप वायरस की दुर्लभ 'बुंदीबुग्यो' (Bundibugyo) स्ट्रेन के कारण फैला है. चिंता की बात यह है कि इस विशेष वैरिएंट के लिए अभी तक कोई स्वीकृत टीका या इलाज मौजूद नहीं है. प्रकोप का मुख्य केंद्र पूर्वी प्रांत इतूरी बना हुआ है, जहां कुल मामलों के लगभग 90 प्रतिशत मरीज दर्ज किए गए हैं. हालांकि, संक्रमण अब प्रमुख शहर किसंगानी सहित पांच अन्य प्रांतों तक भी पहुंच चुका है.

 

जेनेवा में विश्व स्वास्थ्य संगठन के आर एंड डी ब्लूप्रिंट कार्यक्रम के कार्यवाहक प्रमुख वासी मूर्ती ने बताया कि वर्षों की अग्रिम योजना के कारण शोधकर्ता पिछली महामारियों की तुलना में इस बार काफी तेजी से प्रयोगात्मक उपचारों और टीकों का परीक्षण शुरू कर पाए हैं. प्री-क्लिनिकल परीक्षणों के परिणाम आशाजनक दिख रहे हैं, लेकिन इनकी वास्तविक प्रभावशीलता क्लिनिकल परीक्षणों के पूरा होने के बाद ही स्पष्ट होगी.


इस महामारी से अब तक 100 से अधिक स्वास्थ्यकर्मी संक्रमित हो चुके हैं. स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, सशस्त्र समूहों की हिंसा, स्वास्थ्य केंद्रों पर हमले, दुर्गम क्षेत्र, सहायता बजट में कटौती के कारण धन की कमी और जनता में अविश्वास जैसे कारणों से राहत कार्यों में भारी बाधा आ रही है.


बढ़ते दबाव और महीनों से वेतन न मिलने के कारण स्वास्थ्यकर्मियों में भी आक्रोश फैल रहा है. प्रभावित शहर मोंगबवालू और बूनिया में स्वास्थ्यकर्मियों ने वेतन भुगतान और सुरक्षित कामकाजी परिस्थितियों की मांग को लेकर हड़ताल और काम रोकने की चेतावनी दी है.


स्थिति की गंभीरता को देखते हुए WHO के महानिदेशक टेड्रोस एडहानॉम घेब्रेयेसस कांगो की राजधानी किंशासा और फिर महामारी के केंद्र बूनिया के दौरे पर हैं. अफ्रीका सीडीसी के महानिदेशक जीन कासेया के अनुसार, यह अभी स्पष्ट नहीं है कि यह प्रकोप अपने चरम पर कब पहुंचेगा. दूसरी ओर, पड़ोसी देश युगांडा ने स्थिति पर काबू पाते हुए जून के मध्य में खुद को इबोला-मुक्त घोषित कर दिया था.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP