कालाहांडी से मौसमी पलायन शुरू: हजारों मजदूर छोड़ रहे गांव
भवानीपटना । डेस्क: ओडिशा के कालाहांडी जिले से मौसमी पलायन ने एक बार फिर विकराल रूप धारण कर लिया है. रोजगार की तलाश में हजारों मजदूर जिले को छोड़कर जा रहे हैं. नुआखाई और दशहरा त्योहारों के लिए वापस लौटे कई मजदूर अब कटाई के मौसम के लिए सिर्फ कुछ ही लोगों को पीछे छोड़कर अपने कार्यस्थलों के लिए रवाना हो चुके हैं.
शुरुआती धान की किस्मों और कपास की पहली चरण की चुनाई के बाद पलायन ने फिर से गति पकड़ ली है. धान और कपास की कटाई पूरी होने के बाद यह पूरी तरह से तेज हो जाएगा.
राज्य सरकार ने गोलमुंडा, भवानीपटना, लांजीगढ़, थुआमूल रामपुर और मदनपुर रामपुर ब्लॉकों को 'पलायन-संभावित ब्लॉक' के रूप में चिन्हित किया था और संकटग्रस्त पलायन पर अंकुश लगाने के लिए मनरेगा (MGNREGS) के तहत प्रति वर्ष 300 दिन के काम की मंजूरी दी थी.
हालांकि, इस प्रावधान का उपयोग नहीं किया जा रहा है और इसे सामान्य 100 दिनों तक सीमित कर दिया गया है, जिससे इन क्षेत्रों से बाहर की ओर पलायन की आशंका और बढ़ गई है.
अकेले गोलमुंडा ब्लॉक में, मंझारी, नकटिकानी, उदेसरंग, बंदिता, रेंगामपारी, धामनपुर, खालियापाली, तपनियां, नुगांव, उचला और गंडामेर जैसे गांवों में भारी पलायन देखा जा रहा है.
ब्लॉक अध्यक्ष बिंदु महानंदा ने दावा किया है कि इस सीजन में करीब 20,000 लोग पहले ही बाहर जा चुके होंगे, जो मुख्य रूप से सूरत, राजकोट, मुंबई, आंध्र प्रदेश और छत्तीसगढ़ का रुख कर रहे हैं. उन्होंने कहा, "लोग पलायन करते हैं क्योंकि वे अधिक कमाते हैं और उन्हें नियमित काम मिलता है जो यहां उपलब्ध नहीं है."
इन स्थानों के लिए भरी हुई बसें अब आम नजारा हैं. गोलमुंडा से होते हुए हैदराबाद के लिए तीन, रायपुर के लिए चार, और विजयवाड़ा तथा गुंटूर के लिए एक-एक बस चलती है. इन यात्री वाहनों को स्थानीय रूप से 'ददन बसें' कहा जाता है क्योंकि ये प्रवासी मजदूरों को ले जाती हैं.
कालाहांडी ओडिशा के सबसे अधिक पलायन-संभावित जिलों में से एक बना हुआ है, लेकिन प्रशासन की निगरानी अभी भी वांछनीय स्तर से काफी दूर है. जिले में पंजीकृत 10 श्रम ठेकेदारों में से केवल तीन ने इस साल अपने लाइसेंस का नवीनीकरण कराया है. इन तीनों के पास कुल मिलाकर 2,000 प्रवासी मजदूरों का रिकॉर्ड है. अधिकांश मजदूरों को अंजीकृत बिचौलियों द्वारा सूचीबद्ध किया जाता है जो स्थानीय अधिकारियों की नजरों से बचकर काम करते हैं.
पलायन ट्रैकिंग तंत्र भी कमजोर है. गैर-सरकारी अनुमान बताते हैं कि कोविड महामारी के दौरान दर्ज किए गए 45,000 मजदूरों की तुलना में यह संख्या 60,000 के आसपास हो सकती है.
श्रम विभाग में कर्मचारियों की भारी कमी ने भी स्थिति को बिगड़ने से नहीं रोका है. उप श्रम आयुक्त का पद लंबे समय से खाली है, जबकि 14 सहायक श्रम अधिकारी पदों में से 10 को भरा जाना बाकी है.
जिला श्रम अधिकारी रंजीता नाइक ने स्वीकार किया कि प्रवासी मजदूर अपने गंतव्य या नियोक्ता की जानकारी देने में आनाकानी करते हैं. उन्होंने कहा, "अपर्याप्त कर्मचारियों के बावजूद, हम जागरूकता पैदा करने और जब शोषण के मामले सामने आते हैं तो कार्रवाई करने के लिए ब्लॉक प्रशासन और स्वयंसेवी संगठनों से सहायता ले रहे हैं." (Symbolic Photo)