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यू्क्रेन युद्ध के बाद पहली बार दिल्ली आयेंगे पुतिन

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03 दिस. 2025, 06:23 AM 3 मिनट में पढ़ें 1

पुतिन
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नई दिल्ली । डेस्क: राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के यू्क्रेन युद्ध के बाद पहली बार भारत आने के साथ, नई दिल्ली एक नाजुक राजनयिक संतुलन साध रही है. एक तरफ अमेरिका का दबाव है, तो दूसरी तरफ मॉस्को पर अपनी लंबी-खड़ी निर्भरता को बनाए रखना. पुतिन 4-5 दिसंबर 2025 को 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए नई दिल्ली पहुंच रहे हैं, जो लगभग चार वर्षों में उनकी पहली यात्रा है. 


यह रूस के यू्क्रेन पर आक्रमण के बाद भारत द्वारा आयोजित सबसे राजनीतिक रूप से आवेशित मुलाकातों में से एक है. वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे और भारत के राष्ट्रपति द्वारा आयोजित राजकीय भोज में शामिल होंगे.


ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) की एक रिपोर्ट के अनुसार, रक्षा संबंध महत्वपूर्ण बने रहेंगे, क्योंकि भारत के लगभग दो-तिहाई सैन्य प्लेटफॉर्म रूसी मूल के हैं, जिससे देश की सैन्य तैयारी रूस से मिलने वाले स्पेयर पार्ट्स और अपग्रेड पर टिकी है. व्यापार अब भी असंतुलित है; भारत सालाना रूस को बमुश्किल $5 बिलियन का निर्यात करता है, जबकि ऊर्जा के कारण आयात लगभग $64 बिलियन तक पहुंच गया है.


रक्षा क्षेत्र में, भारतीय अधिकारी अतिरिक्त S-400 ट्रायम्फ सिस्टम की त्वरित डिलीवरी और रूस से प्राप्त प्लेटफॉर्म के लिए स्पेयर पार्ट्स और अपग्रेड पर अधिक स्पष्टता चाहेंगे. 


ऊर्जा के क्षेत्र में, नई दिल्ली के गैर-अमेरिकी प्रतिबंधित रूसी फर्मों (जैसे लुकोइल और रोसनेफ्ट) के साथ दीर्घकालिक कच्चे तेल के अनुबंध, रूसी ऊर्जा परियोजनाओं में भारतीय निवेश को पुनर्जीवित करने और कुडनकुलम से आगे परमाणु सहयोग बढ़ाने की उम्मीद है.


GTRI की रिपोर्ट साझेदारी के लिए दो संभावित परिदृश्य बताती है: 


प्रबंधित उन्नयन (Managed Upgrade): सबसे संभावित परिणाम मौजूदा संबंधों को सावधानीपूर्वक मजबूत करना है. भारत रक्षा डिलीवरी, रखरखाव अनुबंध और प्रौद्योगिकी उन्नयन पर निश्चित समय सीमा हासिल कर सकता है. रूस, बदले में, दीर्घकालिक ऊर्जा प्रतिबद्धताओं जिसमें LNG क्षेत्रों में भारतीय इक्विटी का पुनरुद्धार, बहु-वर्षीय कच्चे तेल आपूर्ति समझौते और त्वरित परमाणु संयंत्र निर्माण शामिल है को सुनिश्चित कर सकता है. दोनों देश दिर्हम का उपयोग करके एक नए भुगतान ढांचे को औपचारिक रूप दे सकते हैं या रूस के SPFS सिस्टम को भारत के RuPay नेटवर्क के साथ एकीकृत कर सकते हैं.


रणनीतिक गहनता (Strategic Deepening): अधिक महत्वाकांक्षी विकल्प एक गहरे पुनर्संरेखण को चिह्नित करेगा. GTRI के अनुसार, दोनों देश रक्षा उपकरणों के संयुक्त उत्पादन, आर्कटिक LNG 2 या वोस्तोक जैसी रूसी तेल और गैस परियोजनाओं में भारतीय निवेश, और मौजूदा रिएक्टरों से परे परमाणु सहयोग के विस्तार पर सहमत हो सकते हैं.


रूस के साथ भारत का मौजूदा जुड़ाव तीन स्तंभों पर टिका है-ऊर्जा, रक्षा और कूटनीति. ऊर्जा अब रिश्ते पर हावी है. रूस भारत का सबसे बड़ा कच्चे तेल का आपूर्तिकर्ता बन गया है, जो कुल तेल आयात का 30-35% तक है. रक्षा दूसरा स्तंभ है, जिसमें रूस भारत के फ्रंटलाइन प्लेटफॉर्म के विशाल बहुमत की आपूर्ति और सर्विसिंग जारी रखे हुए है.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP