फोन टैपिंग निजता का उल्लंघन: हाईकोर्ट ने रद्द किया CBI का आदेश
बिलासपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि टेलीफोन वायरटैपिंग भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत नागरिकों को मिले मौलिक निजता के अधिकार पर एक गंभीर अतिक्रमण है. मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने कहा कि फोन टैपिंग जैसी कार्रवाई के लिए दूरसंचार अधिनियम, 2023 की धारा 20(2) के तहत निर्धारित वैधानिक प्रक्रियाओं का कड़ाई से पालन अनिवार्य है. नियमों का पालन केवल औपचारिक रूप से नहीं, बल्कि पूर्णतः और सख्ती से किया जाना चाहिए.
उच्च न्यायालय ने यह फैसला श्री रावतपुरा सरकार इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च (SRISMR), रायपुर के अध्यक्ष रविशंकर जी महाराज से जुड़े एक मामले की सुनवाई करते हुए सुनाया.
कोर्ट ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा उनके खिलाफ जारी किए गए फोन इंटरसेप्शन आदेश को रद्द कर दिया.
हालांकि, अदालत ने आरोपी के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी (FIR) और चार्जशीट को निरस्त करने से इनकार कर दिया है. यह पूरा मामला स्वास्थ्य मंत्रालय और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) के अधिकारियों की मिलीभगत से अनुकूल निरीक्षण रिपोर्ट हासिल करने के कथित भ्रष्टाचार से जुड़ा है, जिसमें साक्ष्य के तौर पर मुख्य रूप से इंटरसेप्ट की गई फोन कॉल का इस्तेमाल किया जा रहा था.
मामले की सुनवाई के दौरान गृह मंत्रालय (MHA) द्वारा जारी इंटरसेप्शन पुष्टि आदेश में एक बड़ी प्रक्रियात्मक चूक सामने आई. दूरसंचार विभाग के सचिव द्वारा दाखिल हलफनामे के अनुसार, गृह मंत्रालय का 4 जुलाई 2025 का पुष्टि आदेश 1 जून से 31 जुलाई 2025 की अवधि को कवर करता था, यानी मूल अनुमति मिलने से लगभग एक महीने पहले से ही इंटरसेप्शन को प्रभावी दिखा दिया गया था.
याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि कोई भी पुष्टि आदेश पिछली तारीख से अधिकार क्षेत्र या वैधानिक शक्ति उत्पन्न नहीं कर सकता. हाईकोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार करते हुए माना कि नियम 3(3)(b) के तहत पुष्टि केवल पुष्टि करने के स्वभाव की होती है, यह भूतलक्षी (retrospective) प्रभाव से अधिकार क्षेत्र का निर्माण नहीं कर सकती.
अदालत ने प्रक्रियात्मक खामी के कारण सीबीआई के इंटरसेप्शन प्राधिकरण, गृह मंत्रालय के पुष्टि आदेश और समीक्षा समिति की कार्यवाही को पूरी तरह से रद्द कर दिया. साथ ही, इंटरसेप्ट की गई सभी सामग्रियों को नष्ट करने का निर्देश जारी किया.
चूंकि याचिकाकर्ता के वकील ने एफआईआर रद्द करने का दबाव न बनाते हुए अन्य साक्ष्यों के आधार पर मुकदमे का सामना करने पर सहमति जताई थी, इसलिए कोर्ट ने आदेश दिया कि मामले की सुनवाई अब सीबीआई द्वारा एकत्र किए गए शेष अन्य सबूतों के आधार पर जारी रहेगी. Symbolic Photo.