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रायपुर: मांस के विज्ञापनों पर लगे रोक- PETA इंडिया

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29 सित. 2026, 04:04 AM 4 मिनट में पढ़ें 2

डॉ. किरण आहूजा- PETA
डॉ. किरण आहूजा- PETA

रायपुर । संवाददाता: पशु अधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था PETA इंडिया ने देश भर में मांस उत्पादों के विज्ञापनों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की है. इस सिलसिले में संगठन ने केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव को एक पत्र सौंपा है, जिसमें दलील दी गई है कि जिस तरह शराब और तंबाकू जैसी सेहत के लिए हानिकारक वस्तुओं के प्रचार पर सरकार द्वारा विभिन्न पाबंदियां लगाई जाती हैं, ठीक उसी तर्ज पर मांस के विज्ञापनों पर भी रोक लगनी चाहिए.


PETA इंडिया की वेगन एंड कॉरपोरेट प्रोजेक्ट्स की वरिष्ठ प्रबंधक डॉ. किरण आहूजा ने संस्था का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि उनकी तरफ से लोगों के मांस खाने पर किसी प्रकार की रोक की बात नहीं कही जा रही है. 

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संगठन का एकमात्र उद्देश्य इसके व्यावसायिक प्रचार और विज्ञापनों को नियंत्रित करना है. उन्होंने जोर देकर कहा कि मौजूदा दौर में मांस उद्योग अपनी उत्पादन प्रक्रिया, उससे होने वाले पर्यावरणीय नुकसान और पशुओं के प्रति होने वाली क्रूरता को विज्ञापनों के पीछे छिपाकर रखता है.


इसके साथ ही संगठन ने इस उद्योग से जुड़े पर्यावरणीय खतरों को लेकर संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) के आंकड़ों को भी रेखांकित किया है. 


इन आंकड़ों के अनुसार, मांस, डेयरी, अंडा और चमड़ा उद्योग सहित पशुधन क्षेत्र मानव निर्मित कुल ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में 14.5 फीसदी की बड़ी हिस्सेदारी रखता है. 


PETA का मानना है कि यदि यह उद्योग निष्पक्षता और पूर्ण पारदर्शिता का दावा करता है, तो उसे अपने विज्ञापनों में पशु कल्याण और पर्यावरण पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों की पूरी जानकारी भी उपभोक्ताओं के समक्ष स्पष्ट रूप से रखनी चाहिए.


PETA- People for the Ethical Treatment of Animals (पीपल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स)-


PETA पशु अधिकारों (Animal Rights) की सुरक्षा और उनके प्रति हो रहे अत्याचारों को रोकने के लिए काम करने वाली दुनिया की सबसे बड़ी गैर-सरकारी संस्था है. PETA इंडिया इसी वैश्विक संगठन की भारतीय शाखा है, जिसकी स्थापना वर्ष 2000 में मुंबई में की गई थी. यह संस्था भारत के कानूनों और सामाजिक संदर्भों के आधार पर पशुओं के अधिकारों की रक्षा करती है.


PETA इंडिया अंतरराष्ट्रीय संस्था PETA (USA) से संबद्ध है. अमेरिका स्थित मुख्य संगठन के अलावा ब्रिटेन, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, नीदरलैंड और एशिया-प्रशांत क्षेत्रों में भी इसकी शाखाएं कार्यरत हैं. ये सभी शाखाएं एक मुख्य सिद्धांत और विचार पर मिलकर काम करती हैं.


PETA का मूल मंत्र है: "पशु हमारे खाने, पहनने, प्रयोगशालाओं में परीक्षण करने या मनोरंजन के लिए इस्तेमाल करने की वस्तु नहीं हैं". संस्था मुख्य रूप से 4 प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करती है जहाँ पशुओं पर सबसे अधिक हिंसा होती है:


1- भोजन: मांस, अंडा और डेयरी उद्योग के स्थान पर वेगन (शाकाहारी) जीवनशैली को बढ़ावा देना.


2- फैशन व कपडे: चमड़ा (leather), ऊन, सिल्क और फर के उत्पादन में होने वाली क्रूरता को रोकना.


3- प्रयोगशालाएं: कॉस्मेटिक्स, दवाओं व वैज्ञानिक प्रयोगों के लिए जानवरों पर परीक्षण करने का विरोध करना.


4- मनोरंजन: सर्कस, चिड़ियाघर, घोड़ों की दौड़ और पशु युद्ध (जैसे जल्लीकट्टू आदि) में जानवरों के इस्तेमाल को रोकना.


PETA अपने उद्देश्यों को पूरा करने के लिए विभिन्न तरीकों का उपयोग करता है:


1- अंडरकवर इंवेस्टिगेशन (गुप्त जांच): PETA के प्रतिनिधि गुप्त रूप से कत्लखानों, प्रयोगशालाओं और फार्मों में जाकर तस्वीरें और वीडियो बनाकर वहां हो रही क्रूरता का पर्दाफाश करते हैं.


2- सार्वजनिक अभियान व एडवोकेसी: सोशल मीडिया, विज्ञापनों और अभियानों के माध्यम से आम जनता को जागरूक करना.


3- कानूनी व सरकारी पैरवी: सरकारों को पत्र लिखकर, याचिकाओं और अदालती मुकदमों के जरिए जानवरों के हित में कड़े कानून बनवाना (जैसे- कॉस्मेटिक्स के लिए जानवरों पर टेस्टिंग बैन कराना).


4- सेलिब्रिटी पार्टनरशिप: बॉलीवुड और खेल जगत की प्रसिद्ध हस्तियों के साथ मिलकर जागरूकता अभियान चलाना.


5- पशु बचाव अभियान: संकट में फंसे, घायल या अवैध रूप से ले जाए जा रहे जानवरों को रेस्क्यू करना.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP