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सक्ती: पूर्णिमा हत्याकांड- सुपारी देकर प्रेमी ने कराई हत्या

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01 जुल. 2026, 02:17 PM 3 मिनट में पढ़ें 3

पूर्णिमा चौहान
पूर्णिमा चौहान

सक्ती । संवाददाता: सक्ती जिले में हुए सनसनीखेज पूर्णिमा चौहान हत्याकांड की गुत्थी को सुलझाते हुए पुलिस ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है. इस पूरे मामले की कड़ियां एक जटिल प्रेम प्रसंग से जुड़ी हुई हैं, जिसके चलते प्रेमिका को रास्ते से हटाने के लिए 4 लाख रुपये की भारी-भरकम सुपारी दी गई थी. पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए इस खूनी साजिश का पर्दाफाश किया और मुख्य योजनाकारों समेत कुल 9 आरोपियों को तीन अलग-अलग राज्यों झारखंड, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ से धर दबोचा है. 


पकड़े गए अपराधियों के पास से कत्ल में इस्तेमाल हथियार, जिंदा कारतूस, गाड़ियां और नगद रकम भी जब्त की गई है.

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जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि मृतका पूर्णिमा चौहान का रायगढ़ निवासी मुरलीशंकर चौहान के साथ प्रेम संबंध था. इस रिश्ते को लेकर मुरलीशंकर का अपनी पत्नी चम्पा चौहान के साथ अक्सर झगड़ा होता रहता था. पारिवारिक विवाद बढ़ने पर मुरलीशंकर ने पूर्णिमा से किनारा कर लिया, लेकिन पूर्णिमा लगातार उस पर विवाह करने का दबाव बना रही थी. 


इसी रोज-रोज के तनाव से मुक्ति पाने के लिए मुरलीशंकर और उसकी पत्नी चम्पा ने मिलकर पूर्णिमा को हमेशा के लिए खामोश करने की खौफनाक साजिश रची. उन्होंने राजेंद्र महंत नाम के शख्स से संपर्क साधकर हत्या के लिए 4 लाख रुपये का सौदा तय कर लिया.


सुपारी मिलने के बाद राजेंद्र महंत ने अपने गिरोह के साथ मिलकर मर्डर की पूरी रूपरेखा तैयार की. तय योजना के मुताबिक, शूटर गौरीशंकर सिदार और सुनील महंत मोटरसाइकिल पर सवार होकर ग्राम जोंगरा पहुंचे. वहां घर के बाहर खड़ी पूर्णिमा पर गौरीशंकर ने पिस्तौल से ताबड़तोड़ तीन गोलियां बरसा दीं, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई. 


इस सनसनीखेज वारदात को अंजाम देने के बाद शूटर वहां से रफूचक्कर हो गए. बाद में साजिशकर्ताओं ने वादे के मुताबिक सुपारी की रकम में से 2 लाख रुपये आरोपियों तक पहुंचा दिए थे.


26 जून को हुई इस अंधी हत्या की गुत्थी को सुलझाना पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती थी. मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस महानिरीक्षक रामगोपाल गर्ग और पुलिस अधीक्षक प्रफुल्ल ठाकुर के मार्गदर्शन में एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) का गठन किया गया. 


इस विशेष टीम ने लगातार चार दिनों तक दिन-रात एक करके मोबाइल टावर डंप, कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (CDR), सीसीटीवी फुटेज और अत्याधुनिक तकनीकी साक्ष्यों का बारीकी से विश्लेषण किया, जिससे पुलिस का शक मुरलीशंकर और उसके करीबियों पर गहरा गया.


तकनीकी कड़ियों को जोड़ते हुए पुलिस ने आरोपियों की घेराबंदी शुरू की. पुलिस की टीमों ने दबिश देकर राजेंद्र महंत को जमशेदपुर (झारखंड) से और मुख्य शूटर गौरीशंकर सिदार व सुनील महंत को पुणे (महाराष्ट्र) से गिरफ्तार किया. 


इसके बाद बची हुई कड़ियों को जोड़ते हुए छत्तीसगढ़ के विभिन्न इलाकों से बाकी 6 मददगारों को भी उठा लिया गया. कड़ाई से पूछताछ करने पर सभी नौ आरोपियों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है. 


पुलिस ने उनके पास से एक पिस्तौल, चार जिंदा कारतूस, वारदात में प्रयुक्त बाइक, मोबाइल फोन, बैंक पासबुक और सुपारी के बचे हुए पैसे बरामद कर लिए हैं, जिसके बाद सभी को अदालत में पेश किया जा रहा है.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP