SC में 'कॉकरोच जनता पार्टी' के खिलाफ PIL दर्ज
नई दिल्ली । डेस्क: उच्चतम न्यायालय में एक जनहित याचिका (PIL) दायर कर व्यंग्यात्मक ऑनलाइन संगठन "कॉकरोच जनता पार्टी" (CJP) के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है. एडवोकेट राजा चौधरी द्वारा दायर इस याचिका में आरोप लगाया गया है कि यह संगठन न्यायिक कार्यवाही के दौरान शीर्ष अदालत द्वारा की गई मौखिक टिप्पणियों का गलत इस्तेमाल और व्यावसायिक शोषण कर रहा है.
इसके साथ ही, याचिका में फर्जी डिग्री के सहारे वकालत करने वाले "फर्जी वकीलों" के आरोपों की केंद्रीय जांच ब्यूरो जैसी किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने का भी अनुरोध किया गया है. न्यूज़ एजेंसी एएनआई के अनुसार, याचिका में कहा गया है कि इस तरह की गतिविधियां संवैधानिक कार्यवाही के वस्तुकरण (कमोडिफिकेशन) को बढ़ावा देती हैं और न्यायिक संस्थानों की गरिमा को ठेस पहुंचाती हैं.
याचिकाकर्ता का तर्क है कि अदालती टिप्पणियों को ब्रांडिंग, पब्लिसिटी और डिजिटल मोनेटाइजेशन के टूल में बदला जा रहा है, जो न्यायिक विवादों का एक संगठित व्यावसायिक दुरुपयोग है. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने अभी तक इस मामले पर सुनवाई नहीं की है.
गौरतलब है कि 'कॉकरोच जनता पार्टी' इस महीने की शुरुआत में एक पैरोडी और व्यंग्यात्मक ऑनलाइन राजनीतिक आंदोलन के रूप में उभरी थी, जिसने युवा सोशल मीडिया यूजर्स के बीच तेजी से लोकप्रियता हासिल की. यह संगठन खुद को "भ्रमित, बेरोजगार और भूले हुए नागरिकों के लिए भारत की सबसे ईमानदार राजनीतिक पार्टी" बताता है.
इस आंदोलन की शुरुआत मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत द्वारा एक सुनवाई के दौरान कथित तौर पर की गई टिप्पणियों के बाद हुई, जिसमें याचिका के अनुसार, कथित तौर पर बेरोजगार युवाओं और फर्जी डिग्री वाले कुछ कानूनी सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को "कॉकरोच" और "परजीवी" कहा गया था.
इन टिप्पणियों को लेकर सोशल मीडिया पर भारी आक्रोश देखा गया, हालांकि बाद में सीजेआई ने स्पष्ट किया कि मीडिया के एक हिस्से द्वारा उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया था.
इसके बाद इस आंदोलन ने रफ्तार पकड़ी और कुछ ही दिनों में इसके सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर करीब 20 मिलियन (2 करोड़) फॉलोअर्स हो गए, जिसके इंस्टाग्राम फॉलोअर्स एक समय सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) से भी आगे निकल गए थे.
आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व सदस्य अभिजीत दिपके द्वारा स्थापित इस पार्टी का मुख्य एजेंडा युवाओं की बेरोजगारी और हताशा पर केंद्रित था, जिसके मैनिफेस्टो में "रेज्युमे गैप का जश्न मनाना" जैसी व्यंग्यात्मक बातें शामिल थीं.
राजनीतिक विश्लेषकों और ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, इस आंदोलन की अप्रत्याशित सफलता भारत के जेन-जी (Gen Z) युवाओं में बेरोजगारी और आर्थिक अवसरों की कमी को लेकर बढ़ते गुस्से को दर्शाती है.
अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी की 2023 की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया गया है कि 15 से 25 वर्ष के कॉलेज स्नातकों में बेरोजगारी दर लगभग 40% है. इस बढ़ते जनाधार पर राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह मौजूदा राजनीति और समाज के प्रति युवाओं की गहरी निराशा को उजागर करता है.