सांभर के शिकार मामले में सात गिरफ्तार, जेल भेजे गए
कोंडागांव । डेस्क: छत्तीसगढ़ के कोंडागांव में मुखबिर से मिली पुख्ता सूचना के आधार पर वन विभाग ने वन्यप्राणी सांभर का शिकार करने और उसके मांस की खरीद-बिक्री में संलिप्त सात आरोपियों को सलाखें के पीछे भेज दिया है. इस पूरी कार्रवाई की शुरुआत कोंडागांव के बाजारपारा स्थित एक मकान में छापेमारी से हुई, जहां वन विभाग की टीम ने आठ प्लास्टिक थैलियों में भरा अवैध मांस बरामद किया.
घर की तलाशी के दौरान पकड़ी गई उषा बाई रजक और संगीता निर्मलकर ने पूछताछ में स्वीकार किया कि उन्होंने यह मांस धमतरी जिले के ग्राम उरपुटी निवासी नरसु नामक व्यक्ति से बेचने और खाने के इरादे से खरीदा था.
जांच का दायरा बढ़ते ही वनमंडलाधिकारी चूड़ामणि सिंह के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित कर धमतरी भेजी गई.
मुख्य आरोपी नरसु ने पुलिस और वन विभाग की पूछताछ में अपना जुर्म कबूल करते हुए बताया कि उसने अपने चार अन्य साथियों मुकेश, दुलेश्वर, तुलसी और मैतु के साथ मिलकर सांभर का शिकार किया था.
शिकार की इस घटना को अंजाम देने के बाद साक्ष्य मिटाने की नियत से आरोपियों ने वन्यप्राणी के अवशेषों को धमतरी वनमंडल के आरक्षित कक्ष क्रमांक आरएफ 178 में जला दिया था.
वन विभाग ने वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर सभी सात आरोपियों को न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें 14 दिन की न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है.