रायपुर के 'ऑक्सीजन जोन' में बनेगा थाना- HC
बिलासपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने राजधानी रायपुर के एक 'ऑक्सीजन जोन' में पुलिस स्टेशन के निर्माण की अनुमति दे दी है. अदालत ने जन सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए यह फैसला सुनाया. इसके साथ ही, हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को सख्त निर्देश दिया है कि वह निर्माण के दौरान काटे जाने वाले 36 पेड़ों के बदले किए जाने वाले पौधारोपण और उनकी सुरक्षा की विस्तृत योजना पेश करे.
यह आदेश जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यैस की एकल पीठ ने कुछ स्थानीय नागरिकों द्वारा दायर उस याचिका पर सुनवाई करते हुए जारी किया, जिसमें ऑक्सीजन जोन में थाने के निर्माण को रोकने की मांग की गई थी.
अदालत ने माना कि सार्वजनिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस स्टेशन का निर्माण बेहद जरूरी है. हालांकि, कोर्ट ने यह साफ कर दिया कि निर्माण कार्य सख्त सुरक्षा उपायों और वन विभाग की सलाह पर तैयार की गई वनीकरण योजना के तहत ही आगे बढ़ेगा.
न्यायालय ने राज्य सरकार से पूछा है कि वह 36 पेड़ों की कटाई की भरपाई के लिए प्रतिपूरक वनीकरण (कम्पेन्सेटरी एफॉरेस्टेशन) के तहत किस तरह पौधारोपण करेगी.
कोर्ट ने आदेश दिया कि वन विभाग के परामर्श से ऐसी योजना बनाई जाए जिससे निर्माण कार्य के दौरान भी नए पौधों को कोई नुकसान न पहुंचे और वे सुरक्षित रहें. आगामी मानसून सीजन को देखते हुए अदालत ने प्राधिकारियों को तुरंत पौधारोपण गतिविधियां शुरू करने के निर्देश दिए हैं.
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकील ने दलील दी थी कि राज्य सरकार द्वारा घोषित ऑक्सीजन जोन में निर्माण कार्य होने से पर्यावरण को नुकसान पहुंचेगा और पेड़ नष्ट हो जाएंगे. इसके जवाब में सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि रायपुर शहर के मास्टर प्लान में यह जमीन 'ग्रीन लैंड' के रूप में अधिसूचित नहीं है, बल्कि सरकार द्वारा विकसित एक ऑक्सीजन जोन है.
सरकारी वकील ने स्पष्ट किया कि इस परियोजना से केवल 36 पेड़ प्रभावित हो रहे हैं, जिसके एवज में नियमानुसार 'हरियाली कोष' में ₹50,000 की राशि पहले ही जमा की जा चुकी है. हाई कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद निर्माण कार्य जारी रखने की अनुमति देते हुए मामले की अगली सुनवाई 9 जुलाई तय की है.