जर्मनी से अरिहा शाह की वापसी, PM मोदी से हस्तक्षेप की मांग
नई दिल्ली । डेस्क: जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ सोमवार, 12 जनवरी 2026 को अपनी दो दिवसीय भारत यात्रा के लिए गुजरात पहुंच रहे हैं, जहां वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे. इस उच्च स्तरीय बैठक के बीच सामाजिक कार्यकर्ताओं और अरिहा शाह के माता-पिता ने पीएम मोदी से अपील की है कि वे 5 वर्षीय अरिहा की भारत वापसी का मुद्दा चांसलर मर्ज़ के सामने प्रमुखता से उठाएं.
भारतीय नागरिक अरिहा शाह सितंबर 2021 से जर्मनी की फोस्टर केयर (पालक देखभाल) में है, जब जर्मन युवा सेवाओं (युगेंडाउमट) ने कथित दुर्व्यवहार के आरोपों में उसे उसके माता-पिता से अलग कर दिया था. हालांकि बाद में आपराधिक आरोप हटा लिए गए थे, लेकिन बच्ची को अब तक वापस नहीं सौंपा गया है.
'सेव अरिहा' टीम और कार्यकर्ताओं का आरोप है कि जर्मनी अरिहा के मानवाधिकारों और सांस्कृतिक अधिकारों का उल्लंघन कर रहा है. कार्यकर्ताओं के अनुसार, अरिहा को उसकी मातृभाषा गुजराती, हिंदी और जैन धर्म के संस्कारों से वंचित रखना संयुक्त राष्ट्र बाल अधिकार सम्मेलन (UNCRC) के खिलाफ है.
दूसरी ओर, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने संकेत दिए हैं कि मोदी-मर्ज़ वार्ता के दौरान द्विपक्षीय संबंधों के सभी महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा होगी.
जर्मन दूतावास के अधिकारियों का कहना है कि अरिहा को भारतीय संस्कृति से जोड़ने के लिए अंग्रेजी और हिंदी की कक्षाएं तथा मंदिर दर्शन जैसे प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन अरिहा के परिवार का तर्क है कि भारतीय परिवेश के बिना उसकी सांस्कृतिक पहचान बचाना मुश्किल है.
चांसलर मर्ज़ अपनी इस यात्रा के दौरान अहमदाबाद में साबरमती आश्रम जाएंगे और उसके बाद बेंगलुरु में जर्मन तकनीकी कंपनियों का दौरा करेंगे.
गौरतलब है कि अरिहा शाह का मामला एक भावनात्मक और कानूनी विवाद है, जो पिछले चार वर्षों से भारत और जर्मनी के बीच कूटनीतिक चर्चा का विषय बना हुआ है. इस मामले के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
शुरुआत (सितंबर 2021): अरिहा जब केवल 7 महीने की थी, तब जर्मनी की बाल कल्याण सेवा (Jugendamt) ने उसे उसके माता-पिता, धारा और भावेश शाह से अपनी कस्टडी में ले लिया था. उन पर बच्ची के साथ शारीरिक दुर्व्यवहार (Private Part में चोट) का आरोप लगाया गया था.
कानूनी मोड़: माता-पिता का कहना था कि वह चोट दुर्घटनावश लगी थी. बाद में जर्मन अधिकारियों ने माता-पिता के खिलाफ आपराधिक मामला तो बंद कर दिया, लेकिन बच्ची को उन्हें वापस नहीं सौंपा. जर्मन कोर्ट ने फैसला सुनाया कि माता-पिता बच्ची की देखभाल करने में सक्षम नहीं हैं.
सांस्कृतिक पहचान का मुद्दा: भारत सरकार और कार्यकर्ताओं का तर्क है कि अरिहा एक भारतीय नागरिक है. उसे जर्मनी के फोस्टर केयर (जहाँ वह मांसाहारी और गैर-भारतीय माहौल में रह रही है) में रखने के बजाय भारत वापस भेजा जाना चाहिए, ताकि वह अपनी भाषा (गुजराती/हिंदी), जैन धर्म और भारतीय संस्कृति के बीच बड़ी हो सके.
मौजूदा स्थिति: अरिहा वर्तमान में 5 वर्ष की हो चुकी है. भारतीय विदेश मंत्रालय लगातार उसकी वापसी की मांग कर रहा है. माता-पिता को महीने में केवल दो बार उससे मिलने की अनुमति है, जबकि भारतीय दूतावास को सीमित 'कॉन्सुलर एक्सेस' मिलता है.
आर्थिक बोझ: परिवार पर जर्मनी में कानूनी और प्रशासनिक कार्यवाही के लिए करीब 38 लाख रुपये का भारी-भरकम बिल भी लगाया गया है.