H-1B वीजा पर $1,00,000 की फीस की अर्जी खारिज की
नई दिल्ली । डेस्क: अमेरिकी अपीलीय अदालत से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन को बड़ा झटका लगा है. बोस्टन स्थित फर्स्ट यूएस सर्किट कोर्ट ऑफ अपील्स ने H-1B वीजा पर लगाए गए 1,00,000 डॉलर (लगभग 83 लाख रुपये) के विवादित शुल्क को दोबारा लागू करने संबंधी याचिका को खारिज कर दिया है.
तीन जजों की पीठ ने निचली अदालत के उस आदेश को बरकरार रखा है, जिसमें इस भारी-भरकम फीस को गैर-कानूनी और अमेरिकी संसद (कांग्रेस) के अधिकारों का उल्लंघन करार दिया गया था.
अदालत ने स्पष्ट कहा कि ट्रंप प्रशासन यह साबित करने में विफल रहा कि उनके पास संसद की अनुमति के बिना ऐसा वित्तीय बोझ डालने का अधिकार है.
साथ ही कोर्ट ने पाया कि यदि इस फैसले पर रोक लगाई जाती, तो याचिका दायर करने वाले 20 राज्यों को गंभीर नुकसान पहुंचता.
उल्लेखनीय है कि ट्रंप प्रशासन ने पिछले साल सितंबर में एक उद्घोषणा के जरिए यह शुल्क लगाया था.
हालांकि, अब इस अदालती फैसले से अमेरिका में काम करने की इच्छा रखने वाले विदेशी पेशेवरों, विशेष रूप से भारतीय और चीनी आईटी विशेषज्ञों और उन्हें नौकरी देने वाली अमेरिकी टेक कंपनियों को बड़ी राहत मिली है.