रायपुर: 6 माह के बिल्ले ने निगला 10 सेमी लंबा पेन, एंडोस्कोपी से बची जान
रायपुर: 6 माह के बिल्ले ने निकला 10 सेमी लंबा पेन, एंडोस्कोपी से बची जान
रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के अवंती विहार स्थित एक चिकित्सालय में डॉक्टरों ने एंडोस्कोपी तकनीक का प्रयोग कर छह महीने के बिल्ले के पेट से 10 सेंटीमीटर लंबा पेन बाहर निकाल लिया. महज दो किलोग्राम वजन के इस बिल्ले ने खेल-खेल में पूरा पेन निगल लिया था. पेट में पेन चले जाने की वजह से वह तीन दिनों तक केवल लिक्विड डाइट पर रहा.
चिकित्सकों ने एंडोस्कोप की मदद से पेन पर मजबूत ग्रिप बनाकर उसे मुंह के रास्ते बिना किसी शल्य चिकित्सा के सुरक्षित बाहर निकाला. वर्तमान में बिल्ले की हालत स्थिर बताई जा रही है.
इस नटखट बिल्ले का नाम 'तामा' है, जिसे अभनपुर के रहने वाले मयंक त्रिपाठी ने सड़क किनारे से लावारिस हालत में गोद लिया था. जापानी भाषा में तामा का अर्थ 'मोती' होता है.
मयंक के अनुसार, तामा घर में खेलते समय अचानक पेन का आधा हिस्सा मुंह में दबा बैठा. जब उन्होंने इसे बाहर निकालने की कोशिश की, तो घबराहट में बिल्ले ने पूरा पेन ही निगल लिया. इसके बाद वे इलाज के लिए भटकते हुए रायपुर के अवंती विहार स्थित अस्पताल पहुंचे.
अस्पताल के डॉक्टर पद्म जैन ने बताया कि इतने छोटे और कम वजनी बिल्ले द्वारा 10 सेंटीमीटर लंबा पेन निगला जाना बेहद दुर्लभ और अविश्वसनीय मामला है. शुरुआत में जब एक्सरे किया गया, तब केवल धातु का हिस्सा दिखाई दे रहा था, जिससे लगा कि केवल पेन की कैप पेट में है.
जोखिम को देखते हुए डॉक्टरों ने ऑपरेशन की पूरी तैयारी बैकअप में रखी थी, लेकिन एंडोस्कोपी के जरिए ही पेन को सफलतापूर्वक निकाल लिया गया.
तीन दिनों तक भोजन न मिल पाने और परेशानी के कारण बिल्ले के शरीर में श्वेत रक्त कोशिकाओं (डब्ल्यूबीसी) का स्तर काफी गिर गया है, जिसे नियंत्रित करने के लिए उसे नियमित रूप से इंजेक्शन दिए जा रहे हैं.
इस इलाज से जुड़ी एक सराहनीय बात यह भी रही कि जैन पर्व के अवसर पर अस्पताल प्रबंधन ने अपनी इलाज फीस खुद न लेकर, उसे कैंसर पीड़ितों के कल्याण में लगी एक संस्था को दान करवा दिया. मयंक ने इलाज की पूरी राशि सीधे उस सामाजिक संस्था को सौंप दी.