शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों से आवारा कुत्तों को हटाए: SC
नई दिल्ली । डेस्क: सुप्रीम कोर्ट ने शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों से आवारा कुत्तों को हटाने का निर्देश दिया है. सार्वजनिक स्वास्थ्य और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार 7 नवंबर, 2025 को एक बड़ा निर्देश जारी करते हुए सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों, सार्वजनिक खेल परिसरों, बस डिपो और रेलवे स्टेशनों के परिसर से आवारा कुत्तों को हटाने का आदेश दिया है.
जस्टिस विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एन.वी. अंजारिया की पीठ ने स्पष्ट किया कि इन स्थानों से पकड़े गए आवारा कुत्तों को नसबंदी के बाद वापस उसी क्षेत्र में नहीं छोड़ा जाएगा, क्योंकि ऐसा करना परिसरों को सुरक्षित करने के उद्देश्य को विफल कर देगा. कोर्ट ने यह भी अनिवार्य किया कि इन सार्वजनिक स्थानों पर मौजूद सभी आवारा कुत्तों को तत्काल पकड़कर, 'पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960' के तहत बने 'पशु जन्म नियंत्रण (एबीसी) नियम, 2023' के अनुसार, नसबंदी और टीकाकरण किया जाए.
न्यायालय ने राज्यों को आठ सप्ताह के भीतर सभी सरकारी और निजी शैक्षणिक और चिकित्सा संस्थानों तथा परिवहन केंद्रों की पर्याप्त फेंसिंग सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया ताकि आवारा कुत्तों का प्रवेश रोका जा सके.
इसके अतिरिक्त, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों से आवारा मवेशियों और अन्य जानवरों को हटाकर निर्दिष्ट आश्रयों में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया गया है. कोर्ट ने पहले सरकारी कर्मचारियों द्वारा कार्यालय परिसरों में आवारा कुत्तों को खाना खिलाने पर भी गंभीर रुख अपनाया था और अगस्त में स्थानीय निकायों को हर वार्ड में निर्धारित फ़ीडिंग ज़ोन स्थापित करने का निर्देश दिया था.
यह स्वतः संज्ञान कार्यवाही आवारा कुत्तों के प्रबंधन के लिए एक राष्ट्रीय ढांचा तैयार करने और मौजूदा नियमों के अनुपालन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से चल रही है.