छत्तीसगढ़ में भांग की खेती की याचिका खारिज
छत्तीसगढ़ में भांग की खेती करने की मांग की याचिका खारिज
बिलासपुर | संवाददाताः छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने भांग की खेती को बढ़ावा देने की जनहित याचिका को खारिज कर दिया है. हाईकोर्ट ने इसे समाज के लिए गंभीर खतरा बताते हुए कहा है कि राज्य में नीति निर्धारण करना राज्य सरकार और कार्यपालिका का विशेषाधिकार है. यह कोर्ट का क्षेत्राधिकार नहीं है.
हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर याचिकाकर्ता द्वारा जमा की गई सुरक्षा राशि को भी जब्त करने का निर्देश दिया है.
बिलासपुर के तिलक नगर निवासी डॉ. सचिन काले ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर छत्तीसगढ़ में भांग की व्यवसायिक खेती को बढ़ावा देने की मांग की थी. साथ ही राज्य सरकार को निर्देशित करने की भी अपील की थी.
उन्होंने अपनी याचिका में भांग को 'गोल्डन प्लांट' बताते हुए इसके औद्योगिक, औषधीय और आर्थिक उपयोग की वकालत की थी. साथ ही दावा किया था कि इससे किसानों को लाभ मिलेगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे.
याचिकाकर्ता ने यह भी बताया था कि उन्होंने 22 फरवरी 2024 को सभी संबंधित अधिकारियों को इस संबंध में पत्र भी लिखा था. लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं मिला. जिसके कारण उन्होंने जनहित याचिका लगाई है.
याचिकाकर्ता ने छत्तीसगढ़ में भाग की खेती की वकालत करते हुए इसके कई फायदे भी गिनाएं थे.
प्राचीन ग्रंथों, ब्रिटिश कालीन आयोग की रिपोर्ट और भारत सरकार की कुछ नीतियों का उल्लेख करते हुए भांग को भारतीय संस्कृति और चिकित्सा में महत्वपूर्ण बताया था.
उनका कहना था कि टीएचसी यानी टेट्राहाइड्रोकैनाबिनोल की मात्रा 0.3 फीसदी से कम होने पर यह पौधा नशे के लायक नहीं होता.
उन्होंने एनडीपीएस एक्ट की धारा 10 और 14 का हवाला देते हुए तर्क दिया था कि राज्य सरकार के पास इस खेती के लिए लाइसेंस देने का अधिकार है, जिसका अब तक उपयोग नहीं किया गया.
इस याचिका की सुनवाई चीफ जस्टिस रमेश कुमार सिन्हा और जस्टिस बीडी गुरु की डिवीजन बेंच में हुई.
सुनवाई के दौरान तर्कों के बाद कोर्ट ने कहा कि कोई भी जनहित याचिका तब तक नहीं चलेगी, जब तक कि इसमें व्यक्तिगत हित शामिल है. इस याचिका में जनहित की आड़ में व्यक्तिगत हित शामिल है.
कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता ने जनहित की आड़ में इस न्यायालय से ऐसे निर्देश मांगे जो राज्य की विधायी और कार्यकारी नीति के दायरे में आते हैं. कोर्ट मादक पदार्थों जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में नियंत्रण को लेकर सरकार को नीतिगत निर्णय लेने का निर्देश नहीं दे सकती है.
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि एनडीपीएस एक्ट के तहत भांग की खेती तभी संभव है जब वह चिकित्सा, वैज्ञानिक या बागवानी उद्देश्यों के लिए हो और उसके लिए कानूनी अनुमति प्राप्त की गई हो.