पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन पर मंगलवार को होगी सुनवाई
नई दिल्ली | डेस्क: पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को सुनवाई करेगा. पश्चिम बंगाल के देवदत्त माजी और मणि मुंजाल ने इस महीने वक्फ कानून के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के बाद हिंदुओं पर कथित हमलों का हवाला देते हुए राज्य में राष्ट्रपति शासन की मांग की.
अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने याचिका का उल्लेख किया और अनुरोध किया कि इस पर 2021 के विधानसभा चुनावों के बाद पश्चिम बंगाल में हुई हिंसा को लेकर राष्ट्रपति शासन लगाने की लंबित याचिकाओं के साथ सुनवाई की जाए.
न्यायमूर्ति भूषण आर गवई और न्यायमूर्ति एजी मसीह की पीठ ने जैन से पूछा: "आप चाहते हैं कि हम राष्ट्रपति शासन लगाने के लिए एक रिट जारी करें. जैसा कि अभी है, हमें विधायी और कार्यकारी कार्यों में अतिक्रमण करने के लिए दोषी ठहराया जा रहा है."
पीठ की टिप्पणी उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ की 8 अप्रैल के फैसले पर की गई टिप्पणियों की पृष्ठभूमि में आई है, जिसमें राज्य विधेयकों पर राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए तीन महीने की समय सीमा तय की गई थी. धनखड़ ने सुप्रीम कोर्ट को "सुपर पार्लियामेंट" कहा और अनुच्छेद 142 के तहत इसके द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली असाधारण शक्तियों को लोकतांत्रिक ताकतों के खिलाफ "परमाणु मिसाइल" बताया ता.
इसके बाद भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने वक्फ कानून पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों की आलोचना की और कहा कि यह "धार्मिक युद्धों को भड़काने के लिए जिम्मेदार है".
सोमवार को अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन द्वारा 2021 के मामले का हवाला दिए जाने के बाद पीठ ने माजी और मुंजाल की याचिका को सूचीबद्ध करने की अनुमति दे दी. जैन ने कहा, "हम केवल राज्य से संविधान के अनुच्छेद 355 के तहत एक रिपोर्ट चाहते हैं."
माजी और मुंजाल ने 2022 से अप्रैल 2025 तक राज्य में हिंदुओं के खिलाफ कथित हिंसा की ओर इशारा किया. उन्होंने हिंसा, विशेष रूप से मुर्शिदाबाद में हुई हिंसा की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश के नेतृत्व में तीन सदस्यीय समिति के गठन की मांग की. याचिका में हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में केंद्रीय बलों की तैनाती करने और राज्य सरकार को नागरिकों के जीवन, स्वतंत्रता और सम्मान को सुनिश्चित करने का निर्देश देने की मांग की गई है.
याचिका में आरोप लगाया गया है कि मुर्शिदाबाद हिंसा के दौरान हिंदुओं को निशाना बनाया गया. इसमें 6 अप्रैल को कोलकाता में रामनवमी पर हुई हिंसा और बीरभूम में होली समारोह के दौरान पत्थरबाजी और अन्य घटनाओं को भी उजागर किया गया. याचिका में संदेशखली में हुई हिंसा और स्थानीय सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के पदाधिकारी शाहजहां शेख के खिलाफ यौन उत्पीड़न और जमीन हड़पने के आरोपों का हवाला दिया गया है.