पीरियड प्राइवेसी पर सुप्रीम कोर्ट में गुहार
नई दिल्ली । डेस्क: सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर महिलाओं और लड़कियों के मासिक धर्म और स्त्री रोग संबंधी स्वास्थ्य के संदर्भ में विभिन्न संस्थागत सेटिंग्स में हो रहे "गरिमा, निजता और शारीरिक स्वायत्तता के व्यापक उल्लंघन" को रोकने के लिए दिशानिर्देश निर्धारित करने का आग्रह किया है.
एसोसिएशन ने महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक में हुई हालिया घटना का हवाला दिया, जहां तीन महिला सफाई कर्मचारियों को अपने मासिक धर्म की छुट्टी के दावे को सही ठहराने के लिए अपने सैनिटरी नैपकिन की तस्वीरें पेश करने के लिए मजबूर किया गया था.
याचिका में कहा गया है कि सुपरवाइजरों ने कर्मचारियों को मासिक धर्म के कारण अस्वस्थ होने के बावजूद तेजी से काम करने का निर्देश दिया और बाद में "सैनिटरी पैड की तस्वीरें भेजने" के लिए कहकर उनसे फोटोग्राफिक प्रमाण की मांग की. कर्मचारियों को शौचालय में तस्वीरें लेने के लिए मजबूर किया गया और उन्हें मौखिक रूप से गाली दी गई और अपमानित किया गया.
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने याचिका में कार्यस्थलों पर महिलाओं के प्रति "गहरे पितृसत्तात्मक दृष्टिकोण और पूर्वाग्रहों" की सुप्रीम कोर्ट की पिछली मान्यता का भी उल्लेख किया है, जिसमें सुरक्षित कामकाजी परिस्थितियों को बनाए रखने को प्रत्येक कामकाजी पेशेवर के लिए अवसर की समानता प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण माना गया था.