एंटीबायोटिक्स पर रेड लाइन अनिवार्य करने की मांग
नई दिल्ली । डेस्क: भारतीय फार्मास्युटिकल एसोसिएशन की कम्युनिटी फार्मेसी डिवीजन (IPA-CPD) ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स रूल्स में संशोधन कर एंटीबायोटिक्स की पैकिंग पर रेड लाइन मार्किंग को अनिवार्य बनाने की मांग की है. यह मांग मौजूदा शेड्यूल H या H1 चेतावनी के अलावा रेड लाइन को जोड़ने की है, ताकि मरीजों को सेल्फ-मेडिकेशन से रोका जा सके.
IPA-CPD के वाइस प्रेसिडेंट और चेयरपर्सन राज वैद्य ने मंत्रालय के सचिव को पत्र लिखकर कहा कि स्वास्थ्य मंत्रालय की 'रेड लाइन कैंपेन' सराहनीय है, जो सोशल मीडिया पर एंटीबायोटिक्स के दुरुपयोग के खिलाफ जागरूकता फैला रही है.
लेकिन वर्तमान में एंटीबायोटिक्स की पैकिंग पर रेड लाइन नहीं होती, क्योंकि कुछ साल पहले इसकी अनिवार्यता हटा दी गई थी. इससे कैंपेन और नियमों में असंगति पैदा हो रही है.
राज वैद्य ने सुझाव दिया कि जब तक रेड लाइन को कानूनी रूप से अनिवार्य नहीं किया जाता, तब तक कैंपेन को संशोधित या अस्थायी रूप से रोका जाए.
उन्होंने कहा कि रेड लाइन जैसा स्पष्ट विजुअल इंडिकेटर एंटीबायोटिक्स की प्रिस्क्रिप्शन-ओनली स्थिति को मजबूत करेगा और एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) से लड़ने में मदद करेगा.
यह मांग उस समय और प्रासंगिक हो गई है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हालिया 'मन की बात' में ICMR रिपोर्ट का हवाला देते हुए एंटीबायोटिक्स के अंधाधुंध उपयोग की चेतावनी दी. पीएम ने कहा कि एक गोली से हर बीमारी ठीक होने की धारणा गलत है और एंटीबायोटिक्स केवल डॉक्टर की सलाह पर लें.