अब रोबोट करेगा गर्भ धारण ! खर्च 12 लाख रुपये
नई दिल्ली । डेस्क: मानव गर्भधारण की प्रक्रिया में क्रांतिकारी बदलाव लाने वाला दावा चीनी वैज्ञानिकों ने किया है. उनके अनुसार, एक ऐसा ह्यूमनॉइड रोबोट तैयार किया जा रहा है, जो माँ की तरह गर्भ में भ्रूण को धारण करने और समय आने पर शिशु को जन्म देने में सक्षम होगा. इस रोबोट को अगले साल बाजार में लाने की योजना है, जिसकी कीमत लगभग 10,000 पाउंड (भारतीय मुद्रा में करीब 12 लाख रुपये) हो सकती है.
प्रौद्योगिकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के निरंतर विकास ने मानव जीवन को बदल दिया है. रोबोटिक्स के उपयोग को लेकर पहले से ही बहस छिड़ी हुई है, और अब चीनी वैज्ञानिकों का यह नया दावा चिकित्सा जगत में तहलका मचा रहा है. चीनी कंपनी 'काइवा टेक्नोलॉजी' के वैज्ञानिक झ्यांग किफेंग ने 'द टेलीग्राफ' को बताया, "रोबोट के गर्भ में भ्रूण को स्थापित करने की प्रक्रिया बाकी है. इसके बाद, मानव और रोबोट के आपसी निर्णय से भ्रूण रोबोट के अंदर विकसित होगा."
कृत्रिम गर्भ और भ्रूण का विकास
वैज्ञानिकों का कहना है कि पहले समय से पहले जन्मे मेमनों को जीवित रखने के लिए कृत्रिम 'बायो बैग' का उपयोग किया जाता था. इसी अवधारणा से प्रेरित होकर यह रोबोट बनाया गया है. गर्भावस्था के नौ महीनों तक भ्रूण रोबोट के कृत्रिम गर्भ में विकसित होगा. इसके लिए रोबोट में कृत्रिम एमनियोटिक द्रव (amniotic fluid) होगा, और भ्रूण की जरूरतों को पूरा करने के लिए बाहरी रूप से पोषक तत्व रोबोट में पहुंचाए जाएंगे.
काइवा टेक्नोलॉजी ने बताया कि यह प्रोजेक्ट अपने अंतिम चरण में है. अगले साल से यह रोबोट बाजार में उपलब्ध होगा, जिसकी अनुमानित कीमत 10,000 पाउंड (लगभग 12 लाख रुपये) होगी. हालांकि, भ्रूण निर्माण, उसे रोबोट में स्थापित करने या शिशु के जन्म की प्रक्रिया के बारे में कंपनी ने अभी विस्तृत जानकारी साझा नहीं की है.
विवाद और संभावनाएँ
इस खबर के सामने आने के बाद विश्व भर में इस तकनीक को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएँ देखने को मिल रही हैं. कंपनी ने सरकारी स्तर पर इस तकनीक के व्यावहारिक उपयोग के लिए अनुमोदन पर चर्चा शुरू कर दी है. कंपनी का दावा है कि चीन में बांझपन की दर 2007 में 11.9% थी, जो 2020 में बढ़कर 18% हो गई. ऐसे में यह रोबोट बांझपन से जूझ रहे दंपतियों के लिए वरदान साबित हो सकता है. साथ ही, गर्भावस्था के दौरान होने वाली जटिलताओं और प्रसव के समय माँ की मृत्यु जैसी समस्याओं को भी यह तकनीक कम कर सकती है.
हालांकि, गर्भधारण से संबंधित विभिन्न देशों में अलग-अलग कानून हैं. ऐसे में भविष्य में रोबोट के माध्यम से शिशु जन्म की प्रक्रिया कितनी स्वीकार्य होगी, यह एक बड़ा सवाल है. इस तकनीक ने चिकित्सा, नैतिकता और कानून के क्षेत्र में नए सवाल खड़े किए हैं, जिनका जवाब समय के साथ ही मिलेगा.