एप्पल और टेस्ला के सीक्रेट दस्तावेज डार्क वेब पर लीक
नई दिल्ली । डेस्क: एप्पल की प्रमुख भारतीय सप्लायर कंपनी टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स इन दिनों एक बड़े साइबर हमले और डेटा लीक की घटना से जूझ रही है. खबरों के अनुसार, एक रैनसमवेयर ग्रुप ने डार्क वेब पर टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के करीब 630 जीबी से अधिक के संवेदनशील डेटा को लीक कर दिया है.
इस भारी-भरकम डेटा में लगभग 2 लाख से ज्यादा फाइलें शामिल हैं, जिनमें एप्पल, टेस्ला, ताइवान सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कंपनी (TSMC) और क्वालकॉम जैसी वैश्विक कंपनियों के बेहद गोपनीय कंपोनेंट डिजाइन और तकनीकी दस्तावेज होने का दावा किया जा रहा है.
इस सुरक्षा चूक के सामने आने के बाद टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने तुरंत कड़े कदम उठाए हैं. कंपनी ने अपने सभी कार्यालयों और मैन्युफैक्चरिंग प्लांटों में आंतरिक सुरक्षा प्रोटोकॉल को बेहद सख्त कर दिया है.
वर्क-फ्रॉम-होम करने वाले या बाहरी नेटवर्क से जुड़ने वाले कर्मचारियों के लिए रिमोट एक्सेस को सीमित कर दिया गया है, ताकि संवेदनशील आंतरिक टूल्स और परचेज ऑर्डर प्रणालियों को सुरक्षित रखा जा सके.
टाटा ने इस पूरे मामले की जांच और फॉरेंसिक ऑडिट के लिए एक वैश्विक कंसलटेंट की सेवाएं ली हैं, साथ ही इसकी आधिकारिक रिपोर्ट भारत सरकार की साइबर सुरक्षा एजेंसी 'सर्ट-इन' (CERT-In) और अपने प्रभावित क्लाइंट्स को सौंप दी है. हालांकि, कंपनी का कहना है कि इस घटना से उनके मौजूदा कामकाज और ऑपरेशन्स पर कोई असर नहीं पड़ा है.
यह लीक ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक स्तर पर आईफोन मैन्युफैक्चरिंग का एक बड़ा केंद्र बनकर उभर रहा है और साल 2026 तक दुनिया के कुल आईफोन्स का 26% हिस्सा भारत में बनने का अनुमान है.
एप्पल की सुरक्षा टीम इस समय टाटा के साथ मिलकर सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करने के लिए काम कर रही है.
डार्क वेब पर लीक हुए दस्तावेजों में 2022 और 2023 के कई ऐसे पेपर मिले हैं जिन पर 'एप्पल सिलिकॉन इंजीनियरिंग ग्रुप', 'टीएसएमसी सीक्रेट' और 'क्वालकॉम कॉन्फिडेंशियल' के वाटरमार्क लगे हैं.
फिलहाल इस मामले में टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स, एप्पल और अन्य संबंधित कंपनियों की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन इस घटना ने टेक जगत में सप्लाई चेन की साइबर सुरक्षा को लेकर बड़ी चिंता पैदा कर दी है.