रायगढ़: NTPC तिलाईपाली परियोजना के खिलाफ ग्रामीणों का हल्लाबोल
रायगढ़ । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में एनटीपीसी की तिलाईपाली कोयला खनन परियोजना को लेकर पिछले तीन सप्ताह से शांतिपूर्ण धरने पर बैठे आठ गांवों के सैकड़ों ग्रामीणों ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है. अपनी मांगों की अनदेखी से नाराज ग्रामीणों ने जिला मुख्यालय पहुंचकर कलेक्टर के नाम एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा, जिसमें उन्होंने स्पष्ट किया है कि यदि आगामी 15 दिनों के भीतर उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो वे परियोजना के समस्त कार्यों और कोयला उत्खनन को पूरी तरह ठप कर देंगे. घरघोड़ा ब्लॉक के तिलाईपाली अपेरा मैदान में ग्रामीण 25 जनवरी से हड़ताल पर हैं.
ग्रामीणों का आरोप है कि वे 25 जनवरी से लगातार आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन प्रबंधन की ओर से अब तक कोई सार्थक पहल नहीं हुई है. इस मामले में जिला प्रशासन की ओर से अपर कलेक्टर ने मोर्चा संभालते हुए ग्रामीणों को भरोसा दिलाया है कि एक विशेष टीम गठित कर सभी बिंदुओं की बारीकी से जांच की जाएगी और जल्द ही उचित निराकरण निकाला जाएगा.
ग्रामीणों द्वारा सौंपे गए 10 सूत्रीय मांग पत्र में सबसे प्रमुख मुद्दा संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन का है. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह क्षेत्र संविधान की पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत आता है, जहां ग्राम सभा की अनुमति के बिना भूमि अधिग्रहण अवैध है.
उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2009 की अधिसूचना के माध्यम से किसानों को बिना सूचना दिए गलत तरीके से जमीनें ली गईं, जिसे निरस्त कर वर्ष 2015 की नई आवंटन तिथि के आधार पर मुआवजे का निर्धारण होना चाहिए.
साथ ही, ग्रामीणों ने 10 फरवरी को आयोजित महाग्रामसभा के प्रस्तावों को लागू करने और कोल बेयरिंग एक्ट की विसंगतियों को दूर कर नए भू-अधिजन अधिनियम 2013 के तहत मुआवजा राशि देने की मांग उठाई है. आदिवासियों के जल, जंगल और जमीन पर हक सुनिश्चित करने के लिए 'पेसा कानून' को कड़ाई से लागू करने की बात भी प्रमुखता से कही गई है.
ज्ञापन में विस्थापन और रोजगार से जुड़ी विसंगतियों पर भी कड़ा प्रहार किया गया है. ग्रामीणों की मांग है कि जिन प्रभावितों को मकान का मुआवजा नहीं मिला है, उन्हें तत्काल भुगतान किया जाए और तेंदूपत्ता कार्डधारियों को पूर्व में किए गए वादे के अनुसार पांच-पांच लाख रुपये की सहायता राशि दी जाए.
पुनर्वास नीति के लिए कट-ऑफ डेट में संशोधन कर इसे अगस्त 2015 तय करने और पूर्वजों के समय से काबिज भूमि पर खेती कर रहे किसानों को वन अधिकार पट्टे के समान मुआवजा देने की मांग की गई है.
इसके अतिरिक्त, ग्रामीणों ने एनटीपीसी और संबंधित ठेका कंपनियों में स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार देने और बाहरी कर्मियों को हटाने की मांग रखी है.
रोजगार न मिल पाने की स्थिति में प्रभावित परिवार के प्रत्येक वयस्क सदस्य को 15 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने का प्रस्ताव भी रखा गया है. ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अब केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा, बल्कि धरातल पर ठोस कार्रवाई आवश्यक है.