एप्पल को झटका: बंद हो सकती है टाटा की आईफोन कंपोनेंट फैक्ट्री
नई दिल्ली । डेस्क: भारत में एप्पल (Apple) के सबसे बड़े घरेलू सप्लायर टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं. तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (TNPCB) ने होसुर स्थित टाटा के आईफोन कंपोनेंट प्लांट को एक कड़ा कारण बताओ नोटिस जारी किया है. नियामक का आरोप है कि इस कारखाने से निकलने वाले दूषित पानी ने आसपास के खेतों और कुओं के भूजल को गंभीर रूप से प्रदूषित कर दिया है.
बोर्ड ने टाटा को चेतावनी दी है कि यदि इस मामले में कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं मिला, तो फैक्ट्री की बिजली काट दी जाएगी और इसे जबरन बंद करा दिया जाएगा. यह कदम एप्पल के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकता है, जो चीन से बाहर भारत को अपने बड़े प्रोडक्शन हब के रूप में देख रहा है.
किसानों की शिकायत के बाद खुली पोल:
होसुर स्थित इस प्लांट में आईफोन के बैक पैनल और अन्य जरूरी पुर्जे बनाए जाते हैं. फैक्ट्री के आसपास के जमीन मालिकों और किसानों ने काफी समय पहले प्रदूषण बोर्ड से शिकायत की थी कि कारखाने का गंदा पानी उनके खेतों और खुले कुओं में रिस रहा है, जिससे खेती और पीने का पानी बर्बाद हो रहा है.
इन शिकायतों के बाद दिसंबर 2025 से मई 2026 के बीच अधिकारियों ने पांच बार फैक्ट्री का औचक निरीक्षण किया. जांच में पाया गया कि टाटा ने अपने परिसर के भीतर बने रेन वॉटर हार्वेस्टिंग (वर्षा जल संचयन) तालाब में फैक्टरी का केमिकल युक्त गंदा पानी बहा दिया था. ओवरफ्लो होने के कारण यह दूषित पानी पास के खेतों और कुओं के भूजल में मिल गया.
नियमों की अनदेखी पर कड़ा रुख:
नियामक ने इस बात पर गहरी नाराजगी जताई है कि टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स को इससे पहले दिसंबर 2025 में भी सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन कंपनी ने उन पर कोई अमल नहीं किया. हालांकि, इस पूरे विवाद पर टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स का कहना है कि उन्होंने एक मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला से स्वतंत्र जांच कराई है, जिसमें कंपनी को सभी पर्यावरणीय मानकों के अनुकूल पाया गया है.
टाटा ने पर्यावरण और स्थानीय समुदायों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है, लेकिन इस संकट ने एप्पल की भारतीय सप्लायर चेन की कमजोरियों को फिर से उजागर कर दिया है.
भारतीय मैन्युफैक्चरिंग में एप्पल का बढ़ता संकट:
यह पहली बार नहीं है जब एप्पल के भारतीय सप्लायर्स किसी विवाद या हादसे में घिरे हों. इससे पहले सितंबर 2024 में इसी होसुर प्लांट में भीषण आग लगने से उत्पादन ठप हो गया था, जबकि 2023 में पेगाट्रॉन के प्लांट में भी आग लगने की घटना हुई थी.
इसके अलावा, फॉक्सकॉन पर भी रोजगार में कथित भेदभाव के आरोप लग चुके हैं. एक तरफ जहां साल 2026 में दुनिया भर के कुल आईफोन्स का 26 फीसदी हिस्सा भारत में बनने का अनुमान है, वहीं दूसरी तरफ प्रमुख सप्लायर्स का इस तरह विवादों में आना कंपनी की रफ्तार को धीमा कर सकता है. भारत सरकार और एप्पल दोनों ने फिलहाल इस मामले पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है.
टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स बंद होने पर क्या होगा:
टाटा की होसुर स्थित आईफोन कंपोनेंट फैक्ट्री के बंद होने से एप्पल की वैश्विक और भारतीय रणनीतियों पर बेहद गंभीर और दूरगामी प्रभाव पड़ेगा. वर्तमान में एप्पल अपनी मैन्युफैक्चरिंग को चीन से बाहर स्थानांतरित करने और भारत को एक प्रमुख वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाने के लिए तेजी से प्रयास कर रहा है, जिसमें टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है.
यदि यह प्लांट बंद होता है, तो एप्पल की 'चीन प्लस वन' रणनीति को बहुत बड़ा झटका लगेगा, क्योंकि टाटा दक्षिण एशिया में ताइवान की फॉक्सकॉन के बाद एप्पल का दूसरा सबसे बड़ा सप्लायर है. यह फैक्ट्री आईफोन के बैक पैनल और अन्य महत्वपूर्ण पुर्जों का निर्माण करती है, जिससे इसकी तालाबंदी से पूरी सप्लायर चेन और असेंबली लाइन प्रभावित होगी, जिसके परिणामस्वरूप आईफोन के उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है. साल 2026 तक दुनिया के कुल आईफोन्स का 26 प्रतिशत हिस्सा भारत में बनाने का जो लक्ष्य रखा गया है, इस व्यवधान के कारण उस लक्ष्य को हासिल करना बेहद मुश्किल हो जाएगा.
एप्पल के ब्रांड पर विपरीत प्रभाव:
इसके अलावा, एप्पल के लिए यह केवल उत्पादन का नुकसान नहीं होगा, बल्कि उसकी ब्रांड छवि को भी बड़ा नुकसान पहुंचेगा, क्योंकि कंपनी पर्यावरण, सामाजिक और शासन (ESG) मानकों और सख्त सप्लायर नियमों का दावा करती है. प्रदूषण के आरोपों के कारण सप्लायर फैक्ट्री का बंद होना पर्यावरण और स्थानीय समुदायों के प्रति एप्पल की निगरानी पर सवाल खड़े करेगा.
इसके साथ ही, टाटा के इस प्लांट में पहले लगी आग और अब इस प्रदूषण विवाद जैसे हादसों की श्रृंखला से निवेशकों और बाजार में यह संदेश जा सकता है कि भारत में एप्पल की सप्लायर चेन अभी भी पूरी तरह स्थिर और सुरक्षित नहीं है.
यह स्थिति एप्पल को अस्थायी रूप से वापस चीन या वियतनाम जैसे अन्य देशों पर निर्भर होने के लिए मजबूर कर सकती है, जिससे उसकी लागत बढ़ेगी और वैश्विक विविधीकरण की रफ्तार धीमी हो जाएगी. कुल मिलाकर, टाटा की फैक्ट्री पर कोई भी कड़ी कार्रवाई एप्पल के उत्पादन लक्ष्यों, उसकी वैश्विक आपूर्ति स्थिरता और भारत में उसके दीर्घकालिक विस्तार की योजनाओं को सीधे तौर पर प्रभावित करेगी.